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गुरुद्वारा में दरबार सजा, गूंजा शबद-कीर्तन
अमर उजाला ब्यूरो इटावा
Updated Wed, 13 Apr 2016 11:53 PM IST
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शबद कीर्तन प्रस्तुत करते रागी जत्था।
- फोटो : अमर उजाला
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उत्साह, उमंग, खुशियों और संकल्प का त्योहार खालसा साजना दिवस बैसाखी हर्षोल्लास से मनाया गया। गुरुद्वारा श्री तेग बहादुर सिंह में बुधवार को अखंड पाठ में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया। दरबार सजा और रागी जत्थों ने शबद कीर्तन से संगत को निहाल किया। दिन भर चले कार्यक्रम में गुरु दरबार के दीवान के बाद लंगर का आयोजन हुआ, जिसमें सभी ने पंगत में बैठकर लंगर छका।
बैसाखी पर्व पर गुरुद्वारा में भव्य सजावट की गई। रंग बिरंगी विद्युत झालरों की अद्भुत छटा देखते ही बन रही थी। वहीं, गुरुद्वारा में नवजात बच्चों का नामकरण कराकर बच्चों को अमृतपान कराया गया। गुरुद्वारा के मुख्य ग्रंथी भाई राजेंदर सिंह ने नवजात बच्चों का नामकरण किया व उनको अमृतपान कराया। गुरुद्वारा में चल रहे अखंड पाठ की सेवा सरदार गुरुदेव सिंह व सिमरजीत सिंह ने की।
सभी को खजांची सरदार तरनजीत सिंह व सचिव सरदार गुरु वचन सिंह ने सरोपा भेंट कर सम्मानित किया। गुरुद्वारा कमेटी के अध्यक्ष सरदार हरजीत सिंह कालड़ा ने बताया कि बैसाखी समृद्धि, खुशियाें और संकल्प का त्योहार है। वर्ष 1699 में आज ही के दिन खालसा पंथ की स्थापना हुई थी। श्री गुरु गोविंद सिंह ने बैसाखी के विशाल समागम में कौम के लिए शहीदी के जज्बे की पांच सिखों की परीक्षा ली।
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गुरु और सिख धर्म के प्रति पांच सिखों की निष्ठा और समर्पण देते हुए गुरु साहिब ने उन्हें अमृत छकाया और पांच प्याराें को नाम दिया। पांच प्यारों को अमृत छकाने के बाद गुरु साहिब ने स्वयं भी पांच प्यारों से अमृत ग्रहण किया। अमृत छकाना एक तरह से धर्म और देश के खातिर कुर्बानी के लिए तैयार रहने के लिए संकल्प था। उधर, श्री गुरु तेग बहादुर साहब मार्केट कमेटी के तत्वावधान में बैसाखी पर्व को धूमधाम से मनाया गया और प्रसाद वितरण किया गया।
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बैसाखी पर्व पर गुरुद्वारा में भव्य सजावट की गई। रंग बिरंगी विद्युत झालरों की अद्भुत छटा देखते ही बन रही थी। वहीं, गुरुद्वारा में नवजात बच्चों का नामकरण कराकर बच्चों को अमृतपान कराया गया। गुरुद्वारा के मुख्य ग्रंथी भाई राजेंदर सिंह ने नवजात बच्चों का नामकरण किया व उनको अमृतपान कराया। गुरुद्वारा में चल रहे अखंड पाठ की सेवा सरदार गुरुदेव सिंह व सिमरजीत सिंह ने की।
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सभी को खजांची सरदार तरनजीत सिंह व सचिव सरदार गुरु वचन सिंह ने सरोपा भेंट कर सम्मानित किया। गुरुद्वारा कमेटी के अध्यक्ष सरदार हरजीत सिंह कालड़ा ने बताया कि बैसाखी समृद्धि, खुशियाें और संकल्प का त्योहार है। वर्ष 1699 में आज ही के दिन खालसा पंथ की स्थापना हुई थी। श्री गुरु गोविंद सिंह ने बैसाखी के विशाल समागम में कौम के लिए शहीदी के जज्बे की पांच सिखों की परीक्षा ली।
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गुरु और सिख धर्म के प्रति पांच सिखों की निष्ठा और समर्पण देते हुए गुरु साहिब ने उन्हें अमृत छकाया और पांच प्याराें को नाम दिया। पांच प्यारों को अमृत छकाने के बाद गुरु साहिब ने स्वयं भी पांच प्यारों से अमृत ग्रहण किया। अमृत छकाना एक तरह से धर्म और देश के खातिर कुर्बानी के लिए तैयार रहने के लिए संकल्प था। उधर, श्री गुरु तेग बहादुर साहब मार्केट कमेटी के तत्वावधान में बैसाखी पर्व को धूमधाम से मनाया गया और प्रसाद वितरण किया गया।