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बच्चों व महिलाओं को घी, दूध देना भूले अधिकारी
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इटावा। आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों और गर्भवती महिलाओं की सेहत सुधारने के लिए पोषाहार के साथ घी, दूध देने की योजना अधिकारी भूल चुके हैं। पिछले साल अक्तूबर माह में प्रदेश सरकार की ओर से यह योजना लागू हुई थी। तब केंद्रों पर घी व दूध भेजा गया था, लेकिन योजना लागू होने के बाद सिर्फ एक माह ही वितरण हुआ। उसके बाद से एक साल दो माह बीत चुके हैं, दोबारा केंद्रों पर बच्चों को न तो घी मिला न ही दूध। केवल चले की दाल, दलिया, चावल और रिफाइंड तेल देकर ही बच्चों व महिलाओं की सेहत सुधारने का दावा किया जा रहा है।
आंगनबाड़ी केंद्रों पर 6 माह से 3 वर्ष तक के 74876, 3 वर्ष से 6 वर्ष तक के 52067 बच्चे और 34103 गर्भवती महिलाएं पंजीकृत हैं। शासन ने इनकी सेहत सुधारने के लिए पिछले साल सभी को घी और दूध(दूध पाउडर) देने का निर्णय लिया था। उसी वक्त केंद्रों पर एक माह के लिए घी, दूध का स्टाक भी आया था। 6 माह से 3 वर्ष के बच्चों को 500 ग्राम घी, आधा किलो दूध पाउडर, 3 साल से 6 साल तक के बच्चों और गर्भवती महिलाओं को एक किलो घी और आधा किलो दूध पाउडर दिया गया लेकिन एक माह में इस घी और दूध से बच्चों की सेहत कितनी सुधरी होगी। इसका अंदाजा लगाया जा सकता है।
इटावा। इटावा जिले में कुल 1564 आंगनबाड़ी केंद्र चल रहे हैं। इनमें से 108 इटावा शहर में संचालित हैं। इन केद्रों पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाओं की नियुक्ति की गई है। यहां 6 माह से 3 वर्ष और 3 वर्ष से 6 वर्ष तक के बच्चों तथा गर्भवती महिलाओं के लिए पोषाहार में दलिया, दाल, चावल और रिफाइंड दिया जाता है। केद्रों पर आने वाले बच्चे कुपोषण का शिकार न होने पाएं, इसके लिए हर स्तर पर प्रयास किए जाते हैं। जो बच्चे कुपोषण का शिकार होते भी हैं, उनको पंजीकृत कर पोषित की श्रेणी में लाया जाता है। बच्चों के लिए वजन मशीन और खेलकूद के सामान की भी व्यवस्था है। जिले में 212 आंगनबाड़ी केेंद्र अपने भवनों में संचालित हो रहे हैं।
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इटावा। पोषाहार वितरण का काम ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत गठित स्वयं सहायता समूहों के जिम्मे है। अन्य जिलों में यह व्यवस्था है कि महिला स्वयं सहायता समूह पोषाहार आंगनबाड़ी केंद्र पर ले जाएगी। वहां कार्यकर्ता उसका वितरण करेेंगी लेकिन इटावा जिले में वितरण के काम से आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को दूर रखा गया है। उठान से लेकर वितरण तक सारा काम स्वयं सहायता समूहों को दिया गया है। अक्सर गांवों में वितरण को लेकर शिकायतें आती हैं। एक-एक दिन में 40-40 शिकायतें ऑनलाइन पोर्टल पर दर्ज हो रही हैं।
इटावा। जिला कार्यक्रम अधिकारी के पद पर एक साल से कोई स्थायी अधिकारी नहीं है। दूसरे विभागों के अधिकारियों को चार्ज देकर काम चलाया जा रहा है। पहले इस पद का प्रभार महेवा के बाल विकास परियोजना अधिकारी सुरेश कुमार यादव के पास था। उसके बाद पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी प्रशांत कुमार सिंह को प्रभारी बनाया गया। अब वर्तमान में प्रोबेशन अधिकारी सूरज कुमार के पास प्रभार है।
इटावा। सरकार ने गोशाला से गाय देने की पेशकश ऐसे परिवारों से की थी, जिनके घर में अतिकुपोषित बच्चे हों। उन परिवारों को निशुल्क गाय देकर 30 रुपये रोज का खर्चा गाय के लिए दिया जाना था। इस योजना में कुपोषित अथवा अतिकुुपोषित परिवार के किसी व्यक्ति ने आवेदन नहीं किया है।
इटावा। जिला कार्यक्रम अधिकारी सूरज कुमार ने बताया कि घी और दूध देने की योजना के बारे में वे जानकारी करेंगे।उन्होंने अभी विभाग का काम काज संभाला है। इस बारे में शासन से दिशा निर्देश प्राप्त कर कार्यवाही करेंगे।
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आंगनबाड़ी केंद्रों पर 6 माह से 3 वर्ष तक के 74876, 3 वर्ष से 6 वर्ष तक के 52067 बच्चे और 34103 गर्भवती महिलाएं पंजीकृत हैं। शासन ने इनकी सेहत सुधारने के लिए पिछले साल सभी को घी और दूध(दूध पाउडर) देने का निर्णय लिया था। उसी वक्त केंद्रों पर एक माह के लिए घी, दूध का स्टाक भी आया था। 6 माह से 3 वर्ष के बच्चों को 500 ग्राम घी, आधा किलो दूध पाउडर, 3 साल से 6 साल तक के बच्चों और गर्भवती महिलाओं को एक किलो घी और आधा किलो दूध पाउडर दिया गया लेकिन एक माह में इस घी और दूध से बच्चों की सेहत कितनी सुधरी होगी। इसका अंदाजा लगाया जा सकता है।
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इटावा। इटावा जिले में कुल 1564 आंगनबाड़ी केंद्र चल रहे हैं। इनमें से 108 इटावा शहर में संचालित हैं। इन केद्रों पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाओं की नियुक्ति की गई है। यहां 6 माह से 3 वर्ष और 3 वर्ष से 6 वर्ष तक के बच्चों तथा गर्भवती महिलाओं के लिए पोषाहार में दलिया, दाल, चावल और रिफाइंड दिया जाता है। केद्रों पर आने वाले बच्चे कुपोषण का शिकार न होने पाएं, इसके लिए हर स्तर पर प्रयास किए जाते हैं। जो बच्चे कुपोषण का शिकार होते भी हैं, उनको पंजीकृत कर पोषित की श्रेणी में लाया जाता है। बच्चों के लिए वजन मशीन और खेलकूद के सामान की भी व्यवस्था है। जिले में 212 आंगनबाड़ी केेंद्र अपने भवनों में संचालित हो रहे हैं।
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इटावा। पोषाहार वितरण का काम ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत गठित स्वयं सहायता समूहों के जिम्मे है। अन्य जिलों में यह व्यवस्था है कि महिला स्वयं सहायता समूह पोषाहार आंगनबाड़ी केंद्र पर ले जाएगी। वहां कार्यकर्ता उसका वितरण करेेंगी लेकिन इटावा जिले में वितरण के काम से आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को दूर रखा गया है। उठान से लेकर वितरण तक सारा काम स्वयं सहायता समूहों को दिया गया है। अक्सर गांवों में वितरण को लेकर शिकायतें आती हैं। एक-एक दिन में 40-40 शिकायतें ऑनलाइन पोर्टल पर दर्ज हो रही हैं।
इटावा। जिला कार्यक्रम अधिकारी के पद पर एक साल से कोई स्थायी अधिकारी नहीं है। दूसरे विभागों के अधिकारियों को चार्ज देकर काम चलाया जा रहा है। पहले इस पद का प्रभार महेवा के बाल विकास परियोजना अधिकारी सुरेश कुमार यादव के पास था। उसके बाद पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी प्रशांत कुमार सिंह को प्रभारी बनाया गया। अब वर्तमान में प्रोबेशन अधिकारी सूरज कुमार के पास प्रभार है।
इटावा। सरकार ने गोशाला से गाय देने की पेशकश ऐसे परिवारों से की थी, जिनके घर में अतिकुपोषित बच्चे हों। उन परिवारों को निशुल्क गाय देकर 30 रुपये रोज का खर्चा गाय के लिए दिया जाना था। इस योजना में कुपोषित अथवा अतिकुुपोषित परिवार के किसी व्यक्ति ने आवेदन नहीं किया है।
इटावा। जिला कार्यक्रम अधिकारी सूरज कुमार ने बताया कि घी और दूध देने की योजना के बारे में वे जानकारी करेंगे।उन्होंने अभी विभाग का काम काज संभाला है। इस बारे में शासन से दिशा निर्देश प्राप्त कर कार्यवाही करेंगे।