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कोहरे से आलू की फसल में झुलसा की संभावना बढ़ी
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इटावा। मौसम में कोहरा होने से आलू की फसल में झुलसा रोग आने की आशंका से किसान चिंतित हैं। फसल के नुकसान को रोकने के लिए किसान दवा के छिड़काव में जुटे हैं।
पिछले करीब दस दिन से मौसम में कोहरे का प्रकोप चल रहा है। इससे आलू फसलों पर विपरीत असर पड़ने की आशंका किसान जता रहे हैं। आलू उत्पादन के मामले में रकबे के हिसाब से इटावा जिला तीसरे स्थान पर है। कन्नौज पहले तथा फर्रुखाबाद दूसरे स्थान पर आता है। उद्यान विभाग के अनुसार इटावा जनपद में करीब 20 हजार हेक्टेयर आलू का रकबा है। जो पिछले साल की अपेक्षा करीब डेढ़ हजार हेक्टेयर अधिक है।
कोहरा पड़ने से आलू की पौधे में अधिक सर्दी के चलते झुलसना शुरू हो जाता है। देखते ही देखते ही सप्ताह भर में उस खेत की पूरी फसल नष्ट हो जाती है। झुलसा से बचाव के लिए दवा का समय से छिड़काव ही केवल उपाय है।
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इस संबंध में जिला उद्यान अधिकारी राजेंद्र कुमार साहू ने बताया कि जनपद में 18 हजार 920 हेक्टेयर में आलू का रकबा है, जो पिछले वर्ष से करीब 15 सौ हेक्टेयर अधिक है। उन्होंने बताया कि जनपद में आलू की अधिकतर फसल पिछेती ही है। पिछेती आलू में कुछ कोहरे से झुलसा रोग होने की आशंका बनी हुई है। किसानों को सलाह है कि वे दस से बारह दिन के अंतराल में दवा का छिड़काव आवश्यक रूप से करते रहें।
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पिछले करीब दस दिन से मौसम में कोहरे का प्रकोप चल रहा है। इससे आलू फसलों पर विपरीत असर पड़ने की आशंका किसान जता रहे हैं। आलू उत्पादन के मामले में रकबे के हिसाब से इटावा जिला तीसरे स्थान पर है। कन्नौज पहले तथा फर्रुखाबाद दूसरे स्थान पर आता है। उद्यान विभाग के अनुसार इटावा जनपद में करीब 20 हजार हेक्टेयर आलू का रकबा है। जो पिछले साल की अपेक्षा करीब डेढ़ हजार हेक्टेयर अधिक है।
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कोहरा पड़ने से आलू की पौधे में अधिक सर्दी के चलते झुलसना शुरू हो जाता है। देखते ही देखते ही सप्ताह भर में उस खेत की पूरी फसल नष्ट हो जाती है। झुलसा से बचाव के लिए दवा का समय से छिड़काव ही केवल उपाय है।
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इस संबंध में जिला उद्यान अधिकारी राजेंद्र कुमार साहू ने बताया कि जनपद में 18 हजार 920 हेक्टेयर में आलू का रकबा है, जो पिछले वर्ष से करीब 15 सौ हेक्टेयर अधिक है। उन्होंने बताया कि जनपद में आलू की अधिकतर फसल पिछेती ही है। पिछेती आलू में कुछ कोहरे से झुलसा रोग होने की आशंका बनी हुई है। किसानों को सलाह है कि वे दस से बारह दिन के अंतराल में दवा का छिड़काव आवश्यक रूप से करते रहें।