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आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस वे पर बनेंगे 200 रेन वाटर हार्वेस्टिंग टैंक
अमर उजाला ब्यूरो, इटावा
Updated Fri, 08 Sep 2017 12:07 AM IST
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आगरा लखनऊ एक्सप्रेस वे रेन वाटर हार्वेस्टिंग के लिए बनाए जा रहे टैंक।
- फोटो : amarujala
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ऊसराहार। भूगर्भ जल की समस्या को देखते हुए आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस वे पर बरसात के जल को संरक्षित करने के लिए रेन वाटर हार्वेस्टिंग योजना के तहत जल का संरक्षण किया जाएगा। 302 किलोमीटर लंबे एक्सप्रेस वे पर हजारों की संख्या में हार्वेस्टिंग टैकों के माध्यम से जल संरक्षण किया जाएगा।
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आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस वे को गुणवत्ता के साथ ही इस तरह डिजाइन किया गया है कि एक्सप्रेस वे पर आने वाले जल को संरक्षित करके भूगर्भ तक पहुंचाया जा सके। इसके लिए एक्सप्रेस वे के दोनों तरफ पाइपों के माध्यम से जल को जमीन के अंदर तक पहुंचाया जाएगा।
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इस पूरी प्रक्रिया में एक्सप्रेस वे पर आने वाले बरसाती पानी को नालियों के माध्यम से नीचे लाया जाएगा। ड्रेन के सहारे पानी को रेन वाटर हार्वेस्टिंग टैकों में लाया जाएगा। इन टैकों में कहीं एक तो कहीं दो बोरिंग करके पाइप डालकर जल को भूगर्भ तक पहुंचाया जाएगा।
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इटावा, औरैया और कन्नौज में 57 किमी के हिस्से में कार्य कर रही नागार्जुन कंस्ट्रक्शन कंपनी दो सौ के करीब रेन वाटर हार्वेस्टिंग टैकों का निर्माण कर रही है। 302 किमी के हिस्से में करीब एक हजार हार्वेस्टिंग टैकों का निर्माण किया जाएगा।
एनसीसी (नागार्जुन कंस्ट्रक्शन कंपनी) के प्रोजेक्ट मैनेजर नीरज ने बताया कि बरसात का जल संरक्षित हो सके, इसके लिए सभी को मिलकर प्रयास करना है । इसी के तहत एक्सप्रेस वे पर आने वाले जल को संरक्षित करने के लिए ही यह कार्ययोजना बनाई गई है।
एक्सप्रेस वे पर कई जगह आई खराबी
आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस वे पर ताखा क्षेत्र में कई स्थानों पर सड़क में पैचिंग का काम कार्यदायी संस्था नागार्जुन कंस्ट्रक्शन कंपनी के द्वारा किया जा रहा है। यह हाल तब है जब इस मार्ग पर भारी वाहनों को चलाने की अनुमति नहीं दी गई है।
सड़क पर आई खराबी की वजह से काफी बड़े हिस्से में यातायात को रोक कर दूसरी तरफ से ले जाया गया। एक्सप्रेस वे पर पहले भी कभी पुल पर तो कभी मुख्य मार्ग पर कमी आती रही है। चौपला के पास बनाए गये कट पर भी बडे़ हिस्से में सड़क कट गयी है।
जिससे वाहनों का आवागमन रोक दिया गया है। यहां एफकॉन कंस्ट्रक्शन कंपनी काम कर रही है। जबकि कट को बद करने के कई अन्य कारण बताए जा रहे हैं। एनसीसी के चीफ इंजीनियर दीपक कुमार का कहना है कि सड़क पर अगर कहीं कमी आती है तो उसे दुरुस्त कराया जाता है। यह रुटीन का काम है।