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तीस साल का इंतजार खत्म होगा

Wed, 31 Dec 2014 12:31 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, इटावा
ब्यूरो/अमर उजाला, इटावा Updated Wed, 31 Dec 2014 12:31 AM IST
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after thirty-years wait will end

इटावा-भिंड के बीच ट्रेन सफर का सपना जल्द पूरा होगा। मंगलवार को कमिश्नर ऑफ रेलवे सेफ्टी (सीआरएस) प्रभात कुमार बाजपेई ने भिंड से लेकर इटावा तक ट्रैक का निरीक्षण किया। उन्होंने चंबल पुल के पिलर पी-6 का बारीकी से निरीक्षण किया। यहां पिछले निरीक्षण में कमियां मिली थीं। मंगलवार के निरीक्षण में वे संतुष्ट नजर आए और इशारों ही इशारों में ट्रेन संचालन की बात कह गए।

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तीन दशक पूर्व वर्ष 1984 में तत्कालीन रेल मंत्री माधव राव सिधिंया ने इटावा-गुना रेल लाइन की आधारशिला रखी थी। वर्षों पहले मध्य प्रदेश के भिंड जिले तक ट्रेन संचालन शुरू हो गया। करीब 37 किलोमीटर भिंड से इटावा तक ट्रेन संचालन आज तक शुरू नहीं हो पाया।
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इटावा से भिंड के बीच ट्रेन संचालन की सारी तैयारी हो चुकी है। मंगलवार को सीआरएस ने अपनी टीम के साथ भिंड से लेकर इटावा तक रेलवे लाइन का निरीक्षण किया। उन्होंने क्वारी पुल के साथ चंबल और यमुना पुल को बारीकी से देखा। सबसे ज्यादा समय चंबल पुल पर दिया।
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वे यहां एक घंटे तक रुके और पी-6 पिलर में आई दरारों को देखा। इसके बाद वह उदी रेलवे स्टेशन आए और लंच करने के बाद निरीक्षण करते हुए शाम करीब पांच बजे इटावा रेलवे स्टेशन पर पहुंचे। निरीक्षण में उन्होंने सबसे पहले उन खामियों को देखा जो 5 दिसंबर को उजागर हुई थीं। उन्होंने ट्रेन संचालन से जुड़ी जानकारी ली।

बाद में इटावा रेलवे स्टेशन पर पत्रकारों से बातचीत करते हुए सीआरएस ने खुलकर तो नहीं लेकिन इशारों ही इशारों में ट्रेन संचालन के लिए हरी झंडी दे दी। वह अपने दूसरे निरीक्षण से संतुष्ट नजर आए। उन्होंने कहा कि वह अपनी फाइनल रिपोर्ट रेल मंत्रालय को सौंपेंगे। इसके बाद ट्रेन संचालन का निर्णय रेल मंत्रालय को ही लेना है।


चंबल पुल के पी-6 पिलर के संबंध में उनका कहना रहा कि आईआईटी कानपुर, आरडीएसओ के विशेषज्ञों की रिपोर्ट का अध्ययन किया है। आईआईटी ने चंबल पुल पर तीस किलोमीटर प्रति घंटा की स्पीड से ट्रेन को गुजारने की अनुमति दी है। निरीक्षण के वक्त उनके साथ डीआरएम झांसी नवीन चोपड़ा, एडीआरएम झांसी एके वर्मा, सीएओ एनसीआर लालू सिंह, चीफ इंजीनियर निर्माण सहित रेलवे अफसरों की पूरी टीम साथ रही।

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