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Etawah News: हाईकोर्ट से अनुमति के बाद दुष्कर्म पीड़िता का कराया गर्भपात
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आयुर्विज्ञान विवि में भर्ती बेसहारा महिला से दुष्कर्म का मामला
संवाद न्यूज एजेंसी
इटावा। हाईकोर्ट से अनुमति के बाद दुष्कर्म पीडि़त मानसिक बीमार महिला का आयुर्विज्ञान विवि में गर्भपात करा दिया गया है। डॉक्टरों की टीम महिला की लगातार निगरानी कर रही है।
18 मार्च को आयुर्विज्ञान विवि के मनोरोग विभाग में भर्ती महिला के साथ दुष्कर्म की सूचना विभागाध्यक्ष एके मिश्रा ने उच्चाधिकारियों को दी थी। विवि प्रबंधन की प्रथम दृष्टया जांच में सफाई कर्मी रवींद्र दुष्कर्म का आरोपी पाया गया था। सूचना पर पहुंची सैफई पुलिस ने आरोपी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करके उसे गिरफ्तार कर लिया था।
विवि प्रबंधन की ओर से तीन अलग-अलग जांच टीमें गठित की गई थीं। इनमें से मेडिकल टीम ने पीड़िता के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य का हवाला देकर उसका गर्भपात कराने की सलाह दी थी। इसके लिए आयुर्विज्ञान की लीगल टीम ने हाईकोर्ट ने प्रार्थना पत्र दिया था। मेडिकल रिपोर्ट का संज्ञान लेकर हाईकोर्ट ने गर्भपात के लिए छह अप्रैल को अनुमति दे दी थी।
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10 अप्रैल को आयुर्विज्ञान विवि ने महिला का गर्भपात करा दिया है। विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम पीड़िता के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य की 24 घंटे निगरानी कर रही है। प्रवक्ता सोमेंद्र पाल ने बताया कि पीड़िता की मानसिक और शारीरिक स्थितियों को देखते हुए हाईकोर्ट में प्रार्थना पत्र दिया गया था। अनुमति मिलने पर महिला का गर्भपात कराया गया है। महिला पूरी तरह से स्वस्थ है। उसकी निगरानी की जा रही है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
इटावा। हाईकोर्ट से अनुमति के बाद दुष्कर्म पीडि़त मानसिक बीमार महिला का आयुर्विज्ञान विवि में गर्भपात करा दिया गया है। डॉक्टरों की टीम महिला की लगातार निगरानी कर रही है।
18 मार्च को आयुर्विज्ञान विवि के मनोरोग विभाग में भर्ती महिला के साथ दुष्कर्म की सूचना विभागाध्यक्ष एके मिश्रा ने उच्चाधिकारियों को दी थी। विवि प्रबंधन की प्रथम दृष्टया जांच में सफाई कर्मी रवींद्र दुष्कर्म का आरोपी पाया गया था। सूचना पर पहुंची सैफई पुलिस ने आरोपी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करके उसे गिरफ्तार कर लिया था।
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विवि प्रबंधन की ओर से तीन अलग-अलग जांच टीमें गठित की गई थीं। इनमें से मेडिकल टीम ने पीड़िता के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य का हवाला देकर उसका गर्भपात कराने की सलाह दी थी। इसके लिए आयुर्विज्ञान की लीगल टीम ने हाईकोर्ट ने प्रार्थना पत्र दिया था। मेडिकल रिपोर्ट का संज्ञान लेकर हाईकोर्ट ने गर्भपात के लिए छह अप्रैल को अनुमति दे दी थी।
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10 अप्रैल को आयुर्विज्ञान विवि ने महिला का गर्भपात करा दिया है। विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम पीड़िता के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य की 24 घंटे निगरानी कर रही है। प्रवक्ता सोमेंद्र पाल ने बताया कि पीड़िता की मानसिक और शारीरिक स्थितियों को देखते हुए हाईकोर्ट में प्रार्थना पत्र दिया गया था। अनुमति मिलने पर महिला का गर्भपात कराया गया है। महिला पूरी तरह से स्वस्थ है। उसकी निगरानी की जा रही है।