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कोर्ट से 26 साल बाद दोषी को मिली तीन साल की सजा

Fri, 03 Dec 2021 11:39 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Fri, 03 Dec 2021 11:39 PM IST
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After 26 years from the court, the guilty got three years' sentence
इटावा। भरथना थाना क्षेत्र के मोढ़ी गांव में मारपीट कर अंग भंग करने और गालीगलौज के मामले में अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट नूहिन जैदी ने 26 साल बाद एक दोषी को तीन साल के साधारण कारावास की सजा सुनाते हुए 14 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।
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अर्थदंड अदा न करने पर एक माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा। मामले में जेल में बिताई गई अवधि को भी समायोजित किया जाएगा।
मामले में तीन और आरोपी थे। इनमें से दो की 26 साल तक चली सुनवाई के बीच मौत हो गई थी। अभियोजन अधिकारी अजय कुमार ने बताया कि मोढ़ी गांव निवासी रमेश चंद्र ने मां के नाम की जमीन बेईमानी से घटना के तीन साल पहले अपने नाम करा ली थी।
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इसी को लेकर रमेश चंद्र की बड़े भाई महेश चंद्र से अनबन चल रही थी। महेश चंद्र नौ दिसंबर 1995 को जानवरों का गोबर समेट रहा था। उसी दौरान रमेश के बेटे घनश्याम से उसकी कहासुनी हो गई।
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महेश चंद्र की बातों से तैश में आए घनश्याम व उसके भाई जयकरन व गांव के छविनाथ ने महेश पर बल्लम, कांता व लाठी से हमला कर दिया था। रमेश चंद्र की पत्नी पुष्पा देवी बीच-बचाव करने पहुंची, तो उसे भी आरोपियों ने पीटा।
रमेश चंद्र ने थाने में रिपोर्ट दर्ज कराने पर जान से मारने की धमकी भी दी थी। वहीं, महेश चंद्र की तहरीर पर पुलिस ने घनश्याम, रमेश चंद्र, जयकरन उर्फ जयनारायण व छविनाथ के खिलाफ मारपीट के अंग-भंग करने, गालीगलौज और धमकी की रिपोर्ट दर्ज की।
कोर्ट के आदेश पर पुलिस ने विवेचना शुरू की। कोर्ट में हाजिर होकर जमानत कराई। उसके बाद विवेचक ने चारों पर लगे आरोपों को सही पाया और कोर्ट में आरोपपत्र दाखिल किया।
अभियोजन अधिकारी के मुताबिक, मामले की सुनवाई अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कोर्ट संख्या एक नूहिन जैदी की अदालत में चल रही थी। कोर्ट में धमकी देने का आरोप सिद्ध नहीं हो सका।
न्यायाधीश ने मारपीट कर अंग-भंग करने, गालीगलौज, एक राय होकर मारपीट के दोषी घनश्याम को तीन वर्ष के साधारण कारावास की सजा सुनाते हुए अर्थदंड भी लगाया है।

अर्थदंड की 50 फीसदी राशि महेश चंद्र को देने व बाकी की राशि राज्य सरकार के खाते में जमा कराने को कहा है। 26 साल तक चले केस की सुनवाई के दौरान अभियुक्त छविनाथ व रमेश चंद्र की मौत हो गई।
अभियुक्त जयकरन उर्फ जयनारायण कोर्ट में उपस्थित नहीं हुआ, इसलिए उसकी फाइल को पहले ही अलग कर दिया गया था।
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