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अबकी 45 दिन बजेगी शहनाई
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निवाड़ीकला। नए वर्ष 2022 में 45 से अधिक दिनों तक शहनाई और बैंडबाजों की गूंज सुनाई देगी। इस वर्ष सहालग की जमकर भरमार है। आचार्यों के अनुसार, यह तिथियां 15 जनवरी से शुरू होकर 15 दिसंबर तक चलेंगी।
इसके बाद 16 दिसंबर को मलमास की शुरुआत हो जाएगी, जिससे सभी शुभ कार्यों पर ब्रेक लग जाएगा। इस बार मई और जून के महीने में शादियों के भरपूर मुहूर्त हैं। बीते वर्ष 2020 और 21 में कोरोना के कारण शादी समारोहों पर विपरीत प्रभाव पड़ा था।
शादी-समारोह मात्र औपचारिक आयोजन भर बनकर रह गए थे। शादियों का उल्लास पूरी तरह से खत्म हो गया था, इससे बाजार और रोजगार को भी झटका लगा था।
इस साल भी कोरोना के नए वैरिएंट ओमिक्रॉन को लेकर भी कई तरह की आशंकाएं जताई जा रही हैं। इसकी वजह से इस साल भी आयोजनों पर विपरीत असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
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आचार्य पंडित विनोद कुमार दुबे ने बताया कि वर्ष 2021 में विवाह लग्नों की कमी थी। इस इस साल ऐसा नहीं है। इस वर्ष जनवरी महीने से ही अच्छी लग्न हैं।
उन्होंने बताया कि 14 जनवरी दोपहर दो बजकर 28 मिनट पर मकर संक्रांति लग रही, लिहाजा मकर संक्रांति का पर्व 14 जनवरी को ही मनाया जाएगा। सहालग की शुरुआत 15 जनवरी से हो जाएगी। 22 फरवरी को गुरु अस्त हो जाने के कारण 23 मार्च तक मांगलिक कार्य स्थगित रहेंगे।
वर्ष के अंतिम माह दिसंबर में 16 तारीख से मलमास लग जाने से वैवाहिक कार्यक्रम संपन्न नहीं होंगे। आचार्य पंडित राम जी पांडे के मुताबिक, कुछ तिथियां ऐसी भी होती हैं, जिनमें वैवाहिक लग्न हैं।
इसमें पांच फरवरी को वसंत पंचमी, चार मार्च को फुलेरा दौज, तीन मई को अक्षय तृतीया, आठ जुलाई को भड्लि नवमी, चार नवंबर को देवोत्थनी एकादशी हैं। यह तिथियां विवाह आदि शुभ कार्यों के लिए काफी अच्छी बताई गई है।
उधर, देश में कोरोना के बढ़ते कदमों से मैरिज होम संचालक, डीजे और बैंड संचालक भी काफी परेशान हैं। उनका कहना है कि अगर कोरोना के केस बढ़े तो पहले जैसी पाबंदी लग सकती है। ऐसे में बीते वर्षों की भांति इस वर्ष भी नुकसान हो सकता है।
ये हैं प्रमुख तिथियां
22 और 23 जनवरी, पांच फरवरी, छह, 10, 18, 19 फरवरी, 15 अप्रैल, 19, 20, 21, 22, 23, दो मई, तीन, 10, 11, 12, 18, 20, 25, 26, 31 मई, एक जून, छह, आठ, 11, 13, 20, 21, तीन जुलाई, चार, आठ और नौ जुलाई, दो दिसंबर, आठ, नौ और 14 दिसंबर।
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इसके बाद 16 दिसंबर को मलमास की शुरुआत हो जाएगी, जिससे सभी शुभ कार्यों पर ब्रेक लग जाएगा। इस बार मई और जून के महीने में शादियों के भरपूर मुहूर्त हैं। बीते वर्ष 2020 और 21 में कोरोना के कारण शादी समारोहों पर विपरीत प्रभाव पड़ा था।
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शादी-समारोह मात्र औपचारिक आयोजन भर बनकर रह गए थे। शादियों का उल्लास पूरी तरह से खत्म हो गया था, इससे बाजार और रोजगार को भी झटका लगा था।
इस साल भी कोरोना के नए वैरिएंट ओमिक्रॉन को लेकर भी कई तरह की आशंकाएं जताई जा रही हैं। इसकी वजह से इस साल भी आयोजनों पर विपरीत असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
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आचार्य पंडित विनोद कुमार दुबे ने बताया कि वर्ष 2021 में विवाह लग्नों की कमी थी। इस इस साल ऐसा नहीं है। इस वर्ष जनवरी महीने से ही अच्छी लग्न हैं।
उन्होंने बताया कि 14 जनवरी दोपहर दो बजकर 28 मिनट पर मकर संक्रांति लग रही, लिहाजा मकर संक्रांति का पर्व 14 जनवरी को ही मनाया जाएगा। सहालग की शुरुआत 15 जनवरी से हो जाएगी। 22 फरवरी को गुरु अस्त हो जाने के कारण 23 मार्च तक मांगलिक कार्य स्थगित रहेंगे।
वर्ष के अंतिम माह दिसंबर में 16 तारीख से मलमास लग जाने से वैवाहिक कार्यक्रम संपन्न नहीं होंगे। आचार्य पंडित राम जी पांडे के मुताबिक, कुछ तिथियां ऐसी भी होती हैं, जिनमें वैवाहिक लग्न हैं।
इसमें पांच फरवरी को वसंत पंचमी, चार मार्च को फुलेरा दौज, तीन मई को अक्षय तृतीया, आठ जुलाई को भड्लि नवमी, चार नवंबर को देवोत्थनी एकादशी हैं। यह तिथियां विवाह आदि शुभ कार्यों के लिए काफी अच्छी बताई गई है।
उधर, देश में कोरोना के बढ़ते कदमों से मैरिज होम संचालक, डीजे और बैंड संचालक भी काफी परेशान हैं। उनका कहना है कि अगर कोरोना के केस बढ़े तो पहले जैसी पाबंदी लग सकती है। ऐसे में बीते वर्षों की भांति इस वर्ष भी नुकसान हो सकता है।
ये हैं प्रमुख तिथियां
22 और 23 जनवरी, पांच फरवरी, छह, 10, 18, 19 फरवरी, 15 अप्रैल, 19, 20, 21, 22, 23, दो मई, तीन, 10, 11, 12, 18, 20, 25, 26, 31 मई, एक जून, छह, आठ, 11, 13, 20, 21, तीन जुलाई, चार, आठ और नौ जुलाई, दो दिसंबर, आठ, नौ और 14 दिसंबर।