चार मौतों का सदमा, हरीशंकर ने जान देने की कोशिश की

Etawah Updated Tue, 24 Jul 2012 12:00 PM IST
ऊसराहार (इटावा)। बरालोकपुर में एक ही परिवार में चार मौतें होने और एक के सैफई मिनी पीजीआई में मौत व जिंदगी से जूझने के सदमे से परिवार के मुखिया हरीशंकर ने अपनी जीवन लीला समाप्त करने की कोशिश की। गनीमत यह रही कि शोक संवेदना व्यक्त करने आई महिलाओं की नजर उन पर पड़ गई और उन्हें फांसी पर लटकने से बचा लिया गया। उधर, समय गुजरने के साथ ही ग्रामीणों का आक्रोश कम होता नजर आया लेकिन परिवारीजनों के खोने का गम लोगों के दिलोदिमाग पर हावी रहा।
अनियंत्रित चेसिस से कुचलने के कारण हुई चौदह लोगों की मौत से गांव में तीसरे दिन भी मातमी सन्नाटा बरकरार है। पीड़ित परिवारों के आंसू अभी थम नहीं रहे हैं। रह रहकर सिसकारियां सुनाईं देती हैं। सांत्वना देने वालों के मुख से भी शब्द नहीं फूटते। वह खुद रो पड़ते।
गांव के हरीशंकर पाल हादसे के बाद से अपनी सुधबुध खो बैठे हैं। बस आसमान की ओर एकटक नजरें गड़ाए रहते हैं। इस हादसे का पहाड़ उनपर बुरी तरह टूटा है। पत्नी श्रीकुंवर, पुत्रवधु प्रमिला देवी, नातिन नीलू व वर्षा चेसिस की चपेट में आकर काल के गाल में समा गए। पुत्री मोहिनी मिनी पीजीआई में मौत और जिंदगी से जूझ रही है। सोमवार की सुबह हरीशकंर ने एकांत में जाकर फांसी फंदा बनाकर गले में डाल लिया। इस बीच संात्वना व्यक्त करने पहुंची कुछ महिलाओं की नजर उस तरफ पहुंची तो चीख पड़ीं। उनको फांसी के फंदे से उतार लिया गया। पुत्र अनिल बताते हैं कि बाबू जी को बहुत समझा रहे हैं पर वह कुछ समझना ही नहीं चाहते।
हरीशंकर पाल के परिवार में कोई भी महिला सदस्य नहीं बची है। उनकी गोदी में उनका कक्षा तीन में पढ़ने वाला नाती बॉबी खेलकर आया और गोद में बैठ गया। हरीशंकर के परिवार के सदस्य यह दृश्य देख गमगीन हो उठे। इसी तरह का नजारा उन सभी घरों में था जहां का कोई न कोई सदस्य हादसे का शिकार हुआ।

मम्मी आती होंगी चुप हो जाओ
मम्मी आती ही होंगी चुप हो जाओ बेटा, मम्मी तुम्हारे लिए टॉफी लेने गई है अब चुप हो जाओ। हादसे के शिकार हुए हर एक परिवार में नौनिहालों को चुप कराने के यही दो चार शब्द कहे जा रहे है। मां के पास जाने की जिद कर रही दस वर्षीय प्रेमलता को उसके पापा अनिलकुमार के मुख से निकले यह शब्द वहां मौजूद लोगों की आंखों में आंसू भर देते। ट्रक हादसा दर्जन भर महिलाओं को निगल गया जिससे कई मासूमों के सिर से मां का साया भी छिन गया। पंकज कठेरिया के परिवार में उसकी मां राधादेवी और पत्नी उपासना को हादसे ने छीन लिया। परिवार में अब दो बच्चे दो वर्षीय रिया और चार माह की नव्या बची हुई है। यह दोनों बच्चियां टकटकी लगाकर घर के दरवाजे पर अपने पापा पंकज के साथ मां और दादी का इंतजार कर रहे हैं। चार माह की नव्या तो रो रोकर मां को पुकारती रही। वह अभी तक मां शब्द कहना साफ-साफ नहीं सीख सकी। इसी तरह किसी परिवार में सोहित तो किसी परिवार में सपना और किसी में बाबी चीख चीख कर मां को पुक ार रहीं थीं।

मौत दस्तक देकर चली गई
बरालोकपुर ट्रक हादसे में कुछ लोग ऐसे भी हैं जिनके दरवाजों पर मौत दस्तक देकर चली गई। 70 वर्षीय तिलक सिंह यादव हादसे के वक्त बरामदे में चारपाई पर बैठकर खाना खाने ही जा रहे थे कि ट्रक उनके बरामदे के पिलर को तोड़ता हुआ रुक गया। उनकी चारपाई टूट गई लेकिन वह बाल-बाल बच गए। तिलक सिंह बताते हैं कि एक झटके में वह चारपाई से गिरने की वजह से बच गए जबकि चारपाई के नीचे बैठे बालेश्वर दयाल (70) ट्रक की चपेट में आने से घायल हो गए। तिलक सिंह के पुत्र सुभाष यादव जो जसवंतनगर स्टेट बैंक में कर्मचारी हैं, बताते हैं कि उनके दरवाजे पर हर रात गांव के लोग एकत्रित होकर परिचर्चा करते हैं। घटना के दिन पिताजी पैतृक गांव चले गए और घटना से कुछ समय पहले ही आए थे और खाना खा रहे थे यदि वह गांव में पहले से होते और गांव के लोगों की पंचायत लगी होती तो हादसा और बड़ा होता।

मायके जाने से बच गई रिंकी
हादसे में परिवार की दो महिलाएं गर्भवती विट्टनश्री तथा नेमादेवी को खो देने वाले परिवार में एक और बहू रिंकी अपने मायके कमलपुर विधूना गई हुई थी, परिवार के जगदीश कठेरिया बताते हैं कि परिवार की सभी महिलाएं एक साथ शौच के लिए जाया करती थीं। रिंकी मायके न गई होती तो वह भी घटना की शिकार बन जाती।
डोली से पहले अर्थी उठ गई
हादसे का शिकार हुई अनिल कठेरिया क ी बहन रंजना कठेरिया(23) का रिश्ता फर्रुखाबाद जनपद मेें तय हुआ था। इसी सहालग में उसकी बारात आनी थी लेकिन डोली उठने से पहले ही उसकी अर्थी उठ गई।

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