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अस्पतालों की बदहाली पर डीएम ने लिया संज्ञान
Etawah
Updated Tue, 10 Jul 2012 12:00 PM IST
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इटावा। मानकों को ताक पर रखकर जिले में चल रहे नर्सिंग होम व हास्पिटलों की बदहाली की तस्वीर पर अमर उजाला की मुहिम का असर नजर आने लगा है। पूरे मामले में मुख्य चिकित्साधिकारी लीपापोती करने में जुटे रहे तो एक सप्ताह बाद जिलाधिकारी पी. गुरुप्रसाद ने स्वत: संज्ञान में लिया। जिलाधिकारी ने सीएमओ से इस बारे में रिपोर्ट तलब की है। डीएम ने एक सप्ताह में रिपोर्ट देने को कहा है।
जिले की बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं, नर्सिंग होम व हास्पिटलों में नियम-मानकों की अनदेखी की पड़ताल करते हुए अमर उजाला ने 4 से लेकर 9 जुलाई तक लगातार सीरीज प्रकाशित की। आम जनता ने भी फोन करके अस्पतालों की मनमानी पर अपनी पीड़ा बताई। पड़ताल में कहीं नर्सिंगहोम टीनशेड के नीचे चलता मिला तो कहीं दुकानों व चिकित्सकों के मकानों में।
चिकित्सा व्यवस्था की बदहाली पर सबसे पहले कार्रवाई मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. एसएच जायसी को करनी चाहिए थी लेकिन पूरे मामले में वह चुप्पी साधे रहे। कई बार उनसे जानकारी चाही गई, लेकिन वह टालते रहे। सोमवार को जिलाधिकारी पी. गुरुप्रसाद ने अमर उजाला में छपी खबरों को संज्ञान में लिया। डीएम कार्यालय से समाचार पत्र की कटिंग सीएमओ को भेजकर उनसे जवाब मांगा गया। इस बात पर नाराजगी जताई गई कि बदहाली की तस्वीर दिखाए जाने के बाद भी उनकी चुप्पी का कारण समझ में नहीं आता।
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जिलाधिकारी ने सीएमओ से जवाब मांगा है कि आखिर मकान व दुकान में वर्षों से चल रहे नर्सिंग होम व हास्पिटल के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की गई। सीएमओ इस पूरे मामले की जांच करके एक सप्ताह के भीतर उन्हें रिपोर्ट भेजें।
सीएमओ से दो टूक
सीएमओ बोले: कार्रवाई के लिए अभी वक्त नहीं
इटावा। जिले में नर्सिंग व हास्पिटल मनमाने तरीके से चल रहे हैं और जिले के सीएमओ पूरे मामले में अनभिज्ञता जाहिर कर रहे हैं। अमर उजाला ने अस्पतालों की बदहाल हालत को लेकर कई बार उनसे संपर्क किया। हर बार व्यस्तता की बात कहते हुए अगले दिन बात करने को कहा।
सोमवार को अमर उजाला संवाददाता जब इस मामले में उनसे जानकारी लेने उनके कार्यालय पहुंचा तो उन्होंने दो टूक शब्दों में कुछ भी कहने से साफ इंकार कर दिया। बोले मैं तो जनता का सेवक हूं। सेवक को हमेशा पीछे रहना चाहिए। अखबारों में तो नेताओं को छपना चाहिए। कई सवाल किए लेकिन उन्होंने एक भी सवाल का स्पष्ट जवाब नहीं दिया। अमर उजाला ने जब उन्हें बहुत कुरेदा तो उनकी झल्लाहट सामने आई। सवालों के जवाब में उन्होंने जैसा भी कहा वैसा ही आपके सामने पेश है।
-नर्सिंग होम में मानकों का पालन नहीं हो रहा है, क्या वजह है।
आप क्या सब नर्सिंगहोम-हास्पिटल बंद कराना चाहते हो। इन्हीं अस्पतालों में 75 फीसदी जनता का इलाज होता है।
-हमारा मकसद किसी अस्पताल को बंद कराना नहीं, व्यवस्था दुरुस्त कराना है। अमर उजाला में छपे समाचारों को आपने पढ़ा क्या।
समय ही नहीं मिला, सुबह फील्ड में निकल जाता हूं, शाम को लौटता हूं। कई दिन से अखबार ही नहीं पढ़ सका हूं।
-नर्सिंगहोम-हास्पिटल घरों व दुकानों में चल रहे हैं, पुराने ग्लब्स का इस्तेमाल हो रहा है।
तो क्या हुआ! ऐसा कोई नियम तो है नहीं कि मकानों में अस्पताल नहीं चल सकते।
-नर्सिंगहोम निर्माण के अपने मानक हैं।
हमें तो मानकों की जानकारी नहीं है। न ही कोई सरकारी आदेश है। आप के पास हो तो दे दो, फिर हम कार्रवाई जरूर करेंगे।
-फिलहाल जो खामियां सामने आई हैं, इन्हें दुरुस्त करने के लिए क्या किया जाएगा।
अभी वक्त नहीं है, फिर किसी दिन बात करता हूं। डीएम की मीटिंग में जाना है।
-सरकारी और प्राइवेट दोनों अस्पतालों में बदहाली पर आपका ऐसा ही रवैया है।
आप मसले को तूल दे रहे हैं, इस पर मुझे कुछ नहीं कहना।
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जिले की बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं, नर्सिंग होम व हास्पिटलों में नियम-मानकों की अनदेखी की पड़ताल करते हुए अमर उजाला ने 4 से लेकर 9 जुलाई तक लगातार सीरीज प्रकाशित की। आम जनता ने भी फोन करके अस्पतालों की मनमानी पर अपनी पीड़ा बताई। पड़ताल में कहीं नर्सिंगहोम टीनशेड के नीचे चलता मिला तो कहीं दुकानों व चिकित्सकों के मकानों में।
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चिकित्सा व्यवस्था की बदहाली पर सबसे पहले कार्रवाई मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. एसएच जायसी को करनी चाहिए थी लेकिन पूरे मामले में वह चुप्पी साधे रहे। कई बार उनसे जानकारी चाही गई, लेकिन वह टालते रहे। सोमवार को जिलाधिकारी पी. गुरुप्रसाद ने अमर उजाला में छपी खबरों को संज्ञान में लिया। डीएम कार्यालय से समाचार पत्र की कटिंग सीएमओ को भेजकर उनसे जवाब मांगा गया। इस बात पर नाराजगी जताई गई कि बदहाली की तस्वीर दिखाए जाने के बाद भी उनकी चुप्पी का कारण समझ में नहीं आता।
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जिलाधिकारी ने सीएमओ से जवाब मांगा है कि आखिर मकान व दुकान में वर्षों से चल रहे नर्सिंग होम व हास्पिटल के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की गई। सीएमओ इस पूरे मामले की जांच करके एक सप्ताह के भीतर उन्हें रिपोर्ट भेजें।
सीएमओ से दो टूक
सीएमओ बोले: कार्रवाई के लिए अभी वक्त नहीं
इटावा। जिले में नर्सिंग व हास्पिटल मनमाने तरीके से चल रहे हैं और जिले के सीएमओ पूरे मामले में अनभिज्ञता जाहिर कर रहे हैं। अमर उजाला ने अस्पतालों की बदहाल हालत को लेकर कई बार उनसे संपर्क किया। हर बार व्यस्तता की बात कहते हुए अगले दिन बात करने को कहा।
सोमवार को अमर उजाला संवाददाता जब इस मामले में उनसे जानकारी लेने उनके कार्यालय पहुंचा तो उन्होंने दो टूक शब्दों में कुछ भी कहने से साफ इंकार कर दिया। बोले मैं तो जनता का सेवक हूं। सेवक को हमेशा पीछे रहना चाहिए। अखबारों में तो नेताओं को छपना चाहिए। कई सवाल किए लेकिन उन्होंने एक भी सवाल का स्पष्ट जवाब नहीं दिया। अमर उजाला ने जब उन्हें बहुत कुरेदा तो उनकी झल्लाहट सामने आई। सवालों के जवाब में उन्होंने जैसा भी कहा वैसा ही आपके सामने पेश है।
-नर्सिंग होम में मानकों का पालन नहीं हो रहा है, क्या वजह है।
आप क्या सब नर्सिंगहोम-हास्पिटल बंद कराना चाहते हो। इन्हीं अस्पतालों में 75 फीसदी जनता का इलाज होता है।
-हमारा मकसद किसी अस्पताल को बंद कराना नहीं, व्यवस्था दुरुस्त कराना है। अमर उजाला में छपे समाचारों को आपने पढ़ा क्या।
समय ही नहीं मिला, सुबह फील्ड में निकल जाता हूं, शाम को लौटता हूं। कई दिन से अखबार ही नहीं पढ़ सका हूं।
-नर्सिंगहोम-हास्पिटल घरों व दुकानों में चल रहे हैं, पुराने ग्लब्स का इस्तेमाल हो रहा है।
तो क्या हुआ! ऐसा कोई नियम तो है नहीं कि मकानों में अस्पताल नहीं चल सकते।
-नर्सिंगहोम निर्माण के अपने मानक हैं।
हमें तो मानकों की जानकारी नहीं है। न ही कोई सरकारी आदेश है। आप के पास हो तो दे दो, फिर हम कार्रवाई जरूर करेंगे।
-फिलहाल जो खामियां सामने आई हैं, इन्हें दुरुस्त करने के लिए क्या किया जाएगा।
अभी वक्त नहीं है, फिर किसी दिन बात करता हूं। डीएम की मीटिंग में जाना है।
-सरकारी और प्राइवेट दोनों अस्पतालों में बदहाली पर आपका ऐसा ही रवैया है।
आप मसले को तूल दे रहे हैं, इस पर मुझे कुछ नहीं कहना।