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नहरों, बंबों की देखरेख करेंगे किसान

Thu, 06 Mar 2014 05:31 AM IST
Etawah
Etawah Updated Thu, 06 Mar 2014 05:31 AM IST
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इटावा। नहरों और बंबों की देखरेख का जिम्मा अब खुद किसान उठाएंगे। सरकार ने इस दिशा में कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। बुधवार को इसी उद्देश्य से उत्तर प्रदेश वाटर सेक्टर रिस्ट्रक्चरिंग परियोजना के फेज-टू के तहत विकास भवन में कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसमें केंद्र सरकार के राष्ट्रीय पेयजल एवं स्वच्छता मिशन के प्रमुख सलाहकार एवं पूर्व आईएफएस राकेश मैत्रेय ने सहभागी सिंचाई प्रबंधन को नहरों और रजबहों के लिए सबसे उपयोगी माध्यम बताया। उन्होंने कहा कि जब तक सूचना, शिक्षा और संचार के माध्यम को अपनाया नहीं जाएगा, तब तक योजनाएं सफल नहीं हो सकती हैं।
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राकेश मैत्रेय के मुताबिक सहभागी सिंचाई प्रबंधन का अर्थ है कि कुलाबा, अल्पिका, रजबहा, शाखा (नहर) से संबंधित हरेक कार्य में किसानों की सहभागिता सुनिश्चित करना है। नहर उन्हीं की है और उनको ही सफाई रखनी है। इसके तहत किसानों की समिति ही नहरों की पुनर्स्थापना व अनुरक्षण के साथ जल वितरण और किफायती प्रयोग का प्रबंधन करेगी। इससे कमांड क्षेत्र में जल का किफायती उपयोग होने के साथ अधिक से अधिक सिंचाई हो सके।
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कार्यशाला का उद्घाटन करते हुए डीएम विद्या भूषण ने इस परियोजना के व्यापक प्रचार प्रसार करने की बात कही। डीएम ने कहा कि नहरों में जल प्रबंधन के लिए सहभागिता बढ़ाने के प्रयास हों। सीडीओ डॉ. अशोक चंद्र ने कहा कि जिले में जल की अपार संभावनाएं हैं, लेकिन जल का सदुपयोग नहीं हो रहा, इसलिए यह परियोजना लागू की गई है। इसमें उत्तर प्रदेश के 16 जिलों में इटावा भी शामिल किया गया है। उन्होंने किसानों से अपील की कि नहरों के स्वामित्वबोध के लिए सहभागिता को अवश्य अपनाएं।
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दीन दयाल उपाध्याय राज्य ग्राम्य विकास संस्थान लखनऊ के अपर निदेशक डॉ. वरदानी ने बताया कि इस परियोजना का मकसद है कि नहर कमांड क्षेत्र में फसलाें की उत्पादकता बहुत अच्छी हो। प्रदेश में नहर कमांड से सिंचाई सुविधा उपलब्ध होने के बावजूद फसलों की उत्पादकता अत्यंत कम हैं। इसकी प्रमुख वजह कई हैं। मसलन नहरों के पानी का समुचित उपयोग नहीं हो पाता, उनकी पर्याप्त देखरेख नहीं हो पाती, सिंचाई के प्रबंधन पर खर्च अधिक आता है।

कार्यशाला में पैक्ट के प्रशिक्षण समन्वयक नंद किशोर, डीआरडीए पीडी वीरपाल सिंह, डीडीओ अनिल कुमार सिंह, क्षेत्रीय ग्राम्य विकास संस्थान बकेवर के आचार्य चरन सिंह पिपल, आचार्य मैनपुरी जितेंद्र त्रिपाठी, सीनियर इन्सट्रक्टर राकेश त्रिपाठी, प्रशिक्षक दिलीप मिश्र और रमाशंकर सचान ने भी योजना से जुड़ी जानकारी दी। इस दौरान जितेंद्र सिंह चौहान, डा. सत्येंद्र गुप्ता, अशोक गोयल समेत सिंचाई, ग्राम्य विकास, पंचायतीराज, ग्राम प्रधान, रोजगार सेवक आदि मौजूद रहे।
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