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‘हर हाल में मांगें मनवा कर रहेंगे’
Etawah
Updated Sat, 19 Oct 2013 05:40 AM IST
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इटावा। प्रदेश सरकार पर उपेक्षा का आरोप लगाते हुए राज्य कर्मचारियों ने गुरुवार को कामकाज ठप कर कचहरी में एक दिनी धरना-प्रदर्शन किया। कहा कि अब कर्मचारी आर पार की लड़ाई लड़ने को तैयार हो रहा है। समस्याएं जल्द न सुलझाई गईं तो 26 अक्तूबर को विधानसभा लखनऊ के समक्ष विशाल सभा कर सरकार को अंतिम चेतावनी देंगे। उसके बाद 12 नवंबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू होगी। यह तब तक चलेगी जब तक कि समस्याओं का समाधान नहीं हो जाता।
राज्य कर्मचारी अधिकार मंच के बैनर तले हुए इस धरना-प्रदर्शन में कमोवेश हरेक विभाग के कर्मचारी शामिल हुए। विकास भवन और कचहरी स्थित सरकारी दफ्तरों में ताले लटके रहे। धरना सभा को संबोधित करते हुए मंच के अध्यक्ष मंडल दिलीप मिश्र ने कहा कि मुख्यमंत्री को मांगपत्र के जरिए अंतिम बार चेतावनी देते हुए आग्रह किया जा रहा है कि उनकी मांगों पर ध्यान दें। अब कर्मचारी झुकने वाला नहीं है। चाहे सरकार रहे या चली जाए, क्योंकि दर्जनों बार धरना-प्रदर्शन कर सरकार को अवगत कराया जा चुका है।
अध्यक्ष मंडल अवनीश मिश्र ने कहा कि 8, 16, 24 वर्षों के बाद तीन प्रोन्नत वेतन मान देने, फील्ड कर्मचारियों की वेतन विसंगतियों को दूर करने, केंद्रीय कर्मचारियों के समान आवास भत्ता, शिशु शिक्षा भत्ता, 600 दिन का उपार्जित अवकाश घोषित कर फील्ड कर्मचारियों को मोटर साइकिल भत्ता देने की मांग को सरकार ने कभी भी गंभीरता से नहीं लिया। इससे प्रदेश के लाखों कर्मचारी अपने को ठगा महसूस कर रहे हैं।
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जिला सचिव सोमेश अवस्थी ने कहा कि मुख्यमंत्री ने इस संबंध में आज तक कोई बैठक नहीं की। संप्रेक्षक विजय बहादुर सिंह तोमर ने कहा कि वेतन विसंगति से करीब एक लाख कर्मचारियों का मानसिक, सामाजिक व आर्थिक उत्पीड़न हो रहा है।
सहायक विकास अधिकारी संघ के जिलाध्यक्ष केके सिंह ने कहा कि इस संबंध में शासनादेश जारी न हुआ तो सभी गतिविधियां ठप करने से भी कर्मचारी चूकेंगे नहीं। लेखपाल संघ के जिलामंत्री गुरुप्रसाद चौधरी ने कहा कि आरपार की लड़ाई लड़कर हम जायज मांगें मनवा कर रहेंगे। डिप्लोमा इंजीनियर्स संघ के जिलाध्यक्ष राकेश तिवारी ने कहा कि अब समय आ गया कि हम निर्णायक संघर्ष करें। अधिकार मंच के वरिष्ठ उपाध्यक्ष अशोक द्विवेदी ने कहा कि सरकार को पर्याप्त समय दिया जा चुका है। अब ऐतिहासिक हड़ताल होगी। इस दौरान सिंचाई संघ के मंडलीय अध्यक्ष प्रदीप सक्सेना, उमाशंकर गुप्ता, पूरन सिंह, मृदुल शर्मा, रामवीर सिंह यादव, शैलेंद्र सिंह यादव, बृजेंद्र पाल सिंह, अशोक शर्मा, अशोक अगिभनहोत्री, निकाय कर्मचारी नेता राजीव यादव आदि ने भी सरकार के रवैए की तीखी आलोचना की।
कर्मचारी आंदोलित, फरियादी भटकते रहे
राज्य कर्मचारियों का धरना-प्रदर्शन बेशक कई दिन पूर्व से प्रस्तावित था। बावजूद इसके गुरुवार को तमाम फरियादी अपने काम को लेकर पहुंचे। उन्हें दफ्तरों में ताले लटकते मिले। विकास भवन व कचहरी स्थित कार्यालयों के अलावा अलग-अलग स्थानों पर मौजूद सरकारी दफ्तरों में भी कामकाज नहीं हुआ। खासकर विकास भवन स्थित विकलांग कल्याण विभाग, पंचायतराज विभाग, कचहरी स्थित डूडा, समाज कल्याण और प्रोबेशन कार्यालयों पर फरियादी कर्मचारियों का इंतजार करते दिखे। इनमें अमूमन विधवावस्था, वृद्धावस्था पेंशनर, स्वरोजगार और प्रशिक्षण योजना के लिए आवेदन करने वाले लोग शामिल रहे।
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राज्य कर्मचारी अधिकार मंच के बैनर तले हुए इस धरना-प्रदर्शन में कमोवेश हरेक विभाग के कर्मचारी शामिल हुए। विकास भवन और कचहरी स्थित सरकारी दफ्तरों में ताले लटके रहे। धरना सभा को संबोधित करते हुए मंच के अध्यक्ष मंडल दिलीप मिश्र ने कहा कि मुख्यमंत्री को मांगपत्र के जरिए अंतिम बार चेतावनी देते हुए आग्रह किया जा रहा है कि उनकी मांगों पर ध्यान दें। अब कर्मचारी झुकने वाला नहीं है। चाहे सरकार रहे या चली जाए, क्योंकि दर्जनों बार धरना-प्रदर्शन कर सरकार को अवगत कराया जा चुका है।
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अध्यक्ष मंडल अवनीश मिश्र ने कहा कि 8, 16, 24 वर्षों के बाद तीन प्रोन्नत वेतन मान देने, फील्ड कर्मचारियों की वेतन विसंगतियों को दूर करने, केंद्रीय कर्मचारियों के समान आवास भत्ता, शिशु शिक्षा भत्ता, 600 दिन का उपार्जित अवकाश घोषित कर फील्ड कर्मचारियों को मोटर साइकिल भत्ता देने की मांग को सरकार ने कभी भी गंभीरता से नहीं लिया। इससे प्रदेश के लाखों कर्मचारी अपने को ठगा महसूस कर रहे हैं।
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जिला सचिव सोमेश अवस्थी ने कहा कि मुख्यमंत्री ने इस संबंध में आज तक कोई बैठक नहीं की। संप्रेक्षक विजय बहादुर सिंह तोमर ने कहा कि वेतन विसंगति से करीब एक लाख कर्मचारियों का मानसिक, सामाजिक व आर्थिक उत्पीड़न हो रहा है।
सहायक विकास अधिकारी संघ के जिलाध्यक्ष केके सिंह ने कहा कि इस संबंध में शासनादेश जारी न हुआ तो सभी गतिविधियां ठप करने से भी कर्मचारी चूकेंगे नहीं। लेखपाल संघ के जिलामंत्री गुरुप्रसाद चौधरी ने कहा कि आरपार की लड़ाई लड़कर हम जायज मांगें मनवा कर रहेंगे। डिप्लोमा इंजीनियर्स संघ के जिलाध्यक्ष राकेश तिवारी ने कहा कि अब समय आ गया कि हम निर्णायक संघर्ष करें। अधिकार मंच के वरिष्ठ उपाध्यक्ष अशोक द्विवेदी ने कहा कि सरकार को पर्याप्त समय दिया जा चुका है। अब ऐतिहासिक हड़ताल होगी। इस दौरान सिंचाई संघ के मंडलीय अध्यक्ष प्रदीप सक्सेना, उमाशंकर गुप्ता, पूरन सिंह, मृदुल शर्मा, रामवीर सिंह यादव, शैलेंद्र सिंह यादव, बृजेंद्र पाल सिंह, अशोक शर्मा, अशोक अगिभनहोत्री, निकाय कर्मचारी नेता राजीव यादव आदि ने भी सरकार के रवैए की तीखी आलोचना की।
कर्मचारी आंदोलित, फरियादी भटकते रहे
राज्य कर्मचारियों का धरना-प्रदर्शन बेशक कई दिन पूर्व से प्रस्तावित था। बावजूद इसके गुरुवार को तमाम फरियादी अपने काम को लेकर पहुंचे। उन्हें दफ्तरों में ताले लटकते मिले। विकास भवन व कचहरी स्थित कार्यालयों के अलावा अलग-अलग स्थानों पर मौजूद सरकारी दफ्तरों में भी कामकाज नहीं हुआ। खासकर विकास भवन स्थित विकलांग कल्याण विभाग, पंचायतराज विभाग, कचहरी स्थित डूडा, समाज कल्याण और प्रोबेशन कार्यालयों पर फरियादी कर्मचारियों का इंतजार करते दिखे। इनमें अमूमन विधवावस्था, वृद्धावस्था पेंशनर, स्वरोजगार और प्रशिक्षण योजना के लिए आवेदन करने वाले लोग शामिल रहे।