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स्वर्ण जयंती रोजगार योजना का पूरा नहीं हुआ लक्ष्य
Etawah
Updated Wed, 06 Mar 2013 05:30 AM IST
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इटावा। स्वर्ण जयंती शहरी रोजगार योजना का जिले में हाल बेहाल है। वित्तीय वर्ष खत्म होने को है, लेकिन ऋण वितरण का लक्ष्य अभी तक पूरा नहीं हो सका है। दो सौ आवेदकों को ऋण देने का लक्ष्य है, पर इसके सापेक्ष अभी तक 117 आवेदकों को ही ऋण मुहैया कराया जा सका है। आरोप यह लग रहा है कि दलालों के चक्कर में फंस कर जरूरतमंद भटक रहे हैं। हालांकि डूडा और बैंकों के आला अफसर दलालों की मौजूदगी को सिरे से नकार रहे हैं।
करमगंज निवासी रामबेटी ने बेकरी के काम के लिए दलाल के माध्यम से ऋण के लिए आवेदन किया था। वह डूडा कार्यालय में अपने आवेदन और ऋण के संबंध में जानकारी करने आईं तो पता चला कि अब तक उनका फार्म ही जमा नहीं हुआ है। रामबेटी का यह केस तो उदाहरण भर हैं। इस तरह के ढेरों मामले सुनने को मिल रहे हैं।
इस योजना में डूडा कार्यालय से शहरी क्षेत्र के गरीबों को रोजगार सृजन के लिए बैंक से अनुदानित ऋण मिलता है। गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वालों को फर्नीचर बनाने, साइबर कैफे, फोटो स्टेट मशीन लगाने, छोटे टेंपो, पावर लूम, डेयरी और रिक्शा आदि के लिए दो लाख रुपए तक का ऋण उपलब्ध कराने का प्रावधान है। ऋण राशि में 25 प्रतिशत की छूट डूडा से मिलती है। यही वजह है कि ज्यादातर कामगारों के लिए यह योजना फायदेमंद बनी हुई है। जिले में यह योजना बीते अक्तूबर से शुरू हुई। दो सौ गरीबों को ऋण देने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। अब तक लगभग 315 आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 117 लाभार्थियों के ऋण बैंक से स्वीकृत हुए हैं, यानि अभी भी 83 गरीबों को ऋण मिलना बाकी है। जबकि वित्तीय वर्ष का यह अंतिम महीना चल रहा है।
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पांच महीने गुजरने के बाद अब तक 200 लोगों के लक्ष्य के सापेक्ष सिर्फ 117 का ही ऋण स्वीकृत हुआ है। जाहिर है इस मार्च में ही लक्ष्य पूर्ति के प्रयास होंगे। ऐसे में लोन स्वीकृत को बैंक पर दबाव रहेगा। माना जा रहा है कि इसमें बैंक अधिकारियों की मनमर्जी चलेगी। डूडा के परियोजना अधिकारी एमए खान कहते हैं कि उनके पास 315 आवेदनपत्र आए थे। वह सभी संबंधित राष्ट्रीयकृत बैंकों को भेज दिए गए। अब बैंकों को कर्ज उपलब्ध कराना है।
बैंकों के इन ऋण संबंधी आवेदन पत्रों के निस्तारण पर नजर डालें तो ढुलमुल रवैया दिख रहा है। कचहरी रोड स्थित पीएनबी का लक्ष्य 16 है, 25 आवेदन आए हैं, 9 का ऋण स्वीकृत हुआ है। यूनाइटेड बैंक विजय नगर का लक्ष्य 10 है और इतने आवेदन फार्म आए हैं, लेकिन किसी का भी ऋण स्वीकृत नहीं किया गया है। नौरंगाबाद सेंट्रल बैंक में भी 4 के लक्ष्य के सापेक्ष प्रगति शून्य है। रामनगर और भरथना की स्टेट बैंकों से भी किसी आवेदक का ऋण स्वीकृत नहीं किया गया है। इस बाबत बैंक अधिकारियों का कहना है कि योजना देरी से लागू हुई। इसलिए लक्ष्य पूर्ति में भी देरी हो रही है। पीएनबी कचहरी रोड के मैनेजर देवेंद्र वर्मा के मुताबिक ज्यादातर फार्म फरवरी और मार्च में आए हैं। फिर भी बैंक का निर्धारित लक्ष्य पूरा हो जाएगा।
वर्जन:
लोगों को दलालों के चक्कर में फंसने की जरूरत ही नहीं है। आवेदक अपने क्षेत्र की सामुदायिक विकास समिति (सीडीएस) या इस विभाग में सीधे फार्म जमा कर सकते हैं। फिलहाल करीब 90 फीसदी लक्ष्य पूर्ति होना संभव दिख रहा है।
-एमए खान, पीओ डूडा
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करमगंज निवासी रामबेटी ने बेकरी के काम के लिए दलाल के माध्यम से ऋण के लिए आवेदन किया था। वह डूडा कार्यालय में अपने आवेदन और ऋण के संबंध में जानकारी करने आईं तो पता चला कि अब तक उनका फार्म ही जमा नहीं हुआ है। रामबेटी का यह केस तो उदाहरण भर हैं। इस तरह के ढेरों मामले सुनने को मिल रहे हैं।
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इस योजना में डूडा कार्यालय से शहरी क्षेत्र के गरीबों को रोजगार सृजन के लिए बैंक से अनुदानित ऋण मिलता है। गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वालों को फर्नीचर बनाने, साइबर कैफे, फोटो स्टेट मशीन लगाने, छोटे टेंपो, पावर लूम, डेयरी और रिक्शा आदि के लिए दो लाख रुपए तक का ऋण उपलब्ध कराने का प्रावधान है। ऋण राशि में 25 प्रतिशत की छूट डूडा से मिलती है। यही वजह है कि ज्यादातर कामगारों के लिए यह योजना फायदेमंद बनी हुई है। जिले में यह योजना बीते अक्तूबर से शुरू हुई। दो सौ गरीबों को ऋण देने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। अब तक लगभग 315 आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 117 लाभार्थियों के ऋण बैंक से स्वीकृत हुए हैं, यानि अभी भी 83 गरीबों को ऋण मिलना बाकी है। जबकि वित्तीय वर्ष का यह अंतिम महीना चल रहा है।
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पांच महीने गुजरने के बाद अब तक 200 लोगों के लक्ष्य के सापेक्ष सिर्फ 117 का ही ऋण स्वीकृत हुआ है। जाहिर है इस मार्च में ही लक्ष्य पूर्ति के प्रयास होंगे। ऐसे में लोन स्वीकृत को बैंक पर दबाव रहेगा। माना जा रहा है कि इसमें बैंक अधिकारियों की मनमर्जी चलेगी। डूडा के परियोजना अधिकारी एमए खान कहते हैं कि उनके पास 315 आवेदनपत्र आए थे। वह सभी संबंधित राष्ट्रीयकृत बैंकों को भेज दिए गए। अब बैंकों को कर्ज उपलब्ध कराना है।
बैंकों के इन ऋण संबंधी आवेदन पत्रों के निस्तारण पर नजर डालें तो ढुलमुल रवैया दिख रहा है। कचहरी रोड स्थित पीएनबी का लक्ष्य 16 है, 25 आवेदन आए हैं, 9 का ऋण स्वीकृत हुआ है। यूनाइटेड बैंक विजय नगर का लक्ष्य 10 है और इतने आवेदन फार्म आए हैं, लेकिन किसी का भी ऋण स्वीकृत नहीं किया गया है। नौरंगाबाद सेंट्रल बैंक में भी 4 के लक्ष्य के सापेक्ष प्रगति शून्य है। रामनगर और भरथना की स्टेट बैंकों से भी किसी आवेदक का ऋण स्वीकृत नहीं किया गया है। इस बाबत बैंक अधिकारियों का कहना है कि योजना देरी से लागू हुई। इसलिए लक्ष्य पूर्ति में भी देरी हो रही है। पीएनबी कचहरी रोड के मैनेजर देवेंद्र वर्मा के मुताबिक ज्यादातर फार्म फरवरी और मार्च में आए हैं। फिर भी बैंक का निर्धारित लक्ष्य पूरा हो जाएगा।
वर्जन:
लोगों को दलालों के चक्कर में फंसने की जरूरत ही नहीं है। आवेदक अपने क्षेत्र की सामुदायिक विकास समिति (सीडीएस) या इस विभाग में सीधे फार्म जमा कर सकते हैं। फिलहाल करीब 90 फीसदी लक्ष्य पूर्ति होना संभव दिख रहा है।
-एमए खान, पीओ डूडा