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आमदनी तो खूब, सुविधा कुछ नहीं
Etawah
Updated Wed, 21 Nov 2012 12:00 PM IST
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इटावा। ऐतिहासिक पशु मेले में मवेशी पंजीकरण से होने वाली आमदनी ने अब तक के सारे रिकार्ड तोड़ दिए हैं। बीते सालों में मेला समिति को पूरे मेले के दौरान जितनी आय होती थी, उससे ज्यादा अबकी छह रोज के अंदर हो चुकी है। यह तब है, जब इस बार सेना भर्ती कार्यक्रम और पशु मेले की शुरुआत एक साथ होने से पशु मेला प्रभावित हुआ है। एक तिहाई पशु मेला परिसर सेना के कब्जे में है। वहीं पशुओं की भीड़ मेले में अधिक आने के कारण जगह कम पड़ गई है। उधर, रिकार्ड आमदनी के बावजूद मेले में आने वाले पशु पालकों व कारोबारियों को सुविधा रत्ती भर नहीं मिल रही है, इससे इनमें काफी नाराजगी है। शिकायत यह है कि नुमाइश समिति व प्रशासन पशुपालकों की सुविधाओं पर ध्यान नहीं दे रहा है।
जिले का सौ वर्ष पुराना पशु मेला इन दिनों शबाब पर है। समूचा परिसर पशुओं से खचाखच भरा हुआ है। पशु पंजीकरण से इस वर्ष हुई मात्र 6 दिनों की कमाई ने पिछले सौ वर्ष के रिकार्ड तोड़ दिए हैं। लेकिन पशु पालकों को अव्यवस्थाओं से जूझना पड़ रहा है। आलम यह है कि पशु मेला परिसर पर सेना का कब्जा होने के कारण पशु मेला इन दिनों स्टेडियम के आसपास, पोस्टमार्टम हाउस के आसपास एवं सीएमओ कार्यालय व टीबी अस्पताल परिसर तक फैला हुआ है। पशुओं के लिए सिर्फ एक जगह पानी की व्यवस्था होने के कारण पशुपालकों को परेशान होना पड़ता है। वहीं, भीड़ अधिक होने के कारण पशुपालक भी पेयजल के लिए परेशान हो रहे हैं।
मेले में जगह का अभाव, साफ सफाई की व्यवस्था न होना परेशानी का कारण बन रही है। जैनपुर निवासी व्यापारी रामनैन ने बताया कि वह 44 सालों से इटावा मेला कर रहे हैं जितना पशु इस बार आ रहा है पिछले सालों में नहीं आया। लेकिन इस वर्ष जगह का अभाव, पेयजल व साफ सफाई की पर्याप्त व्यवस्था न होने से परेशान होना पड़ रहा है।
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जिले का सौ वर्ष पुराना पशु मेला इन दिनों शबाब पर है। समूचा परिसर पशुओं से खचाखच भरा हुआ है। पशु पंजीकरण से इस वर्ष हुई मात्र 6 दिनों की कमाई ने पिछले सौ वर्ष के रिकार्ड तोड़ दिए हैं। लेकिन पशु पालकों को अव्यवस्थाओं से जूझना पड़ रहा है। आलम यह है कि पशु मेला परिसर पर सेना का कब्जा होने के कारण पशु मेला इन दिनों स्टेडियम के आसपास, पोस्टमार्टम हाउस के आसपास एवं सीएमओ कार्यालय व टीबी अस्पताल परिसर तक फैला हुआ है। पशुओं के लिए सिर्फ एक जगह पानी की व्यवस्था होने के कारण पशुपालकों को परेशान होना पड़ता है। वहीं, भीड़ अधिक होने के कारण पशुपालक भी पेयजल के लिए परेशान हो रहे हैं।
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मेले में जगह का अभाव, साफ सफाई की व्यवस्था न होना परेशानी का कारण बन रही है। जैनपुर निवासी व्यापारी रामनैन ने बताया कि वह 44 सालों से इटावा मेला कर रहे हैं जितना पशु इस बार आ रहा है पिछले सालों में नहीं आया। लेकिन इस वर्ष जगह का अभाव, पेयजल व साफ सफाई की पर्याप्त व्यवस्था न होने से परेशान होना पड़ रहा है।
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