मुलायम की जयंती पर अखिलेश का संकल्प: फिर जमीनी संघर्ष शुरू करेगी सपा, कार्यक्रम में नहीं दिखीं बहू अपर्णा
Etawah News: यूपी के पूर्व सीएम मुलायम सिंह यादव की जयंती पर सैफई में भव्य समारोह आयोजित किया गया। नेता जी के स्मारक का शिलान्यास करने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने श्रद्धांजलि दी।
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सैफई में लगे अखिलेश यादव जिंदाबाद के नारे
लगभग साढ़े 11 बजे कार्यक्रम स्थल पर पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के पहुंचते ही अखिलेश यादव जिंदाबाद, नेता जी अमर रहें के नारों से पंडाल गूंजने लगा। मंच पर पहुंचकर उन्होंने मंच पर उपस्थित सभी नेताओं और बुजुर्गों को नमस्कार करने के साथ ही जनता को भी हाथ हिलाकर उत्साहित किया। मंच पर पहली बार वरिष्ठ नेताओं के साथ वृद्ध नेताओं को भी स्थान दिया गया।
इससे सभी खुश नजर आए। नेता जी के साथ रहे सभी बुजुर्ग नेताओं के पास खुद जा-जाकर अखिलेश यादव ने उन्हें शौल ओढ़ाई। इससे मंच पर मौजूद लोगों के साथ ही कार्यक्रम स्थल पर मौजूद सैफईवासियों को नेता जी याद आ गए। उन्होंने कहा कि पहली बार अखिलेश समय में इतनी बड़ी संख्या में बुजुर्गों को स्थान मिला। उनका स्नेह नेता जी की तरह ही लग रहा था। नेता जी भी इसी तरह बड़े आयोजनों में बुजुर्गों का सम्मान नहीं भूलते थे।
चाचा शिवपाल भी कार्यक्रम में पहुंचे
पौने तीन घंटे में मंच से सपा के वरिष्ठ नेताओं ने नेता जी के संघर्षों की कहानियां बताते हुए मुलायम सिंह यादव की तरह फिर एक बार जमीन से जुड़ा संघर्ष शुरू करने का कार्यकर्ताओं को संकल्प दिलाया है। 2024 तक मुलायम सिंह यादव की तरह दिल्ली में सपा के राष्ट्रीय महासचिव की धमक बनाने के लिए तैयारी में जुटने की अपील की है। अंत्येष्टि स्थल पर हवन पूजन करते सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव, प्रोफेसर रामगोपाल यादव और शिवपाल सिंह यादव मौजूद रहे। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन के स्मारक की तर्ज पर नेता जी का स्मारक बनवाया जाएगा। सैफईवासियों ने कहा कि नेता जी अखिलेश यादव में नजर आए।
सैफई के प्रधान रामफल बाल्मीकि ने बताया कि आज राष्ट्रीय अध्यक्ष को देखकर नेता जी की याद आ गई। नेता जी हमेशा मंच पर बुजुर्गों को स्थान देते थे। हमारी हर खुशी और गम में आकर शामिल होते थे। ऐसा ही नजारा उनकी जयंती पर देखने को मिला है।
सैफई निवासी संतोश शाक्य ने बताया कि नेता जी हमेशा बुजुर्गों और युवाओं का हमेशा ध्यान रखते थे। अब अखिलेश भइया में भी वही नजर आ रहा है। जयंती पर उन्होंने बुजुर्गों के सम्मान के साथ ही युवाओं को मजबूती से लड़ने का संदेश दिया है।
जयंती कार्यक्रम में नहीं आए प्रतीक और अपर्णा यादव
नेता जी की जयंती कार्यक्रम में उनके छोटे बेटे प्रतीक और बहू अपर्णा यादव नहीं दिखाई दिए। मुलायम सिंह यादव के निधन में ही दोनों अंतिम बार सैफई आए थे। इससे राजनीतिक गलियारों में चर्चा रही कि अपर्णा के अलग पार्टी में शामिल होने के बाद से कुछ दूरियां बनी हुई हैं। ऐसे में वह दोनों शामिल होने नहीं आए।