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Etawah News: चंबल के किनारे 5430 कछुओं ने लिया जन्म, नदी में छोड़े गए

Fri, 29 May 2026 12:00 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Fri, 29 May 2026 12:00 AM IST
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5,430 Turtles Born on the Banks of the Chambal; Released into the River
फोटो: 38 कछुओं के बच्चों को चंबल में छोड़ती सेंक्चुअरी की टीम। स्रोत सेंचुरी विभाग
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विलुप्तप्राय बटागुर और ढोंड प्रजाति के कछुए भी शामिल हैं
संवाद न्यूज एजेंसी

चकरनगर। घड़ियाल और डॉल्फिन के लिए जीवनदायिनी साबित हो रही चंबल सेंचुरी अब दुर्लभ कछुओं के लिए भी सुरक्षित आशियाना बनती जा रही है। इस वर्ष चंबल नदी के किनारों पर हैचिंग पीरियड के दौरान 5,430 से अधिक कछुओं ने जन्म लिया है। इनमें शेड्यूल-वन श्रेणी की विलुप्तप्राय बटागुर और ढोंड प्रजाति के कछुए भी शामिल हैं।

फरवरी और मार्च माह में मादा कछुओं ने चंबल नदी के किनारे रेतीले इलाकों में अंडे दिए थे। इसके बाद से ही चंबल सेंचुरी विभाग और कछुआ संरक्षण संस्था लगातार घोसलों की निगरानी कर रही थी। मई माह के दूसरे पखवाड़े में अंडों से बच्चों के निकलने की प्रक्रिया शुरू हुई। गढ़ायता, हरलालपुरा, पिनाहट, मऊ और मुकुटपुरा हैचरी क्षेत्रों में हजारों नन्हें कछुए बालू पर सरकते हुए नदी तक पहुंचे और पानी में छोड़ दिए गए। गढ़ायता हैचरी में लगभग 300 घोसलों का संरक्षण किया गया था। लगातार निगरानी और सुरक्षित वातावरण मिलने के कारण इस बार 4,898 बच्चों ने जन्म लिया, जिन्हें बाद में चंबल नदी में छोड़ दिया गया। चंबल सेंचुरी आगरा के डीएफओ चांदनी सिंह ने बताया कि विभागीय टीम ने नदी क्षेत्र में सतर्कता बढ़ा दी है। जन्म लेने वाले कछुओं की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है। उन्होंने बताया कि चंबल नदी में वर्तमान में आठ प्रकार की दुर्लभ कछुआ प्रजातियों का संरक्षण किया जा रहा है, जो जैव विविधता के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण हैं।
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