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2700 बच्चों ने बनाया राष्ट्रीय ध्वज
ब्यूरो/ अमर उजाला, इटावा
Updated Thu, 17 Dec 2015 11:59 PM IST
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151 स्कूलों के 2700 स्कूली बच्चों ने गुरुवार को इटावा महोत्सव पंडाल में कला कौशल एवं पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिता में राष्ट्रीय ध्वज बनाया। पंडाल में 2700 बच्चों ने एक साथ खड़े होकर भारत का राष्ट्रीय ध्वज लहराकर भारत माता की जय का उद्घोष किया।
इससे पूर्व प्रतियोगिता का उद्घाटन जिलाधिकारी डा. नितिन बंसल, प्रधानाचार्य परिषद के अध्यक्ष डा अजंट सिंह ने किया। कार्यक्रम संयोजक डा आनंद ने सभी अतिथियों का माल्यार्पण करके स्वागत किया। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में प्रतिभागिता पहली बार देखी है।
अगर यह विश्वरिकार्ड बनता है तो इटावा नुमाइश के लिए बहुत बड़ी उपलब्धि होगी। डा. आनंद बताया कि यह प्रतियोगिता छह वर्गों में हुई है। प्रतियोगिता में बच्चों ने राष्ट्रीय एकता, बेटी बचाओ, भारत का राष्ट्रीय ध्वज, डाल पर बैठी चिड़िया, लॉयन सफारी में शेर का जोड़ा व आतंकवाद संपूर्ण विश्व की प्रगति में बाधक जैसे गंभीर विषयों पर अपनी कला का प्रदर्शन किया।
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डा. आनंद ने बताया कि एक सौ इक्यावन स्कूलों के बच्चों ने पहली बार किसी एक जगह राष्ट्रीय ध्वज बनाया है। इसे यूनिक वर्ल्ड रिकार्ड समिति ने अध्ययन करने के बाद वर्ल्ड रिकार्ड में शामिल करने को कहा है। पूर्व प्रधानाचार्य चंद्रमुखी दुबे ने राष्ट्रीय ध्वज के विभिन्न रंगों के महत्व की जानकारी दी। डा. आनंद एवं नीलम आनंद ने आभार प्रकट किया।
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इससे पूर्व प्रतियोगिता का उद्घाटन जिलाधिकारी डा. नितिन बंसल, प्रधानाचार्य परिषद के अध्यक्ष डा अजंट सिंह ने किया। कार्यक्रम संयोजक डा आनंद ने सभी अतिथियों का माल्यार्पण करके स्वागत किया। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में प्रतिभागिता पहली बार देखी है।
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अगर यह विश्वरिकार्ड बनता है तो इटावा नुमाइश के लिए बहुत बड़ी उपलब्धि होगी। डा. आनंद बताया कि यह प्रतियोगिता छह वर्गों में हुई है। प्रतियोगिता में बच्चों ने राष्ट्रीय एकता, बेटी बचाओ, भारत का राष्ट्रीय ध्वज, डाल पर बैठी चिड़िया, लॉयन सफारी में शेर का जोड़ा व आतंकवाद संपूर्ण विश्व की प्रगति में बाधक जैसे गंभीर विषयों पर अपनी कला का प्रदर्शन किया।
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डा. आनंद ने बताया कि एक सौ इक्यावन स्कूलों के बच्चों ने पहली बार किसी एक जगह राष्ट्रीय ध्वज बनाया है। इसे यूनिक वर्ल्ड रिकार्ड समिति ने अध्ययन करने के बाद वर्ल्ड रिकार्ड में शामिल करने को कहा है। पूर्व प्रधानाचार्य चंद्रमुखी दुबे ने राष्ट्रीय ध्वज के विभिन्न रंगों के महत्व की जानकारी दी। डा. आनंद एवं नीलम आनंद ने आभार प्रकट किया।