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Etawah News: पचनद पर फहराया 151 फीट लंबा तिरंगा
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इटावा। पचनद घाटी में रविवार को श्रद्धा और देश भक्ति का संगम दिखा। चंबल परिवार ने 151 फीट लंबा तिरंगा लेकर यात्रा निकाली। शहीदों को सलामी दी और महापर्व मनाकर महासंगम किनारे उनकी याद में दीप जलाए।
सिंध, पहुंज, क्वारी, चंबल और यमुना के पवित्र संगम पर ‘पचनद दीप महापर्व’ के तीसरे संस्करण का रविवार को आयोजन किया गया। इसमें इटावा, जालौन, औरैया, भिंड, बाह, ग्वालियर के लोग पहुंचे। चंबल घाटी के सरदार भगत सिंह के नाम से प्रसिद्ध शहीद डॉ. महेश सिंह चौहान के अनुज इतिहासकार देवेंद्र सिंह चौहान, सामाजिक विचारक और पूर्व आईपीएस अधिकारी चेतराम सिंह भदौरिया, क्रांतिकारी लेखक डॉ. शाह आलम राना, रिटायर्ड डीएसपी हाकिम सिंह यादव ने क्रांतिकारियों को श्रद्धासुमन अर्पित किए।
संचालन चंबल पर्यटन के नोडल अधिकारी डॉ. कमल कुमार कुशवाहा ने किया। स्वतंत्रता संग्राम में क्रांतिकारियों की शरण स्थली रहे महाकालेश्वर धाम से 151 फिट लंबे तिरंगे के साथ बच्चों और युवाओं ने यात्रा निकाली।
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पचनद पुल पर भिटौरा-कंजौसा की प्रधान रेखा देवी ने पुष्प वर्षा कर यात्रा का स्वागत किया। मार्च का नेतृत्व चंबल परिवार के समन्वयक वीरेंद्र सिंह सेंगर ने किया। बाबा साहेब मंदिर के पदाधिकारियों ने फूल मालाओं से यात्रियों का स्वागत किया। पचनद संगम तट के नजदीक पहुंचकर कारवां जनसभा में तब्दील हो गया।
इतिहासकार देवेंद्र सिंह चौहान ने चंबल अंचल के योद्धा सूबेदार मेजर अमानत अली, राजा निंरजन सिंह चौहान आदि का जिक्र किया। कहा कि इन योद्धाओं की वजह से ही हमें आजादी मिली है।
बल परिवार प्रमुख क्रांतिकारी लेखक डॉ. शाह आलम राना ने पचनद तहजीब की वकालत की। कहा कि पवित्र ग्रंथ भारतीय संविधान की हिफाजत करना हम सभी का फर्ज है।
चंबल अंचल के प्रसिद्ध लोकगायक सद्दीक अली ने ‘जो देश पर शहीद हुए थे, सच्चे थे वे हिंदुस्तानी’ गीत सुनाकर लोगों की आंखें नम कर दीं। मेजर मनोज कुमार सिंह, पंडित राम लखन, अवधेश सिंह चौहान, राम सुंदर यादव, कुलदीप सिंह परिहार, विनोद सिंह गौतम, प्रमोद सिंह सेंगर, हरीराम, राम औतार तिवारी आदि मौजूद रहे।
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सिंध, पहुंज, क्वारी, चंबल और यमुना के पवित्र संगम पर ‘पचनद दीप महापर्व’ के तीसरे संस्करण का रविवार को आयोजन किया गया। इसमें इटावा, जालौन, औरैया, भिंड, बाह, ग्वालियर के लोग पहुंचे। चंबल घाटी के सरदार भगत सिंह के नाम से प्रसिद्ध शहीद डॉ. महेश सिंह चौहान के अनुज इतिहासकार देवेंद्र सिंह चौहान, सामाजिक विचारक और पूर्व आईपीएस अधिकारी चेतराम सिंह भदौरिया, क्रांतिकारी लेखक डॉ. शाह आलम राना, रिटायर्ड डीएसपी हाकिम सिंह यादव ने क्रांतिकारियों को श्रद्धासुमन अर्पित किए।
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संचालन चंबल पर्यटन के नोडल अधिकारी डॉ. कमल कुमार कुशवाहा ने किया। स्वतंत्रता संग्राम में क्रांतिकारियों की शरण स्थली रहे महाकालेश्वर धाम से 151 फिट लंबे तिरंगे के साथ बच्चों और युवाओं ने यात्रा निकाली।
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पचनद पुल पर भिटौरा-कंजौसा की प्रधान रेखा देवी ने पुष्प वर्षा कर यात्रा का स्वागत किया। मार्च का नेतृत्व चंबल परिवार के समन्वयक वीरेंद्र सिंह सेंगर ने किया। बाबा साहेब मंदिर के पदाधिकारियों ने फूल मालाओं से यात्रियों का स्वागत किया। पचनद संगम तट के नजदीक पहुंचकर कारवां जनसभा में तब्दील हो गया।
इतिहासकार देवेंद्र सिंह चौहान ने चंबल अंचल के योद्धा सूबेदार मेजर अमानत अली, राजा निंरजन सिंह चौहान आदि का जिक्र किया। कहा कि इन योद्धाओं की वजह से ही हमें आजादी मिली है।
बल परिवार प्रमुख क्रांतिकारी लेखक डॉ. शाह आलम राना ने पचनद तहजीब की वकालत की। कहा कि पवित्र ग्रंथ भारतीय संविधान की हिफाजत करना हम सभी का फर्ज है।
चंबल अंचल के प्रसिद्ध लोकगायक सद्दीक अली ने ‘जो देश पर शहीद हुए थे, सच्चे थे वे हिंदुस्तानी’ गीत सुनाकर लोगों की आंखें नम कर दीं। मेजर मनोज कुमार सिंह, पंडित राम लखन, अवधेश सिंह चौहान, राम सुंदर यादव, कुलदीप सिंह परिहार, विनोद सिंह गौतम, प्रमोद सिंह सेंगर, हरीराम, राम औतार तिवारी आदि मौजूद रहे।