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गिरते भूगर्भ जलस्तर को रोकेंगे 12 विभाग
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इटावा। जिले में भूगर्भ जलस्तर लगातार गिर रहा है, इसके लिए सरकारी अफसरों समेत लोगों की पेशानी पर बल पड़ने लगे हैं, लेकिन अब गिरते भूगर्भ जलस्तर को रोकने के लिए सरकार तत्पर हुई है।
लगातार हो रहे भूजल दोहन पर अंकुश लगाने और जलस्तर बढ़ाने की चुनौती का सामना करने कोएक दर्जन से भी अधिक सरकारी विभाग मिलकर काम करेंगे।
पानी का दोहन लगातार बढ़ रहा, वहीं वर्षा ऋतु का पानी सारा बेकार चला जाता है। उसके संरक्षण की कोई समुचित व्यवस्था नहीं है। जिले में गांव हों अथवा कस्बे हर साल 30 सेमी जलस्तर घट रहा है।
इस स्थिति से चिंतित प्रदेश सरकार ने प्रधानमंत्री की कैच द रेन योजना और जल संरक्षण की सभी योजनाओं को मिलाकर प्रदेश में अटल भूगर्भ जल योजना में इटावा जिले का चयन किया है।
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इस योजना में एक दर्जन से अधिक विभाग मिलाकर जल संरक्षण की विस्तृत योजना बनाकर नोडल विभाग के माध्यम से शासन को भेजेंगे। यह योजना अगले पांच साल के लक्ष्य को लेकर तैयार होगी।
इसका लक्ष्य यही होगा कि अगले चार सालों में जलस्तर में गिरावट को रोककर उसमें वृद्धि करना है। अटल भूगर्भ योजना को लेकर सभी विभागों से कार्ययोजना मांगी गई है। लघु सिंचाई विभाग को नोडल बनाया गया है।
जल निगम, सिंचाई विभाग, भूमि संरक्षण, कृषि विभाग, उद्यान विभाग, वन विभाग, ग्राम विकास, पंचायती राज, कार्यक्रम विभाग, शिक्षा विभाग सभी अपने स्तर पर जल संरक्षण के उपायों को लेकर कार्ययोजना तैयार करेंगे।
इस योजना को शासन की मंजूरी मिलने के बाद अगले चार सालों तक काम किया जाएगा। सबका लक्ष्य यही होगा कि गिरते भूगर्भ जलस्तर पर अंकुश लगाते इसे वहीं लाया जाए, जहां पांच साल पहले था।
मुख्यत: दो प्रकार से जल संचयन किया जाएगा। इसमें पहला सिंचाई में पानी के दुरुपयोग को रोकना और वर्षा का जल संचयन करना है। उद्यान और कृषि विभाग पानी बचाने के उपाय और उसके सदुपयोग के बारे में किसानों को जागरूक करेंगे।
नालों को नदियों से जोड़ेंगे
योजना में जिले के सभी नालों का सर्वे किया जा रहा है। लघु सिंचाई विभाग को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है। सभी नालों को नदियों से जोड़ दिया जाएगा, जिससे बारिश का पानी नालों से होकर बर्बाद न होने पाए।
नहरों में जगह-जगह चेकडैम बनाकर पानी का संचयन किया जाएगा। माडल के तौर पर महेवा ब्लाक के सैदपुर गांव और सैफई ब्लाक के कुनैया गांव में सेंगर नदी पर चेकडैम बनाए गए हैं। नदियों का सर्वे कर आवश्यकतानुसार चेकडैम बनाए जाएंगे।
12 मीटर लंबाई के चेकडैम पर 25 लाख और 18 मीटर पर 30 लाख रुपये की लागत आती है। करीब 50 किमी लंबी सेंगर नदी का सर्वे चल रहा है। इसमें चेकडैम के लिए स्थान चिह्नित हो रहे हैं।
खेत का पानी खेत में रोकेंगे
भूमि संरक्षण विभाग को जिम्मेदारी दी गई कि खेत का पानी खेत में रोकने का प्रबंध करें। खेतों में बंधा बनाकर और मेडबंदी करके पानी को एकत्र किया जाएगा, जिससे बाद में सिंचाई के रूप में प्रयोग किया जा सकेगा।
तालाब की जिम्मेदारी सिंचाई विभाग पर
सिंचाई विभाग को पांच हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल के तालाबों की जिम्मेदारी दी गई है। ऐसे तालाबों का जीर्णोद्धार कराकर उनको गहरा कराया जाएगा। गांव में बारिश के पानी को इन तालाबों तक पहुंचाने के लिए नाला का निर्माण कराया जाएगा।
वहीं वन विभाग अपने विभाग की जमीन पर जल संरक्षण के लिए चेकडैम बनाएंगे।
सरकारी इमारतें भी हाेंगी शामिल
सरकारी भवन, प्राइमरी और माध्यमिक स्कूल, पंचायत घर, आंगनबाड़ी केंद्र सभी का सर्वे किया जा रहा है। इसके बाद इन सभी भवनों पर वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम और रिचार्ज पिट के जरिए पानी जमीन में भेजा जाएगा।
वित्त आयोग से होगी धन की व्यवस्था
ग्राम पंचायतों में जल संरक्षण के उपायों पर धन की व्यवस्था पंचायत निधि से होगी। तकनीकी मार्ग दर्शन लघु सिंचाई विभाग से मिलेगा। वहीं 15वें वित्त आयोग से प्राप्त होने वाला टाइड फंड वाटर हार्वेस्टिग में ही खर्च किया जाएगा।
इसके अलावा अन्य विभाग जो प्रस्ताव देंगे, उनके लिए धन की व्यवस्था शासन स्तर से की जाएगी।
अक्तूबर अंत तक विभागों से मिलेंगे प्रस्ताव
जल संरक्षण के संबंध में सभी विभाग अपनी अपनी कार्य योजना और वित्तीय प्रस्ताव बनाकर देंगे। इसके बाद पूरे जिलेे का मास्टर प्लान तैयार कर शासन को भेजा जाएगा। अटल भूगर्भ जल संरक्षण योजना का लक्ष्य अगले चार सालों में जलस्तर को पिछले पांच साल के स्तर पर लाया जाएगा।
ब्लाक का नाम जलस्तर पहले वर्तमान में मीटर में
बढ़पुरा 18.42 18.18
बसरेहर 6.62 4.59
भरथना 5.95 3.85
चकरनगर 32.51 31.95
जसवंतनगर 17.26 16.92
महेवा 11.25 9.68
ताखा 5.79 3.80
सैफई 11.39 10.64
जिले के लिए महत्वपूर्ण होगी योजना
अटल भूगर्भ जल संरक्षण योजना जिले के लिए बहुत महत्वपूर्ण साबित होगी। इसमें सभी संबंधित विभागों का समन्वय किया गया है। सभी विभागों से अक्तूबर तक कार्ययोजना मांगी गई है।
वर्ष 2021-22 के लिए प्रस्तावित कार्ययोजना को शासन के समक्ष भेजा जाएगा। स्वीकृति मिलते ही काम शुरू हो जाएगा।
- वीर सिंह, प्रभारी सहायक अभियंता, लघु सिंचाई विभाग
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लगातार हो रहे भूजल दोहन पर अंकुश लगाने और जलस्तर बढ़ाने की चुनौती का सामना करने कोएक दर्जन से भी अधिक सरकारी विभाग मिलकर काम करेंगे।
पानी का दोहन लगातार बढ़ रहा, वहीं वर्षा ऋतु का पानी सारा बेकार चला जाता है। उसके संरक्षण की कोई समुचित व्यवस्था नहीं है। जिले में गांव हों अथवा कस्बे हर साल 30 सेमी जलस्तर घट रहा है।
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इस स्थिति से चिंतित प्रदेश सरकार ने प्रधानमंत्री की कैच द रेन योजना और जल संरक्षण की सभी योजनाओं को मिलाकर प्रदेश में अटल भूगर्भ जल योजना में इटावा जिले का चयन किया है।
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इस योजना में एक दर्जन से अधिक विभाग मिलाकर जल संरक्षण की विस्तृत योजना बनाकर नोडल विभाग के माध्यम से शासन को भेजेंगे। यह योजना अगले पांच साल के लक्ष्य को लेकर तैयार होगी।
इसका लक्ष्य यही होगा कि अगले चार सालों में जलस्तर में गिरावट को रोककर उसमें वृद्धि करना है। अटल भूगर्भ योजना को लेकर सभी विभागों से कार्ययोजना मांगी गई है। लघु सिंचाई विभाग को नोडल बनाया गया है।
जल निगम, सिंचाई विभाग, भूमि संरक्षण, कृषि विभाग, उद्यान विभाग, वन विभाग, ग्राम विकास, पंचायती राज, कार्यक्रम विभाग, शिक्षा विभाग सभी अपने स्तर पर जल संरक्षण के उपायों को लेकर कार्ययोजना तैयार करेंगे।
इस योजना को शासन की मंजूरी मिलने के बाद अगले चार सालों तक काम किया जाएगा। सबका लक्ष्य यही होगा कि गिरते भूगर्भ जलस्तर पर अंकुश लगाते इसे वहीं लाया जाए, जहां पांच साल पहले था।
मुख्यत: दो प्रकार से जल संचयन किया जाएगा। इसमें पहला सिंचाई में पानी के दुरुपयोग को रोकना और वर्षा का जल संचयन करना है। उद्यान और कृषि विभाग पानी बचाने के उपाय और उसके सदुपयोग के बारे में किसानों को जागरूक करेंगे।
नालों को नदियों से जोड़ेंगे
योजना में जिले के सभी नालों का सर्वे किया जा रहा है। लघु सिंचाई विभाग को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है। सभी नालों को नदियों से जोड़ दिया जाएगा, जिससे बारिश का पानी नालों से होकर बर्बाद न होने पाए।
नहरों में जगह-जगह चेकडैम बनाकर पानी का संचयन किया जाएगा। माडल के तौर पर महेवा ब्लाक के सैदपुर गांव और सैफई ब्लाक के कुनैया गांव में सेंगर नदी पर चेकडैम बनाए गए हैं। नदियों का सर्वे कर आवश्यकतानुसार चेकडैम बनाए जाएंगे।
12 मीटर लंबाई के चेकडैम पर 25 लाख और 18 मीटर पर 30 लाख रुपये की लागत आती है। करीब 50 किमी लंबी सेंगर नदी का सर्वे चल रहा है। इसमें चेकडैम के लिए स्थान चिह्नित हो रहे हैं।
खेत का पानी खेत में रोकेंगे
भूमि संरक्षण विभाग को जिम्मेदारी दी गई कि खेत का पानी खेत में रोकने का प्रबंध करें। खेतों में बंधा बनाकर और मेडबंदी करके पानी को एकत्र किया जाएगा, जिससे बाद में सिंचाई के रूप में प्रयोग किया जा सकेगा।
तालाब की जिम्मेदारी सिंचाई विभाग पर
सिंचाई विभाग को पांच हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल के तालाबों की जिम्मेदारी दी गई है। ऐसे तालाबों का जीर्णोद्धार कराकर उनको गहरा कराया जाएगा। गांव में बारिश के पानी को इन तालाबों तक पहुंचाने के लिए नाला का निर्माण कराया जाएगा।
वहीं वन विभाग अपने विभाग की जमीन पर जल संरक्षण के लिए चेकडैम बनाएंगे।
सरकारी इमारतें भी हाेंगी शामिल
सरकारी भवन, प्राइमरी और माध्यमिक स्कूल, पंचायत घर, आंगनबाड़ी केंद्र सभी का सर्वे किया जा रहा है। इसके बाद इन सभी भवनों पर वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम और रिचार्ज पिट के जरिए पानी जमीन में भेजा जाएगा।
वित्त आयोग से होगी धन की व्यवस्था
ग्राम पंचायतों में जल संरक्षण के उपायों पर धन की व्यवस्था पंचायत निधि से होगी। तकनीकी मार्ग दर्शन लघु सिंचाई विभाग से मिलेगा। वहीं 15वें वित्त आयोग से प्राप्त होने वाला टाइड फंड वाटर हार्वेस्टिग में ही खर्च किया जाएगा।
इसके अलावा अन्य विभाग जो प्रस्ताव देंगे, उनके लिए धन की व्यवस्था शासन स्तर से की जाएगी।
अक्तूबर अंत तक विभागों से मिलेंगे प्रस्ताव
जल संरक्षण के संबंध में सभी विभाग अपनी अपनी कार्य योजना और वित्तीय प्रस्ताव बनाकर देंगे। इसके बाद पूरे जिलेे का मास्टर प्लान तैयार कर शासन को भेजा जाएगा। अटल भूगर्भ जल संरक्षण योजना का लक्ष्य अगले चार सालों में जलस्तर को पिछले पांच साल के स्तर पर लाया जाएगा।
ब्लाक का नाम जलस्तर पहले वर्तमान में मीटर में
बढ़पुरा 18.42 18.18
बसरेहर 6.62 4.59
भरथना 5.95 3.85
चकरनगर 32.51 31.95
जसवंतनगर 17.26 16.92
महेवा 11.25 9.68
ताखा 5.79 3.80
सैफई 11.39 10.64
जिले के लिए महत्वपूर्ण होगी योजना
अटल भूगर्भ जल संरक्षण योजना जिले के लिए बहुत महत्वपूर्ण साबित होगी। इसमें सभी संबंधित विभागों का समन्वय किया गया है। सभी विभागों से अक्तूबर तक कार्ययोजना मांगी गई है।
वर्ष 2021-22 के लिए प्रस्तावित कार्ययोजना को शासन के समक्ष भेजा जाएगा। स्वीकृति मिलते ही काम शुरू हो जाएगा।
- वीर सिंह, प्रभारी सहायक अभियंता, लघु सिंचाई विभाग