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तीन बार सांसद पहुंचे अर्जुन सिंह व रामसिंह शाक्य
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चुनाव रणभेरी बज गई है। सभी दल प्रत्याशी चुनने में जुटे हैं। एक-दो दिन में प्रत्याशियों की घोषणा हो जाएगी। फिर जनता के बीच समर्थन मांगने जाएंगे।
सभी प्रत्याशी मुद्दों की तलाश में जुटे हैँ। इटावा लोकसभा सीट पर हर बार स्थानीय मुद्दों के चलते दिग्गजों के चुनाव नतीजे बदल गए।
इन्हीं मुद्दों के दम पर कांग्रेस के खिलाफ तीन बार अर्जुन सिंह व रामसिंह शाक्य दिल्ली पहुंचे। आगे इसका फायदा समाजवादी पार्टी ने उठाया और सपा प्रत्याशी को चार बार सांसद भेजा। इसमें सपा की हैट्रिक भी शामिल है। भाजपा दो बार जीती जबकि कांशीराम ने पहली बार चुनाव लड़कर इटावा सीट पर बसपा की धमक छोड़ी।
वर्ष 1952 से शुरू हुई लोकसभा चुनाव की यात्रा में इटावा को पहला सांसद बालकृष्ण शर्मा के रूप में मिला। इसके बाद कांग्रेस ने तुलाराम को चुनाव मैदान में उतरा था।
स्थानीय मुद्दे पर प्रसपा सोशलिस्ट पार्टी के अर्जुन सिंह ने तुलाराम को चुनाव हराया। स्थानीय मुद्दों के बल पर कांग्रेस के खिलाफ अर्जुन सिंह भदौरिया तीन बार संसद तक पहुंचे लेकिन उनकी जीत में हर बार पांच साल का अंतराल भी रहा। जनता ने लगातार अर्जुन सिंह पर ही भरोसा जताया।
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1980, 1989, 1996 में राम सिंह शाक्य ने जनता दल व सपा से सांसद तक पहुंचाया। इसके बाद बसपा संस्थापक कांशीराम ने 1991 में पहली बार इटावा सीट से चुनाव लड़ा और कैडर वोटरों को संगठित किया। यह चुनाव में बसपा का इटावा सीट पर खाता खुला और कांशीराम पर जनता ने भरोसा जताया।
उसके बाद से आज तक बसपा का उम्मीदवार चुनाव नहीं जीत सका। इसके बाद 1996, 1999, 2004, 2009 में सपा के पाले में सीट रही। महज दो बार 1998 में 2014 में भाजपा को सीट मिल सकी।
1992 के बाद 1996 हुए लोकसभा चुनाव में सपा के उम्मीदवार राम सिंह शाक्य ने भाजपा को लंबे अंतर से पराजित किया था। अटल बिहारी और मोदी की पर जनता ने भरोसा जताया। इस पर 1998 में सुखदा मिश्रा और 2014 में अशोक दोहरे को दिल्ली पहुंचाया।
जिले में इंडस्ट्री न होने से लोगों को रोजगार के लिए बाहर जाना पड़ता है। इस वजह से बेरोजगारी बड़ा मुद्दा रहा। बिजली-पानी सड़क, स्वास्थ्य व शिक्षा के स्थानीय मुद्दों को समाजवादी पार्टी ने भुनाया और इटावा सीट पर अपनी पकड़ मजबूत रखी। बड़े मुद्दों का सीट पर असर कम दिखाई दिया।
सन सांसद पार्टी
1952 बालकृष्ण शर्मा कांग्रेस
1957 अर्जुन सिंह भदौरिया निर्दलीय
1962 गोपीनाथ दीक्षित कांग्रेस
1967 अर्जुन सिंह भदौरिया सोशलिस्ट
1971 श्रीशंकर तिवारी कांग्रेस
1977 अर्जुन सिंह भदौरिया बहुजन किसान दल
1980 राम सिंह शाक्य जनता पार्टी
1984 रघुराज सिंह चौधरी कांग्रेस
1989 रामसिंह शाक्य जनता दल
1991 कांशीराम बसपा
1996 राम सिंह शाक्य सपा
1998 सुखदा मिश्रा भाजपा
1999 रघुराज शाक्य सपा
2004 रघुराज शाक्य सपा
2009 प्रेमदास कठेरिया सपा
2014 अशोक दोहरे भाजपा
तीन बार संसद पहुंचे अर्जुन सिंह व रामसिंह शाक्य
कांग्रेस के खिलाफ नाराजगी सपा ने उठाया फायदा
सपा को छोड़कर किसी पार्टी ने नहीं लगाई हैट्रिक
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सभी प्रत्याशी मुद्दों की तलाश में जुटे हैँ। इटावा लोकसभा सीट पर हर बार स्थानीय मुद्दों के चलते दिग्गजों के चुनाव नतीजे बदल गए।
इन्हीं मुद्दों के दम पर कांग्रेस के खिलाफ तीन बार अर्जुन सिंह व रामसिंह शाक्य दिल्ली पहुंचे। आगे इसका फायदा समाजवादी पार्टी ने उठाया और सपा प्रत्याशी को चार बार सांसद भेजा। इसमें सपा की हैट्रिक भी शामिल है। भाजपा दो बार जीती जबकि कांशीराम ने पहली बार चुनाव लड़कर इटावा सीट पर बसपा की धमक छोड़ी।
वर्ष 1952 से शुरू हुई लोकसभा चुनाव की यात्रा में इटावा को पहला सांसद बालकृष्ण शर्मा के रूप में मिला। इसके बाद कांग्रेस ने तुलाराम को चुनाव मैदान में उतरा था।
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स्थानीय मुद्दे पर प्रसपा सोशलिस्ट पार्टी के अर्जुन सिंह ने तुलाराम को चुनाव हराया। स्थानीय मुद्दों के बल पर कांग्रेस के खिलाफ अर्जुन सिंह भदौरिया तीन बार संसद तक पहुंचे लेकिन उनकी जीत में हर बार पांच साल का अंतराल भी रहा। जनता ने लगातार अर्जुन सिंह पर ही भरोसा जताया।
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1980, 1989, 1996 में राम सिंह शाक्य ने जनता दल व सपा से सांसद तक पहुंचाया। इसके बाद बसपा संस्थापक कांशीराम ने 1991 में पहली बार इटावा सीट से चुनाव लड़ा और कैडर वोटरों को संगठित किया। यह चुनाव में बसपा का इटावा सीट पर खाता खुला और कांशीराम पर जनता ने भरोसा जताया।
उसके बाद से आज तक बसपा का उम्मीदवार चुनाव नहीं जीत सका। इसके बाद 1996, 1999, 2004, 2009 में सपा के पाले में सीट रही। महज दो बार 1998 में 2014 में भाजपा को सीट मिल सकी।
1992 के बाद 1996 हुए लोकसभा चुनाव में सपा के उम्मीदवार राम सिंह शाक्य ने भाजपा को लंबे अंतर से पराजित किया था। अटल बिहारी और मोदी की पर जनता ने भरोसा जताया। इस पर 1998 में सुखदा मिश्रा और 2014 में अशोक दोहरे को दिल्ली पहुंचाया।
जिले में इंडस्ट्री न होने से लोगों को रोजगार के लिए बाहर जाना पड़ता है। इस वजह से बेरोजगारी बड़ा मुद्दा रहा। बिजली-पानी सड़क, स्वास्थ्य व शिक्षा के स्थानीय मुद्दों को समाजवादी पार्टी ने भुनाया और इटावा सीट पर अपनी पकड़ मजबूत रखी। बड़े मुद्दों का सीट पर असर कम दिखाई दिया।
सन सांसद पार्टी
1952 बालकृष्ण शर्मा कांग्रेस
1957 अर्जुन सिंह भदौरिया निर्दलीय
1962 गोपीनाथ दीक्षित कांग्रेस
1967 अर्जुन सिंह भदौरिया सोशलिस्ट
1971 श्रीशंकर तिवारी कांग्रेस
1977 अर्जुन सिंह भदौरिया बहुजन किसान दल
1980 राम सिंह शाक्य जनता पार्टी
1984 रघुराज सिंह चौधरी कांग्रेस
1989 रामसिंह शाक्य जनता दल
1991 कांशीराम बसपा
1996 राम सिंह शाक्य सपा
1998 सुखदा मिश्रा भाजपा
1999 रघुराज शाक्य सपा
2004 रघुराज शाक्य सपा
2009 प्रेमदास कठेरिया सपा
2014 अशोक दोहरे भाजपा
तीन बार संसद पहुंचे अर्जुन सिंह व रामसिंह शाक्य
कांग्रेस के खिलाफ नाराजगी सपा ने उठाया फायदा
सपा को छोड़कर किसी पार्टी ने नहीं लगाई हैट्रिक