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UP: ऐसा फर्जीवाड़ा...भाई की जगह दी परीक्षा, फिर फर्जी अभ्यर्थी बनकर गया जेल; बाहर आने के बाद बना सिपाही
Wed, 18 Jun 2025 10:59 PM IST
अरुन पाराशर
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
Published by: अरुन पाराशर
Updated Wed, 18 Jun 2025 10:59 PM IST
सार
जेल से जमानत पर रिहा होने के बाद युवक ने उत्तर प्रदेश पुलिस आरक्षी भर्ती के लिए तैयारी की। पिछले साल हुई परीक्षा में शामिल होने के बाद उसका चयन भी हो गया। अब मामले में पुलिस ने केस दर्ज किया है।
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- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
एटा में बीते वर्ष परीक्षा देकर उत्तर प्रदेश पुलिस आरक्षी भर्ती प्रक्रिया में चयनित एक युवक के खिलाफ पुलिस ने धोखाधड़ी समेत अन्य धाराओं में केस दर्ज किया है। आरोप है कि युवक ने वर्ष 2022 में अपने भाई के स्थान पर सीआईएसएफ (केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल) की परीक्षा दी थी। बाद में एक अन्य युवक की जगह परीक्षा देते हुए पकड़ा गया और जनपद गौतमबुद्धनगर की जेल में रहा। छूटकर आया तो पिछले साल खुद परीक्षा देकर उत्तर प्रदेश पुलिस आरक्षी भर्ती प्रक्रिया में चयनित हो गया।
थाना अवागढ़ में तैनात उपनिरीक्षक गौतम सिंह ने अभिषेक निवासी कटेलिया के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई है। रिपोर्ट में लिखा है कि एक व्यक्ति ने अभिषेक के खिलाफ प्रार्थनापत्र दिया। इसकी जांच कराई गई तो कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए। आरोप के मुताबिक, अभिषेक ने सीआईएसएफ में आरक्षी भर्ती प्रक्रिया के तहत 18 मई 2022 को अपने भाई सचिन के स्थान पर परीक्षा दी। इसी भर्ती प्रक्रिया में अजय जादौन नाम के अभ्यर्थी से पैसा लेकर उसकी जगह 26 मई 2022 को परीक्षा देने पहुंचा।
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थाना अवागढ़ में तैनात उपनिरीक्षक गौतम सिंह ने अभिषेक निवासी कटेलिया के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई है। रिपोर्ट में लिखा है कि एक व्यक्ति ने अभिषेक के खिलाफ प्रार्थनापत्र दिया। इसकी जांच कराई गई तो कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए। आरोप के मुताबिक, अभिषेक ने सीआईएसएफ में आरक्षी भर्ती प्रक्रिया के तहत 18 मई 2022 को अपने भाई सचिन के स्थान पर परीक्षा दी। इसी भर्ती प्रक्रिया में अजय जादौन नाम के अभ्यर्थी से पैसा लेकर उसकी जगह 26 मई 2022 को परीक्षा देने पहुंचा।
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अधिकारियों और कर्मचारियों को पहचाना हुआ चेहरा दिखने पर शक हुआ। पड़ताल की गई तो पता लगा कि वह फर्जी अभ्यर्थी है। उसी दिन उसके विरुद्ध गौतमबुद्धनगर के थाना ईकोटेक में रिपोर्ट दर्ज करा दी गई लेकिन इस दौरान भी उसने अपना असली नाम नहीं बताया और सचिन के नाम से उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई और उसे जेल भेज दिया गया। उसके विरुद्ध आरोपपत्र भी अदालत में भेज दिया गया और वहां मुकदमा शुरू हो गया।
जमानत पर रिहा होने के बाद उसने उत्तर प्रदेश पुलिस आरक्षी भर्ती के लिए तैयारी की। पिछले साल हुई परीक्षा में शामिल होने के बाद उसका चयन भी हो गया। सीओ जलेसर ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि सामने आए तथ्यों के आधार पर रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है। मामले की जांच की जा रही है।
जमानत पर रिहा होने के बाद उसने उत्तर प्रदेश पुलिस आरक्षी भर्ती के लिए तैयारी की। पिछले साल हुई परीक्षा में शामिल होने के बाद उसका चयन भी हो गया। सीओ जलेसर ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि सामने आए तथ्यों के आधार पर रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है। मामले की जांच की जा रही है।