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मिड-डे मील के दलिया में निकले कीड़े
ब्यूरो अमर उजाला, एटा
Updated Mon, 31 Aug 2015 06:44 PM IST
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प्राथमिक विद्यालयों में मिड-डे मील लापरवाही की भेंट चढ़ रहा है। योजना के तहत सरकारी स्कूलों में जहां मेन्यू के तहत मिड-डे मील न बनने की शिकायत बढ़ रही हैं, वहीं स्कूलों में बच्चों को दूषित भोजन खिलाया जा रहा है। सोमवार को विकास खंड शीतलपुर के प्राथमिक विद्यालय पुरा में बच्चों को दूषित दलिया खिलाया जा रहा था, जिसमें कीड़े रेंग रहे थे। वहां मौजूद ग्रामीणों के विरोध करने पर दलिया के वितरण को रोक दिया गया। प्रधानाध्यापक की अनुपस्थिति में जब सहायक अध्यापिका से ग्रामीणों ने बात की तो उन्होंने कहा कि इससे उनका कोई लेना देना नहीं है। इसके बाद ग्रामीण दलिया का नमूना लेकर कलक्ट्रेट पहुंचे।
गांव के सुखवीर और पीतम ने बताया कि स्कूल में मिड-डे मील के हिसाब से खाना नहीं था। इसके बावजूद प्राथमिक विद्यालय में दलिया बनाया गया। ग्रामीणों ने जब इसका निरीक्षण किया तो दलिया में कीड़े देखने को मिले। एक-दो बच्चों ने इसे खा भी लिया, जबकि अन्य को खाने से रोक दिया गया। बाद में इसे जानवरों को खिलाया गया। स्कूल में करीब 100-125 के बच्चे हैं। उन्होंने प्रधानाध्यापक पर आरोप लगाते हुए कहा कि प्रधानाध्यापक बच्चों को रखा हुआ दूध दे देते हैं। कई बार मिड-डे मील का भोजन खाकर बच्चे बीमार भी पड़ गए हैं। इस संबंध में जब प्रधानाध्यापक से बात की जाए तो उनका जवाब होता है कि जैसे है, वैसा ही खिलाएंगे। मेन्यू के अनुसार भोजन न बनाने की शिकायत पर भी उनका एक ही जवाब होता है ये आरोप गलत है। ग्रामीण राजू, धर्मेंद्र, रामभरोसे, नबाव सिंह, चोब सिंह, यादराम, सुनहरी आदि ने शिकायत की।
मिड-डे मील का पचा जाते हैं पैसा
एटा। प्राथमिक विद्यालय में मेन्यू के हिसाब से भोजन न बनवाने पर प्रधानाध्यापकों को मोटी रकम बचती है। सूत्रों की मानें तो प्राथमिक विद्यालयों के संबंधित राशन डीलरों के यहां राशन के रूप में गेहूं और चावल आते हैं। जिसका उठान प्रधानाध्यापक करते हैं। इसके अलावा प्रधानाध्यापकों के खाते में एमडीएम बनाने का खर्चा भी आता है, लेकिन प्रधानाध्यापक गेहूं का दलिया बनवा लेते हैं। इसके चलते सप्ताह में चार दिन स्कूलों में दलिया चावल बनते हैं। इससे प्रधानाध्यापकों को काफी रकम बच जाती है।
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गांव के लोग मिड-डे मील खराब होने की शिकायत करने आए थे। मामले की अपने स्तर से जांच कराई जा रही है। सेहत से समझौता नहीं होगा। दोषियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
- शौकीन सिंह यादव, बीएसए
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गांव के सुखवीर और पीतम ने बताया कि स्कूल में मिड-डे मील के हिसाब से खाना नहीं था। इसके बावजूद प्राथमिक विद्यालय में दलिया बनाया गया। ग्रामीणों ने जब इसका निरीक्षण किया तो दलिया में कीड़े देखने को मिले। एक-दो बच्चों ने इसे खा भी लिया, जबकि अन्य को खाने से रोक दिया गया। बाद में इसे जानवरों को खिलाया गया। स्कूल में करीब 100-125 के बच्चे हैं। उन्होंने प्रधानाध्यापक पर आरोप लगाते हुए कहा कि प्रधानाध्यापक बच्चों को रखा हुआ दूध दे देते हैं। कई बार मिड-डे मील का भोजन खाकर बच्चे बीमार भी पड़ गए हैं। इस संबंध में जब प्रधानाध्यापक से बात की जाए तो उनका जवाब होता है कि जैसे है, वैसा ही खिलाएंगे। मेन्यू के अनुसार भोजन न बनाने की शिकायत पर भी उनका एक ही जवाब होता है ये आरोप गलत है। ग्रामीण राजू, धर्मेंद्र, रामभरोसे, नबाव सिंह, चोब सिंह, यादराम, सुनहरी आदि ने शिकायत की।
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मिड-डे मील का पचा जाते हैं पैसा
एटा। प्राथमिक विद्यालय में मेन्यू के हिसाब से भोजन न बनवाने पर प्रधानाध्यापकों को मोटी रकम बचती है। सूत्रों की मानें तो प्राथमिक विद्यालयों के संबंधित राशन डीलरों के यहां राशन के रूप में गेहूं और चावल आते हैं। जिसका उठान प्रधानाध्यापक करते हैं। इसके अलावा प्रधानाध्यापकों के खाते में एमडीएम बनाने का खर्चा भी आता है, लेकिन प्रधानाध्यापक गेहूं का दलिया बनवा लेते हैं। इसके चलते सप्ताह में चार दिन स्कूलों में दलिया चावल बनते हैं। इससे प्रधानाध्यापकों को काफी रकम बच जाती है।
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गांव के लोग मिड-डे मील खराब होने की शिकायत करने आए थे। मामले की अपने स्तर से जांच कराई जा रही है। सेहत से समझौता नहीं होगा। दोषियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
- शौकीन सिंह यादव, बीएसए