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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Etah News ›   World Water Day 2022 groundwater level is slipping down by 1.40 meters every year danger of dark zone is increasing rapidly in etah 

विश्व जल दिवस 2022: हर साल 1.40 मीटर तक नीचे खिसक रहा भूजलस्तर, तेजी से बढ़ रहा डार्क जोन का खतरा   

Mon, 21 Mar 2022 07:15 PM IST
धीरेन्द्र सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा Published by: धीरेन्द्र सिंह Updated Mon, 21 Mar 2022 07:15 PM IST
सार

विश्व जल दिवस हर साल 22 मार्च को मनाया जाता है। इस दिन पानी के महत्व और इसके प्रबंधन के बारे में लोगों में जागरूक किया जाता है। इसके बावजूद पानी की बर्बादी पर रोक नहीं लग पा रही है। जिले में भूजलस्तर तेजी से नीचे खिसक रहा है।

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World Water Day 2022 groundwater level is slipping down by 1.40 meters every year danger of dark zone is increasing rapidly in etah 
विश्व जल दिवस - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भूगर्भ जल की स्थिति चिंताजनक होती जा रही है। हर साल औसतन 1.40 मीटर भूजल स्तर नीचे गिर रहा है। निधौली कलां डार्क जोन से हटा तो अलीगंज ब्लॉक इसकी गिरफ्त में आ गया है। इसके बावजूद पानी की बर्बादी पर रोक नहीं लग पा रही है। 

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बरसात का पानी नालियों से होते हुए नदियों में बह जाता है। वहीं घर-घर पानी की टंकियां भरने के बाद काफी पानी बहकर बर्बाद हो जाता है। शहर में रेन वाटर हार्वेस्ट सिस्टम की कमी होने की वजह से बरसाती पानी का जल संचयन नहीं हो पा रहा है, जिसका नतीजा भूजल स्तर में कमी के रूप में सामने आ रहा है। 
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पिछले साल की अपेक्षा एक मीटर जलस्तर नीचे खिसक गया है, जिसकी वजह से जल संकट गहराने लगा है। पिछले साल जिले के जलेसर और निधौली कलां ब्लॉक डार्क जोन में शामिल थे। इस साल अलीगंज ब्लॉक भी डार्क जोन में शामिल हो गया है।

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नहीं बने रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम

सभी सरकारी कार्यालयों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम की स्थापना करने का प्रावधान पिछले साल किया गया था, लेकिन अधिकांश अधिकारियों की ओर से कवायद नहीं की गई, जिसकी वजह से सरकारी कार्यालयों में सिस्टम तैयार नहीं हो सके। 

जल स्तर गिरने से सूखे सैकड़ों हैंडपंप

जलस्तर गिरने की वजह से सैकड़ों हैंडपंप सूख गए। जिला पंचायत राज विभाग के अधीन ग्रामीण क्षेत्रों में 38 हजार हैंडपंप हैं। एक साल के दरम्यान में भूजल स्तर में आई कमी से करीब एक हजार हैंडपंपों का पानी उतर गया। वहीं एटा शहर में लगे 1523 हैंडपंपों में से 150 खराब पड़े हैं।

ये हैं भूजलस्तर गिरने के कारण

- पानी का अनावश्यक अधिक मात्रा में प्रयोग
- वाहनों को धोने में पानी की बर्बादी
- घर, सड़क आदि की धुलाई में पानी की बर्बादी
- नगर पालिका, नगर पंचायतों की जलापूर्ति में लीकेज से बर्बादी
- भूजल दोहन को लेकर कोई नियंत्रण नहीं
- बरसात के पानी के संचयन के लिए व्यवस्थाएं नहीं

आगे आएं लोग

पर्यावरणविद ज्ञानेंद्र रावत ने बताया कि भौतिकवादी युग में लोग पानी की बर्बादी करते हैं, जबकि बरसात के पानी को संजोने के उपाय नहीं किए जा रहे। आने वाली पीढ़ियों के लिए लोगों को आगे आना होगा। वहीं सिंचाई विभाग के एसडीओ भरत भूषण ने कहा कि जिले में जलस्तर सुधारने को बरसात के पानी को संचयित करने के लिए सरकारी सहित निजी भवनों में भी व्यवस्था होनी चाहिए। जिससे जल संचयन किया जा सके। 


 

ब्लॉक वार जलस्तर (मीटर में)

ब्लॉक            2020         2021
अलीगंज        14.43       15.80
जैथरा            13.65       15.59
मारहरा          10.71       11.74
निधौली कलां   11.46       13.67
सकीट              7.45        8.94
शीतलपुर           9.19      11.23
जलेसर            16.82      17.98

जिले का भूजलस्तर हर साल कम होता जा रहा है। इसे रोकने के लिए सॉकपिट के साथ रेनवाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम तैयार करने की जरूरत है। जिस पर कुछ जगह काम कराया जा रहा है। - बीएस सुमन, प्रभारी अधिशासी अभियंता, लघु सिंचाई

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