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Etah News: किसानों ने बदली सोच तो मशरूम ने बदल दिए हालात
Sat, 23 Sep 2023 11:09 PM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
Updated Sat, 23 Sep 2023 11:09 PM IST
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एटा। जिले में जैसे-जैसे किसान जागरूक हो रहे हैं, परंपरागत खेती से हटकर अधिक लाभ देने वाली आधुनिक खेती कर रहे हैं। इससे उनकी आमदनी में बड़ा इजाफा भी हो रहा है। ऐसे ही जनपद के करीब 60 किसानों ने परंपरागत खेती की सोच बदली तो मशरूम ने उनकी आर्थिक स्थिति को भी बदल दिया। कई किसान तो मशरूम की खेती के लिए खाद तैयार कर इसकी बिक्री से भी मुनाफा कमा रहे हैं।
वैसे तो वर्षभर मशरूम की खेती होती है। इसमें मिल्की मशरूम की खेती के लिए उपयुक्त समय जून से सितंबर माह है। वहीं बटन मशरूम के लिए अक्तूबर से मार्च और ढिंगरी या ऑस्टर मशरूम की खेती फरवरी से मई तक होती है। जिले के किसान करीब छह माह के सीजन के दौरान मशरूम की खेती से करीब छह लाख रुपये से ज्यादा आय कर लेते है। इसमें हैंगिंग विधि से बैग लगाए जाते हैं। एक कमरे में करीब 100 बैग लग जाते हैं। इसमें लागत पांच से छह हजार रुपये पड़ती है।
इसमें सबसे पहले भूसा को भिगोया जाता है फिर उसे सुखाकर बीज डालकर बैग लगाए जाते हैं। तापमान 30 डिग्री होने तक उत्पादन होता है। इससे अधिक तापमान पर फसल खराब हो जाती है। अक्तूबर से फरवरी तक सीजन होता है। अगर तापमान बनाए रखने के लिए कूलर लगाने की सुविधा है तो यह अप्रैल तक चल जाता है। वहीं ठंडे स्थानों पर तापमान अनुकूल होने से मशरूम को सदाबहार खेती कहा जाता है। सब्जी से लेकर अचार में इसका इस्तेमाल होता है।
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महानगरों में होती है आपूर्ति
मशरूम की मांग धीमे-धीमे जनपद में भी बढ़ रही है। मुख्य रूप से इसकी आपूर्ति दिल्ली, लखनऊ, कानपुर आदि महानगरों में की जाती है। वहां होटल, रेस्तरां में यह काफी पसंद किया जाता है। किसानों के मुताबिक मशरूम की बिक्री 200 रुपये किलो आसानी से हो जाती है। एक किलो उत्पादन पर खर्चा करीब 80 रुपये आता है।
कम लागत में मिल रहा अधिक लाभ
मशरूम की खेती करके हम लोग पारंपरिक गेहूं या धान की खेती से कई गुना अधिक कमा लेते हैं। जिसकी वजह से हमारी आजीविका काफी बेहतर तरीके से चल रही है। इसमें लागत से ढाई गुना अधिक तक मुनाफा हो जाता है। - हरिओम, उदयपुरा
मशरूम की खेती करके किसान संपन्न हो रहा है। कम लागत में अधिक लाभ कमा रहा है। वहीं मशरूम को बेचने के लिए समस्या भी नहीं है। एटा, मैनपुरी में ही आसानी के साथ बिक जाती है, बाहर नहीं जाना पड़ता। - सुखेंद्र सिंह, केला
जिले में कई किसान मशरूम की खेती कर रहे हैं। इससे कम लागत में अच्छा-खासा लाभ प्राप्त कर रहे हैं। अपने यहां विशेषरूप से अक्टूबर से फरवरी के मध्य मशरूम की खेती की जाती है। - डॉ. सुनील कुमार, जिला उद्यान अधिकारी
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वैसे तो वर्षभर मशरूम की खेती होती है। इसमें मिल्की मशरूम की खेती के लिए उपयुक्त समय जून से सितंबर माह है। वहीं बटन मशरूम के लिए अक्तूबर से मार्च और ढिंगरी या ऑस्टर मशरूम की खेती फरवरी से मई तक होती है। जिले के किसान करीब छह माह के सीजन के दौरान मशरूम की खेती से करीब छह लाख रुपये से ज्यादा आय कर लेते है। इसमें हैंगिंग विधि से बैग लगाए जाते हैं। एक कमरे में करीब 100 बैग लग जाते हैं। इसमें लागत पांच से छह हजार रुपये पड़ती है।
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इसमें सबसे पहले भूसा को भिगोया जाता है फिर उसे सुखाकर बीज डालकर बैग लगाए जाते हैं। तापमान 30 डिग्री होने तक उत्पादन होता है। इससे अधिक तापमान पर फसल खराब हो जाती है। अक्तूबर से फरवरी तक सीजन होता है। अगर तापमान बनाए रखने के लिए कूलर लगाने की सुविधा है तो यह अप्रैल तक चल जाता है। वहीं ठंडे स्थानों पर तापमान अनुकूल होने से मशरूम को सदाबहार खेती कहा जाता है। सब्जी से लेकर अचार में इसका इस्तेमाल होता है।
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महानगरों में होती है आपूर्ति
मशरूम की मांग धीमे-धीमे जनपद में भी बढ़ रही है। मुख्य रूप से इसकी आपूर्ति दिल्ली, लखनऊ, कानपुर आदि महानगरों में की जाती है। वहां होटल, रेस्तरां में यह काफी पसंद किया जाता है। किसानों के मुताबिक मशरूम की बिक्री 200 रुपये किलो आसानी से हो जाती है। एक किलो उत्पादन पर खर्चा करीब 80 रुपये आता है।
कम लागत में मिल रहा अधिक लाभ
मशरूम की खेती करके हम लोग पारंपरिक गेहूं या धान की खेती से कई गुना अधिक कमा लेते हैं। जिसकी वजह से हमारी आजीविका काफी बेहतर तरीके से चल रही है। इसमें लागत से ढाई गुना अधिक तक मुनाफा हो जाता है। - हरिओम, उदयपुरा
मशरूम की खेती करके किसान संपन्न हो रहा है। कम लागत में अधिक लाभ कमा रहा है। वहीं मशरूम को बेचने के लिए समस्या भी नहीं है। एटा, मैनपुरी में ही आसानी के साथ बिक जाती है, बाहर नहीं जाना पड़ता। - सुखेंद्र सिंह, केला
जिले में कई किसान मशरूम की खेती कर रहे हैं। इससे कम लागत में अच्छा-खासा लाभ प्राप्त कर रहे हैं। अपने यहां विशेषरूप से अक्टूबर से फरवरी के मध्य मशरूम की खेती की जाती है। - डॉ. सुनील कुमार, जिला उद्यान अधिकारी