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Etah News: रजिस्ट्री कार्य के निजीकरण के विरोध में तहसील सदर में हंगामा, अधिवक्ताओं ने ठप किया काम
Thu, 18 Jun 2026 11:06 PM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
Updated Thu, 18 Jun 2026 11:06 PM IST
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सदर तहसील में ई रजिस्ट्री का विरोध करते अधिवक्ता। संवाद
एटा। तहसील सदर स्थित उप निबंधक (रजिस्ट्री) कार्यालय में रजिस्ट्री संबंधी कार्य एक निजी कंपनी को सौंपे जाने के विरोध में बृहस्पतिवार को अधिवक्ताओं, बैनामा लेखकों और स्टाम्प वेंडरों ने जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने सरकार के इस निर्णय को जनविरोधी बताते हुए जमकर नारेबाजी की। इस विरोध प्रदर्शन के कारण दिनभर रजिस्ट्री संबंधी कार्य पूरी तरह ठप रहा।
दोपहर करीब 11 बजे बड़ी संख्या में अधिवक्ता, बैनामा लेखक और स्टाम्प विक्रेता तहसील परिसर में एकत्र हुए और रजिस्ट्री व्यवस्था के निजीकरण के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। बैनामा लेखक संघ के अध्यक्ष महेश चंद्र यादव ने कहा, इस फैसले से न केवल हमारे रोजगार पर संकट खड़ा होगा, बल्कि आम जनता को भी भारी परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। निजी कंपनी के हाथों में काम जाने से पारदर्शिता और जवाबदेही दोनों प्रभावित होंगी। विरोध के दौरान अधिवक्ताओं ने रजिस्ट्री कार्यालय के बाहर नारेबाजी की और अपनी मांगों के समर्थन में कार्यालय पर ताला भी जड़ दिया। इसके चलते रजिस्ट्री से जुड़े सभी कार्य पूरी तरह ठप हो गए और अपने काम से तहसील पहुंचे लोगों को मायूस होकर लौटना
अधिवक्ता संघ अध्यक्ष अनिल प्रताप सिंह ने कहा कि सरकार को इस निर्णय पर पुनर्विचार करना चाहिए और रजिस्ट्री व्यवस्था को पूर्व की भांति सरकारी नियंत्रण में ही संचालित किया जाना चाहिए। उनका कहना था कि निजीकरण की नीति से अधिवक्ताओं, बैनामा लेखकों और स्टांप वेंडरों के समक्ष आजीविका का संकट खड़ा हो सकता है। अधिवक्ता नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उन्होंने अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन शुरू करने की भी चेतावनी दी। प्रवेंद्र कुमार, संतोष यादव, विनय कुमार कुशलपाल यादव, धर्मेंद्र सिंह चौहान, नाहर सिंह वर्मा, रिषी कुमार, अमर सिंह यादव, रामवीर सिंह यादव, बृजेश वर्मा, अनिल तिवारी, संजीव वर्मा, शैलेंद्र सिंह राजा, ज्ञानेंद्र सिंह वर्मा समेत अन्य लोग मौजूद रहे।
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दोपहर करीब 11 बजे बड़ी संख्या में अधिवक्ता, बैनामा लेखक और स्टाम्प विक्रेता तहसील परिसर में एकत्र हुए और रजिस्ट्री व्यवस्था के निजीकरण के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। बैनामा लेखक संघ के अध्यक्ष महेश चंद्र यादव ने कहा, इस फैसले से न केवल हमारे रोजगार पर संकट खड़ा होगा, बल्कि आम जनता को भी भारी परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। निजी कंपनी के हाथों में काम जाने से पारदर्शिता और जवाबदेही दोनों प्रभावित होंगी। विरोध के दौरान अधिवक्ताओं ने रजिस्ट्री कार्यालय के बाहर नारेबाजी की और अपनी मांगों के समर्थन में कार्यालय पर ताला भी जड़ दिया। इसके चलते रजिस्ट्री से जुड़े सभी कार्य पूरी तरह ठप हो गए और अपने काम से तहसील पहुंचे लोगों को मायूस होकर लौटना
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अधिवक्ता संघ अध्यक्ष अनिल प्रताप सिंह ने कहा कि सरकार को इस निर्णय पर पुनर्विचार करना चाहिए और रजिस्ट्री व्यवस्था को पूर्व की भांति सरकारी नियंत्रण में ही संचालित किया जाना चाहिए। उनका कहना था कि निजीकरण की नीति से अधिवक्ताओं, बैनामा लेखकों और स्टांप वेंडरों के समक्ष आजीविका का संकट खड़ा हो सकता है। अधिवक्ता नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उन्होंने अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन शुरू करने की भी चेतावनी दी। प्रवेंद्र कुमार, संतोष यादव, विनय कुमार कुशलपाल यादव, धर्मेंद्र सिंह चौहान, नाहर सिंह वर्मा, रिषी कुमार, अमर सिंह यादव, रामवीर सिंह यादव, बृजेश वर्मा, अनिल तिवारी, संजीव वर्मा, शैलेंद्र सिंह राजा, ज्ञानेंद्र सिंह वर्मा समेत अन्य लोग मौजूद रहे।
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