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UP: हत्या के मामले में दो पुलिसकर्मियों को उम्रकैद, 21 साल बाद आया कोर्ट का फैसला; जुर्माना भी लगा

Wed, 12 Aug 2026 04:59 PM IST
Arun Parashar संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा Published by: Arun Parashar Updated Wed, 12 Aug 2026 04:59 PM IST
सार

हत्या के मामले में कोर्ट ने दो पुलिसकर्मियों को दोषी ठहराया। दोनों दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाने के साथ ही कोर्ट ने जुर्माना भी लगाया है।

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Two police personnel sentenced to life imprisonment in 21 year old murder case
कोर्ट के फैसले के बाद पुलिस हिरासत में दोषी। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

पुलिस हिरासत में मौत के मामले में अदालत ने 21 साल बाद फैसला सुनाते हुए दो पुलिसकर्मियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। वर्ष 2005 में प्रधानी के चुनाव में विवाद के बाद मुहरपाल सिंह उर्फ पप्पू (40) को जैथरा थाने ले जाकर बेरहमी से पीटा गया था, जिससे उनकी माैत हाे गई थी।
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मामले में तत्कालीन थानाध्यक्ष मनीष यादव निवासी शिवदरा, थाना चौबेपुर, वाराणसी और पुलिसकर्मी मिढ़ई लाल निवासी नगला दिलीप, थाना छिबरामऊ, कन्नौज, आरक्षी महावीर सिंह निवासी नगला बुधू, थाना वेदपुरा, इटावा और गजराज सिंह निवासी नगला शीतल, थाना जसराना, फिरोजाबाद के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी।
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सुनवाई के दौरान तत्कालीन थानाध्यक्ष मनीष यादव और मिढ़ई लाल की मृत्यु हो गई थी। सत्र न्यायाधीश राकेश धर दुबे के न्यायालय ने जीवित दोनों आरोपियों आरक्षी महावीर सिंह और दरोगा गजराज सिंह को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। महावीर सिंह वर्तमान में हाथरस में तैनात है जबकि गजराज सिंह सेवानिवृत्त हो चुका है। अदालत ने दोषियों पर 34,500 रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। सत्र न्यायाधीश ने कहा कि जेल में बिताई गई अवधि को सजा में समायोजित किया जाएगा।

 
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जानें, क्या है पूरा मामला
अभियोजन पक्ष के अनुसार, 26 अगस्त 2005 को जैथरा के गांव बहगो में प्रधानी के चुनाव को लेकर दो पक्षों में विवाद हुआ था। मामले में अतिवीर सिंह ने जैथरा थाने में प्राथमिकी दर्ज कराते हुए आरोप लगाया कि 26 अगस्त की दोपहर प्रधान पद की उम्मीदवार मुन्नी देवी, उनके पति अशोक सिंह, परिवारीजन और समर्थकों ने उनके भाई मुहरपाल सिंह को घेर लिया और गाली-गलौज करते हुए फायरिंग की। तत्कालीन थानाध्यक्ष मनीष यादव, सिपाही सौदान सिंह, सिपाही महावीर सिंह व दरोगा गजराज सिंह मुहरपाल को ही पकड़कर थाने ले गए। शाम को उनका बेटा खाना लेकर जब जैथरा थाने पहुंचा तो थानाध्यक्ष और अन्य पुलिसकर्मी मुहरपाल को उल्टा लटकाकर बुरी तरह से पीट रहे थे। 

27 अगस्त को भी उन्हें बेरहमी से थाने में पीटा गया। उसी रात 10 बजे घर पर सूचना आई कि पुलिसकर्मियों ने मुहरपाल की हत्या कर दी है। जब परिवार के लोग थाने पहुंचे तब तक एसओ व उक्त पुलिसकर्मी मुहरपाल के शव को एक निजी वाहन में डालकर ले जा चुके थे। पुलिस ने शव को गायब कर दिया। मामले की शुरुआती जांच में पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने का हवाला देते हुए विवेचक ने अंतिम रिपोर्ट (एफआर) लगा दी। बाद में उच्चाधिकारियों के आदेश पर जांच सीबीसीआईडी को सौंपी गई। नए सिरे से विवेचना के बाद चारों पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या व अन्य धाराओं में आरोपपत्र दाखिल किया गया।
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