चिंता: 10 वर्षों में छह मीटर नीचे चला गया भूजल स्तर, सरकारी प्रयास और जागरूकता कार्यक्रमों का नहीं कोई असर
एटा में भूजल स्तर लगातार गिरता जा रहा है। यहां 2012 में भूजल स्तर 8.22 मीटर था तो वहीं 2021 में यह घटकर 14.36 पर पहुंच गया। गिरावट अभी भी जारी है। 10 वर्षों में भूजल स्तर छह मीटर नीचे चला गया है।
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उत्तर प्रदेश के एटा जिले में पेयजल एक बड़ी समस्या बनकर उभरती आ रही है। पिछले 10 वर्षों के आंकड़ों के अनुसार यहां भूजल स्तर छह मीटर नीचे चला गया है। जो चिंता का विषय है। हालांकि जिले में भूजल स्तर सुधारने के लिए तमाम प्रयास और जागरूकता कार्यक्रम किए जा रहे हैं। इसके बावजूद इसमें सुधार नहीं हो पा रहा है।
ताजा रिपोर्ट के अनुसार, जिले में एक दशक में भूजल का स्तर छह मीटर से भी ज्यादा नीचे गिर गया है। यह बड़ी चिंता की बात है। जल ही जीवन है। हम सब जानते हैं कि हमारे लिए जल कितना महत्वपूर्ण है। लेकिन, यह सब बातें हम तब भूल जाते हैं, जब नहाने, कपड़े धोने, गाड़ियां धुलने सहित विभिन्न कार्यों में पानी का बेजा इस्तेमाल करते हैं।
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अनावश्यक रूप से बहाने में कोई गुरेज नहीं
इस दौरान हम काफी मात्रा में पानी को अनावश्यक रूप से बहाने में कोई गुरेज नहीं करते। घर-घर बोरिंग और गांव में निजी नलकूपों के बढ़ते चलन से यह समस्या और गहरा गई है। इसके चलते भूजल स्तर में तेजी से गिरावट आई है। स्थिति यह है कि 2012 में जहां मानसून पूर्व का भूजल स्तर 8.22 मीटर था तो 2021 में यह घटकर 14.36 पर पहुंच गया। गिरावट अभी भी जारी है।
अति दोहित श्रेणी से बाहर आया अलीगंज विकासखंड
विकासखंड अलीगंज अति दोहित (क्रिटिकल) से निकलकर दोहित (सेमी क्रिटिकल) में आ गया है। इसके बाद अब जिले में केवल जलेसर विकासखंड क्षेत्र ही अति दोहित श्रेणी में बचा है। 2022 तक जिले के जलेसर और अलीगंज विकासखंड क्षेत्र अति दोहित श्रेणी में रखे गए थे। इस साल आई रिपोर्ट के आधार पर अलीगंज इस श्रेणी से बाहर आ गया है।