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जौली के जाने के ख्याल से ही चिंतित हो गया था पूरा परिवार
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अलीगंज में जौली को दुलारते प्रधान के परिजन ।संवाद
- फोटो : ETAH
अलीगंज(एटा)। जिस कुत्ते (जौली) के मालिकाना हक को लेकर रविवार को थाने में दो घंटे पंचायत चली। उसके जाने के ख्याल से ही फरसौली प्रधान का पूरा परिवार चिंतित हो गया था। सभी परिजन का यह बेहद प्यारा है। जब थाने से लौटकर आया तो सभी ने राहत की सांस ली और उसे दुलार कर खुशियां मनाईं।
फर्रुखाबाद के पुरौरी गांव के रहने वाले उमेश सक्सेना ने रविवार को थाने में शिकायत की थी। आरोप लगाया था कि उनका कुत्ता जौली करीब आठ महीने पहले भाग गया था जो फरसौली के ग्राम प्रधान धर्मपाल सिंह यादव के घर पर है। इस पर पुलिस ने उन्हें फोन कर पूरी बात बताते हुए कुत्ते सहित थाने पर बुलाया। पुलिस का संदेश मिलते ही प्रधान का पूरा परिवार सकते में आ गया। समझ नहीं आ रहा था कि जिस कुत्ते को वह जन्म से लेकर आठ साल तक लगातार पाल रहे हैं, उस पर कोई अपना दावा कैसे कर सकता है? चिंतित तो प्रधान भी थे, लेकिन विश्वास भी था कि कुत्ता हमारा है और किसी दूसरे व्यक्ति की बात झूठी साबित हो जाएगी।
सुबह 10:30 से दोपहर 12:30 बजे तक पंचायत चली। जिसमें ईश्वर के समक्ष शपथ लेने के साथ ही साबित हो गया कि कुत्ता प्रधान का है। इसके बाद उसे लेकर प्रधान अपने घर पहुंचे तो सभी परिजन कुत्ते के पास पहुंच गए और उसे लाड़ करने लगे।
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प्रधान ने बताया कि करीब 20 साल पहले उन्हें कुत्ता पालने की जिज्ञासा हुई। अलग-अलग नस्लों के कुत्ते लाकर पालने लगे। अलीगढ़ से जर्मन शेफर्ड का एक जोड़ा लेकर आए। उसकी ही संतान जौली है। जिसके जन्म के बाद से लगातार पाल रहे हैं। अब वह आठ साल का हो चुका है। घर में अब यही एक कुत्ता बचा है, जो सभी का दुलारा है। प्रधान ने बताया कि घर में भैंस पली है। जौली को सभी पारिवारिक सदस्यों की तरह दूध, मट्ठा, रोटी खिलाई जाती है। मांसाहार नहीं देते हैं।
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फर्रुखाबाद के पुरौरी गांव के रहने वाले उमेश सक्सेना ने रविवार को थाने में शिकायत की थी। आरोप लगाया था कि उनका कुत्ता जौली करीब आठ महीने पहले भाग गया था जो फरसौली के ग्राम प्रधान धर्मपाल सिंह यादव के घर पर है। इस पर पुलिस ने उन्हें फोन कर पूरी बात बताते हुए कुत्ते सहित थाने पर बुलाया। पुलिस का संदेश मिलते ही प्रधान का पूरा परिवार सकते में आ गया। समझ नहीं आ रहा था कि जिस कुत्ते को वह जन्म से लेकर आठ साल तक लगातार पाल रहे हैं, उस पर कोई अपना दावा कैसे कर सकता है? चिंतित तो प्रधान भी थे, लेकिन विश्वास भी था कि कुत्ता हमारा है और किसी दूसरे व्यक्ति की बात झूठी साबित हो जाएगी।
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सुबह 10:30 से दोपहर 12:30 बजे तक पंचायत चली। जिसमें ईश्वर के समक्ष शपथ लेने के साथ ही साबित हो गया कि कुत्ता प्रधान का है। इसके बाद उसे लेकर प्रधान अपने घर पहुंचे तो सभी परिजन कुत्ते के पास पहुंच गए और उसे लाड़ करने लगे।
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प्रधान ने बताया कि करीब 20 साल पहले उन्हें कुत्ता पालने की जिज्ञासा हुई। अलग-अलग नस्लों के कुत्ते लाकर पालने लगे। अलीगढ़ से जर्मन शेफर्ड का एक जोड़ा लेकर आए। उसकी ही संतान जौली है। जिसके जन्म के बाद से लगातार पाल रहे हैं। अब वह आठ साल का हो चुका है। घर में अब यही एक कुत्ता बचा है, जो सभी का दुलारा है। प्रधान ने बताया कि घर में भैंस पली है। जौली को सभी पारिवारिक सदस्यों की तरह दूध, मट्ठा, रोटी खिलाई जाती है। मांसाहार नहीं देते हैं।