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UP: मछली पालन में लागत कम और मुनाफा दोगुना, 60 प्रतिशत तक मिलता है सरकार से अनुदान; जानें कैसे मिलेगा लाभ

Sun, 17 Sep 2023 12:45 PM IST
आगरा ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा Updated Sun, 17 Sep 2023 12:45 PM IST
सार

सरकार ने किसानों की आय दोगुनी करने का वादा किया। इसके लिए तमाम योजनाओं की राह दिखाई। जिले के 30 से अधिक किसानों ने मछली पालन की राह पकड़ी और उनके लिए दोगुनी आय का वादा सच भी हो गया। परंपरागत खेती से हटकर उन्होंने मछली पालन की जो हिम्मत जुटाई, उसमें अब वो अच्छा मुनाफा कमाने लगे हैं।
 

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The promise of double income from fish farming is coming true
मछली पालन - फोटो : amar ujala

विस्तार

एटा में युवा मछली पालक संगम चौहान जिले ही नहीं प्रदेश में भी रंग बिरंगी मछलियों का कारोबार कर रहे हैं। संगम चौहान ने बताया कि शांतिनगर में उनका रंग-बिरंगी मछलियों का शोरूम है। जहां से मछली पालने के शौकीन लोग खरीद कर ले जाते हैं। वहीं इनको पालने के लिए 4 हजार वर्गमीटर का फार्म हाउस जीटी रोड पर महिंद्रा एजेंसी के सामने बना है। संगम चौहान के अनुसार उनका टर्नओवर लगभग 45 लाख रुपये हैं। इससे लगभग 13.50 लाख का सालाना मुनाफा हो जाता है। इतना मुनाफा परंपरागत गेहूं तथा धान व अन्य फसल करके कभी नहीं कमाया जा सकता।

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मिल रहा 40 से 60 फीसदी तक अनुदान
प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत पात्र लोगों में से सामान्य श्रेणी के लाभार्थियों को परियोजना लागत का 40 प्रतिशत अनुदान मिलता है। वहीं महिला तथा अनुसूचित जाति वर्ग के लाभार्थियों को परियोजना लागत का 60 प्रतिशत अनुदान दिया जाता है। वहीं मुख्यमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत ग्राम पंचायत स्तर पर ग्राम समाज के तालाब का पट्टा लेने वालों को मछली पालन के लिए प्रथम वर्ष निवेश पर अनुदान मिलता है। 4 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर की लागत पर हर वर्ग के लोगों को 40 प्रतिशत का अनुदान मिलता है।

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इन मछलियों का किया जाता है पालन
इन परियोजनाओं के तहत मछली पालक किसान कार्प मछलियों का ही पालन कर सकते हैं। जिनमें प्रमुख रूप से रोहू, कतला, नैन, सिल्वर कार्प, ग्रास कार्प, पंगेसियस, अमूरकार्प आदि मछलियां शामिल हैं। इनसे किसान परंपरागत खेती की तुलना में दोगुना लाभ कमा रहे हैं।

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मछली पालन करने से किसान खुश
मत्स्य निरीक्षक अनुज कुमार चौहान का कहना है कि जिले के किसान मछली पालन के लिए सरकार की तरफ से दी जा रही कई योजनाओं का लाभ उठा रहे हैं। मछली पालन करने से किसान काफी खुश हैं। परंपरागत खेती की अपेक्षा इसमें दोगुना लाभ होता है।

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बोले मछली पालक
मानपुरा निवासी विनोद कुमार सिंह ने बताया कि परंपरागत खेती करने में समय के साथ ही लागत भी अधिक लगती है। जिसकी वजह से उसे छोड़कर अब मछली पालन कर रहे हैं। इससे अधिक लाभ हो रहा है। वर्तमान में 2 बीघा के तालाब में मछली पालन किया है। जिसकी लागत लगभग 9 लाख रुपये आई है। कई तरह की मछली हैं। 4 से 5 माह में लागत का दोगुना लाभ प्राप्त हो जाता है। कोयला निवासी रुकम पाल सिंह ने बताया कि 5 बीघा में मछली पालन किया है। जिसकी लागत लगभग 6.5 लाख रुपये प्रतिवर्ष आती है। एक ही तरह की मछली हैं। वहीं मुनाफे की बात करें तो 3 लाख रुपये प्रतिवर्ष का लाभ होता है। जो कि सालभर की जाने वाली परंपरागत खेती से काफी ज्यादा है। वहीं मछली का आपूर्ति एटा, अलीगंज व अन्य नजदीकी शहरों में आसानी से हो जाती है। 
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