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Etah News: 35 वर्षों से 25 वार्डों में ही सिमटी है नगर पालिका
Sat, 23 Sep 2023 11:19 PM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
Updated Sat, 23 Sep 2023 11:19 PM IST
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एटा। नगर पालिका परिषद एटा का गठन 1966 में हुआ था। उस समय पालिका में 7 वार्ड थे। सभासदों के द्वारा ही पालिकाध्यक्ष को चुना जाता था। फिर 1971 के बाद 1988 में चुनाव हुआ तब जनता ने पालिकाध्यक्ष को चुना। उस समय नगर पालिका में कुल 25 वार्ड थे। जो आज भी 25 ही हैं। शहर काफी फैल चुका है, लेकिन नगर पालिका का सीमा विस्तार नहीं हो सका है। जिसकी वजह से लोगों को जरूरी सुविधाओं के लिए तरसना पड़ रहा है।
नगर पालिका का सीमा विस्तार न हो पाने के कारण शहर से सटे हुए क्षेत्रों में विकास नहीं हो पा रहा है। इन क्षेत्रों की गलियों में कीचड़ तथा जलभराव के अलावा पेयजल की भी बड़ी समस्या है। सड़कें जर्जर हैं। आबादी के लिहाज से कई गांव तो बिल्कुल शहर के अंदर ही आ गए हैं लेकिन वहां अभी तक ग्राम प्रधान का ही चुनाव होता है। जिसकी वजह से इतना बजट नहीं आ पाता कि वहां समुचित तरीके से विकास हो सके। सीमा विस्तार के लिए कई बार कवायद छिड़ी लेकिन कामयाबी नहीं मिल सकी। शहरी क्षेत्र का भौगोलिक दायरा तेजी से बढ़कर लगभग तीन गुना हो गया। नगर पालिका को अभी भी अपनी सीमा के विस्तार का इंतजार है।
आसपास के ये क्षेत्र आ गए शहर के अंदर
नगर पालिका से सटे कई इलाके ऐसे हैं जो बिल्कुल शहर में तब्दील हो गए हैं। रानी अबंतीबाई नगर, आनंदपुरम्, भगीपुर, उद्देतपुर, गंगनपुर, प्रथम नगर, चमकरी, नगला केवल, असरौली, दूल्हापुर, चौथा मील, विरामपुर, रारपट्टी, ककैरा, रामपुर घनश्याम, शीतलपुर, रामेश्वर सिंह पुरम्, गोशाला, मानपुर, चिलासनी, कुनावली, हीरापुर, घिलौआ, चौंचा वनगांव आदि क्षेत्र अब शहर का अहम हिस्सा बन गए हैं। यहां नई कॉलोनियां बन रहीं हैं। इसके बाद भी यहां के लोग पालिका की सीमा के विस्तार का इंतजार कर रहे हैं।
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सीमित संसाधनों में काम होना मुश्किल बीते कुछ साल में शहर का विस्तार तेजी से हुआ है। लेकिन पालिका का सीमा विस्तार न होने से वहां सरकारी काम नहीं हो पाते हैं। ग्राम पंचायतों के सीमित संसाधन में काम होना भी मुश्किल है। - ओमकार सिंह, हाजीपुरा
शहर की आबादी लगातार बढ़ रही है। जमीन की उपलब्धता के अभाव में लोग सीमाओं से सटे इलाकों में बस रहे हैं। ऐसे में लोगों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए सीमा विस्तार जरूरी है। - आदित्य कुमार, नगला भजा
शहर को सीमा विस्तार की जरूरत है। अभी इस संबंध में कोई प्रस्ताव तैयार नहीं किया गया है। इस पर विचार किया जा रहा है। जल्द इस संबंध में कार्य किया जाएगा।- सुधा गुप्ता, पालिकाध्यक्ष
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नगर पालिका का सीमा विस्तार न हो पाने के कारण शहर से सटे हुए क्षेत्रों में विकास नहीं हो पा रहा है। इन क्षेत्रों की गलियों में कीचड़ तथा जलभराव के अलावा पेयजल की भी बड़ी समस्या है। सड़कें जर्जर हैं। आबादी के लिहाज से कई गांव तो बिल्कुल शहर के अंदर ही आ गए हैं लेकिन वहां अभी तक ग्राम प्रधान का ही चुनाव होता है। जिसकी वजह से इतना बजट नहीं आ पाता कि वहां समुचित तरीके से विकास हो सके। सीमा विस्तार के लिए कई बार कवायद छिड़ी लेकिन कामयाबी नहीं मिल सकी। शहरी क्षेत्र का भौगोलिक दायरा तेजी से बढ़कर लगभग तीन गुना हो गया। नगर पालिका को अभी भी अपनी सीमा के विस्तार का इंतजार है।
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आसपास के ये क्षेत्र आ गए शहर के अंदर
नगर पालिका से सटे कई इलाके ऐसे हैं जो बिल्कुल शहर में तब्दील हो गए हैं। रानी अबंतीबाई नगर, आनंदपुरम्, भगीपुर, उद्देतपुर, गंगनपुर, प्रथम नगर, चमकरी, नगला केवल, असरौली, दूल्हापुर, चौथा मील, विरामपुर, रारपट्टी, ककैरा, रामपुर घनश्याम, शीतलपुर, रामेश्वर सिंह पुरम्, गोशाला, मानपुर, चिलासनी, कुनावली, हीरापुर, घिलौआ, चौंचा वनगांव आदि क्षेत्र अब शहर का अहम हिस्सा बन गए हैं। यहां नई कॉलोनियां बन रहीं हैं। इसके बाद भी यहां के लोग पालिका की सीमा के विस्तार का इंतजार कर रहे हैं।
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सीमित संसाधनों में काम होना मुश्किल बीते कुछ साल में शहर का विस्तार तेजी से हुआ है। लेकिन पालिका का सीमा विस्तार न होने से वहां सरकारी काम नहीं हो पाते हैं। ग्राम पंचायतों के सीमित संसाधन में काम होना भी मुश्किल है। - ओमकार सिंह, हाजीपुरा
शहर की आबादी लगातार बढ़ रही है। जमीन की उपलब्धता के अभाव में लोग सीमाओं से सटे इलाकों में बस रहे हैं। ऐसे में लोगों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए सीमा विस्तार जरूरी है। - आदित्य कुमार, नगला भजा
शहर को सीमा विस्तार की जरूरत है। अभी इस संबंध में कोई प्रस्ताव तैयार नहीं किया गया है। इस पर विचार किया जा रहा है। जल्द इस संबंध में कार्य किया जाएगा।- सुधा गुप्ता, पालिकाध्यक्ष