{"_id":"cffea2ce6a6912184ef6152c51b95172","slug":"the-lord-s-anointed-rock-panduk-1008-klson-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"पांडुकशिला पर 1008 कलशों से भगवान का अभिषेक ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पांडुकशिला पर 1008 कलशों से भगवान का अभिषेक
अमर उजाला ब्यूरो एटा
Updated Sat, 27 Feb 2016 11:13 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कासगंज रोड स्थित वीर विमल अहिंसा क्षेत्र में चल रहे पंचकल्याणक महोत्सव में शनिवार को जन्म कल्याणक मनाया गया। कार्यक्रम में इंद्र और इंद्राणियों ने कुंडलपुर नगरी में रत्नों की वृष्टि करते हुए जन्म की खुशियां मनाईं। इंद्रों ने पांडुकशिला पर बालक महावीर का 1008 कलश से अभिषेक किया।
पंच कल्याण महोत्सव के तीसरे दिन शनिवार सुबह जिनेंद्र भगवान के अभिषेक पूजन के बाद जन्म कल्याणक की क्त्रिस्याएं संपन्न हुईं। आचार्य सुंदर सागर महाराज ने कहा कि तीर्थंकर बालक के गर्भ में आते ही कुंडलपुर नगरी में इंद्र रत्नों की वर्षा की थी। उन्होंने कहा कि तीर्थंकर बालक जन्म से ही इतना तेजस्वी और प्रतापी होते हैं कि 1008 कलश से अभिषेक होने पर उनको कष्ट नहीं होता। मुनि प्रमुख सागर महाराज ने कहा कि तीर्थंकर के जन्म के समय खुशियां मनाई जाती हैं। लेकिन बदलते दौर में जन्मदिन का अर्थ ही बदल गया है। लोग अपने बच्चों के जन्मदिन पर केक काटते हैं और मोमबत्तियां बुझा कर बर्थडे मनाते हैं। यह हमारी संस्कृति नहीं है। हमे बच्चे का बर्थडे नहीं मनाना है, बल्कि जन्मदिन पर दीप जला कर जीवन हमेशा प्रकाशमान रहने की कामना करनी है। बालक से मंदिर में पूजा कराएं। क्षुल्लक समर्पण सागर महाराज ने जन्म कल्याणक का महत्व बताया। इसके बाद वीर विमल क्षेत्र कुंडलपुर नगरी से जन्माभिषेक शोभायात्रा निकाली गई। शोभायात्रा कासगंज रोड पीएसीए राम सिटी होती हुई वीर विमल क्षेत्र बनी पांडुकशिला पर संपन्न हुआ। जहां बालक महावीर के प्रथम अभिषेक करने का सौभाग्य महेंद्र जैन जलेसर, नरेंद्र जैन और प्रदुम्न कुमार जैन, सौधर्म इंद्र सर्वेश जैन पीयूष जैन को मिला। दोपहर में बधाई गीत कार्यक्त्रस्म आयोजित हुआ। जिसमें श्रावकों ने माता त्रिशला को प्रभु के जन्म की बधाई दी। जबकि तीर्थकर भगवान की बुआ बनने का सौभाग्य पारुल जैन को मिला। रात को पालना झुलाने का कार्यक्त्रस्म आयोजित हुआ। श्रावकों ने बालक महावीर को पालना झुलाया और धार्मिक गीतों पर जमकर झूमे।
कार्यक्त्रस्म में अनिल, उमेश, अशोक, सुरेश जैन समेत अनेक लोग शिकरत करने पहुचे। पंचकल्याणक महोत्सव के पांचवे दिन आज रविवार को तप कल्याणक महोत्सव का आयोजन होगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
पंच कल्याण महोत्सव के तीसरे दिन शनिवार सुबह जिनेंद्र भगवान के अभिषेक पूजन के बाद जन्म कल्याणक की क्त्रिस्याएं संपन्न हुईं। आचार्य सुंदर सागर महाराज ने कहा कि तीर्थंकर बालक के गर्भ में आते ही कुंडलपुर नगरी में इंद्र रत्नों की वर्षा की थी। उन्होंने कहा कि तीर्थंकर बालक जन्म से ही इतना तेजस्वी और प्रतापी होते हैं कि 1008 कलश से अभिषेक होने पर उनको कष्ट नहीं होता। मुनि प्रमुख सागर महाराज ने कहा कि तीर्थंकर के जन्म के समय खुशियां मनाई जाती हैं। लेकिन बदलते दौर में जन्मदिन का अर्थ ही बदल गया है। लोग अपने बच्चों के जन्मदिन पर केक काटते हैं और मोमबत्तियां बुझा कर बर्थडे मनाते हैं। यह हमारी संस्कृति नहीं है। हमे बच्चे का बर्थडे नहीं मनाना है, बल्कि जन्मदिन पर दीप जला कर जीवन हमेशा प्रकाशमान रहने की कामना करनी है। बालक से मंदिर में पूजा कराएं। क्षुल्लक समर्पण सागर महाराज ने जन्म कल्याणक का महत्व बताया। इसके बाद वीर विमल क्षेत्र कुंडलपुर नगरी से जन्माभिषेक शोभायात्रा निकाली गई। शोभायात्रा कासगंज रोड पीएसीए राम सिटी होती हुई वीर विमल क्षेत्र बनी पांडुकशिला पर संपन्न हुआ। जहां बालक महावीर के प्रथम अभिषेक करने का सौभाग्य महेंद्र जैन जलेसर, नरेंद्र जैन और प्रदुम्न कुमार जैन, सौधर्म इंद्र सर्वेश जैन पीयूष जैन को मिला। दोपहर में बधाई गीत कार्यक्त्रस्म आयोजित हुआ। जिसमें श्रावकों ने माता त्रिशला को प्रभु के जन्म की बधाई दी। जबकि तीर्थकर भगवान की बुआ बनने का सौभाग्य पारुल जैन को मिला। रात को पालना झुलाने का कार्यक्त्रस्म आयोजित हुआ। श्रावकों ने बालक महावीर को पालना झुलाया और धार्मिक गीतों पर जमकर झूमे।
विज्ञापन
कार्यक्त्रस्म में अनिल, उमेश, अशोक, सुरेश जैन समेत अनेक लोग शिकरत करने पहुचे। पंचकल्याणक महोत्सव के पांचवे दिन आज रविवार को तप कल्याणक महोत्सव का आयोजन होगा।
विज्ञापन