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Etah News: व्हाट्सएप ग्रुप से रोडवेज बसों में गड़बड़ी का खेल
Mon, 27 May 2024 11:23 PM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
Updated Mon, 27 May 2024 11:23 PM IST
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एटा। तकनीक का फायदा उठाकर परिवहन निगम के कर्मचारी मौज कर रहे हैं। भाजपा, वृंदावन जैसे नामों से व्हाट्सग्रुप बनाकर चेकिंग टीमों की लोकेशन की सूचनाएं आपस में साझा की जा रही हैं। जिससे निगम की जांच टीमें खाली हाथ रह जाती हैं और गड़बड़ी का खेल चलता रहता है।आमतौर पर परिवहन निगम द्वारा बसों में टिकट की गड़बड़ियों को पकड़ने के लिए आकस्मिक रूप से अलग-अलग रूटों पर चेकिंग कराई जाती है। जांच टीमें बस को रोककर यात्री संख्या, बने हुए टिकट आदि की गणना करती हैं। टिकट पूरे न पाए जाने पर कार्रवाई की जाती है। इसी जांच की काट के लिए अलीगढ़ परिक्षेत्र के परिचालकों ने व्हाट्सग्रुप बना लिए हैं, जिनमें 400 से अधिक कर्मचारी जुड़े हुए हैं।
किसी रूट पर चेकिंग के दौरान तुरंत ही बस का परिचालक ग्रुप में इसकी सूचना पोस्ट कर देता है। जिससे अन्य परिचालक सतर्क हो जाते हैं और टिकट संबंधी गड़बड़ी को दुरुस्त कर लिया जाता है। ऐसे में जांच टीमों को बसाें में गड़बड़ी नहीं मिलती है। जबकि चेकिंग न होने पर टिकट की गड़बड़ी कर परिचालकों संग चालक भी अवैध कमाई में हिस्सेदार हो जाते हैं।
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ऐसे होता है खेल
टिकट बनाते समय परिचालक दो-चार यात्रियों से रुपये तो ले लेते हैं, लेकिन टिकट बनाने में उन्हें टालते रहते हैं। टिकट न लेने पर सस्ती यात्रा का लालच भी दिया जाता है। जांच टीम नहीं आती है तो इन यात्रियों द्वारा दिए गए रुपये निगम के खाते में न जाकर परिचालकों की जेब का वजन बढ़ाते हैं।
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इसे लेकर विभागीय लोगों को जांच के दौरान परिचालकों के मोबाइल चेक करने के भी निर्देश दिए गए हैं। व्हाट्सग्रुप पर चेकिंग टीमों की सूचनाओं के आदान-प्रदान का अभी कोई मामला पकड़ में नहीं आया है।
-सतेंद्र कुमार, क्षेत्रीय प्रबंधक अलीगढ़
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किसी रूट पर चेकिंग के दौरान तुरंत ही बस का परिचालक ग्रुप में इसकी सूचना पोस्ट कर देता है। जिससे अन्य परिचालक सतर्क हो जाते हैं और टिकट संबंधी गड़बड़ी को दुरुस्त कर लिया जाता है। ऐसे में जांच टीमों को बसाें में गड़बड़ी नहीं मिलती है। जबकि चेकिंग न होने पर टिकट की गड़बड़ी कर परिचालकों संग चालक भी अवैध कमाई में हिस्सेदार हो जाते हैं।
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ऐसे होता है खेल
टिकट बनाते समय परिचालक दो-चार यात्रियों से रुपये तो ले लेते हैं, लेकिन टिकट बनाने में उन्हें टालते रहते हैं। टिकट न लेने पर सस्ती यात्रा का लालच भी दिया जाता है। जांच टीम नहीं आती है तो इन यात्रियों द्वारा दिए गए रुपये निगम के खाते में न जाकर परिचालकों की जेब का वजन बढ़ाते हैं।
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इसे लेकर विभागीय लोगों को जांच के दौरान परिचालकों के मोबाइल चेक करने के भी निर्देश दिए गए हैं। व्हाट्सग्रुप पर चेकिंग टीमों की सूचनाओं के आदान-प्रदान का अभी कोई मामला पकड़ में नहीं आया है।
-सतेंद्र कुमार, क्षेत्रीय प्रबंधक अलीगढ़