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निगम की 111 बसों के सहारे 18 लाख की आबादी
ब्यूरो अमर उजाला, एटा
Updated Sat, 23 May 2015 11:42 PM IST
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सहालग और गर्मी की छुट्टियों के चलते लोग शहर से बाहर जा रहे हैं कोई घूमने तो कोई रिश्तेदारों के घर जाने की प्लानिंग कर चुका है लेकिन उन्हें यातायात सेवाएं नहीं मिल पा रही हैं। वाहनों की कमी से जूझ रहे यात्रियों को रोडवेज तो दूर निजी बसें भी नहीं मिल पा रही हैं। मात्र 111 बसें ही शहर में संचालित हैं। ऐसे में शहर के बस स्टैंड पर सुबह से शाम तक यात्रियों की भीड़ रहती है। इन दिनों 30 प्रतिशत तक यात्रियों की संख्या बढ़ गई है।
18 लाख आबादी वाले जिले में यातायात सुविधाओं का अभाव है। बढ़े यात्रियों के चलते बसों और स्टाफ की कमी व्यवस्थाओं में आड़े आ रही है। हर दिन हजारों यात्री निकल रहे हैं लेकिन उन्हें सेवाएं सुचारु नहीं मिल रही हैं। कुछ मार्गो के लिए तो उन्हें घंटों इंतजार करना पड़ता है। ऐसे में सुबह से शाम तक शहर के बस स्टेंड पर यात्रियों की भीड़ देखी जा रही है।
रोज 22 हजार यात्री कर रहे यात्रा
विभागीय अभिलेखों के अनुसार इन दिनों स्थानीय डिपो की बसें कई मार्गों पर 20-22 हजार यात्रियों को सेवाएं दे रही हैं। बस स्टैंड से प्रतिदिन 14 से 15 हजार सवारियां निकल रही हैं। इनमें 10 हजार से अधिक स्थानीय डिपो की बसों और शेष अन्य डिपो की बसें ले रही हैं।
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बसों का ही नहीं स्टाफ का टोटा
डिपो में बसों के साथ ही स्टाफ का भी टोटा है। 18 लाख की आबादी वाले जिले में सालों बाद भी यहां बसों की संख्या 147 ही है, तो वहीं चालकों परिचालकों की कमी से सेवाएं बाधित हो रही हैं। डिपो में संचालित बसों के लिए तीन दर्जन से अधिक चालक परिचालकों की कमी है। इसकी मांग निगम से की जा चुकी है।
4.03 करोड़ का लाभ
बसों-स्टाफ की कमी से जूझ रहा डिपो कमाई में रिकार्ड बना रहा है। सीमित साधनों के बाद भी वित्तीय वर्ष में 52 करोड़ 79 लाख 21 हजार रुपये की कमाई की। जिसमें शुद्ध लाभ बढ़कर चार करोड़ तीन लाख से अधिक रहा। जो गत वर्ष की तुलना में 1.19 करोड़ रुपये से अधिक है। इतना ही नहीं गत वर्ष की तुलना में लोड फैक्टर भी बढ़कर 73 हो गया।
डिपो में कुल निगम की बसें-111
कुल अनुबंधित बसें-36
चालकों की कमी-15
परिचालकों की कमी-20
चालकों-परिचालकों के अवकाश और अनुपस्थिति के चलते सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। बेहतर व्यवस्थाओं के लिए 15 चालकों और 20 परिचालकों की मांग की गई है। सत्यापन प्रक्रिया पूरी होते ही इतना स्टाफ मिलने की उम्मीद है।
- जीव यादव, एआरएम
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18 लाख आबादी वाले जिले में यातायात सुविधाओं का अभाव है। बढ़े यात्रियों के चलते बसों और स्टाफ की कमी व्यवस्थाओं में आड़े आ रही है। हर दिन हजारों यात्री निकल रहे हैं लेकिन उन्हें सेवाएं सुचारु नहीं मिल रही हैं। कुछ मार्गो के लिए तो उन्हें घंटों इंतजार करना पड़ता है। ऐसे में सुबह से शाम तक शहर के बस स्टेंड पर यात्रियों की भीड़ देखी जा रही है।
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रोज 22 हजार यात्री कर रहे यात्रा
विभागीय अभिलेखों के अनुसार इन दिनों स्थानीय डिपो की बसें कई मार्गों पर 20-22 हजार यात्रियों को सेवाएं दे रही हैं। बस स्टैंड से प्रतिदिन 14 से 15 हजार सवारियां निकल रही हैं। इनमें 10 हजार से अधिक स्थानीय डिपो की बसों और शेष अन्य डिपो की बसें ले रही हैं।
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बसों का ही नहीं स्टाफ का टोटा
डिपो में बसों के साथ ही स्टाफ का भी टोटा है। 18 लाख की आबादी वाले जिले में सालों बाद भी यहां बसों की संख्या 147 ही है, तो वहीं चालकों परिचालकों की कमी से सेवाएं बाधित हो रही हैं। डिपो में संचालित बसों के लिए तीन दर्जन से अधिक चालक परिचालकों की कमी है। इसकी मांग निगम से की जा चुकी है।
4.03 करोड़ का लाभ
बसों-स्टाफ की कमी से जूझ रहा डिपो कमाई में रिकार्ड बना रहा है। सीमित साधनों के बाद भी वित्तीय वर्ष में 52 करोड़ 79 लाख 21 हजार रुपये की कमाई की। जिसमें शुद्ध लाभ बढ़कर चार करोड़ तीन लाख से अधिक रहा। जो गत वर्ष की तुलना में 1.19 करोड़ रुपये से अधिक है। इतना ही नहीं गत वर्ष की तुलना में लोड फैक्टर भी बढ़कर 73 हो गया।
डिपो में कुल निगम की बसें-111
कुल अनुबंधित बसें-36
चालकों की कमी-15
परिचालकों की कमी-20
चालकों-परिचालकों के अवकाश और अनुपस्थिति के चलते सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। बेहतर व्यवस्थाओं के लिए 15 चालकों और 20 परिचालकों की मांग की गई है। सत्यापन प्रक्रिया पूरी होते ही इतना स्टाफ मिलने की उम्मीद है।
- जीव यादव, एआरएम