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परिषदीय विद्यालयों में मनमानी, जानलेवा बना दिया पीने का पानी
सार
परिषदीय विद्यालयों में शासन की ओर से तय किए गए मिशन कायाकल्प के पैरामीटरों को पूरा करने की होड़ में हैंडपंपों को खतरनाक बना दिया गया है।कई जगह इनमें सबमर्सिबल पंप लगा दिया गया है।शिक्षा विभाग और प्रधानों की सांठगांठ के चलते पहले से मौजूद हैंडपंपों में ही सबमर्सिबल पंपों को लगा दिया गया है।
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विस्तार
एटा। परिषदीय विद्यालयों में शासन की ओर से तय किए गए मिशन कायाकल्प के पैरामीटरों को पूरा करने की होड़ में हैंडपंपों को खतरनाक बना दिया गया है। कई जगह इनमें सबमर्सिबल पंप लगा दिया गया है। जिम्मेदारों की मनमानी के चलते पीने का पानी बच्चों के लिए जानलेवा बन सकता है। अवागढ़ क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय चिरावली में बच्चों के साथ बड़ा होने से टल गया, लेकिन यह लापरवाही कहीं भी भारी पड़ सकती है।
परिषदीय विद्यालयों में 19 पैरामीटर को पूरा करना है। इसमें शौचालय में पानी की व्यवस्था भी शामिल है। यह तभी संभव है जब सबमर्सिबल पंप लगा हो, लेकिन इसके लिए अलग बोरिंग नहीं कराई गई। शिक्षा विभाग और प्रधानों की सांठगांठ के चलते पहले से मौजूद हैंडपंपों में ही सबमर्सिबल पंपों को लगा दिया गया है। इन्हीं हैंडपंपों को चलाकर बच्चे पानी पीते हैं। इनमें करंट आने की आशंका बनी रहती है। बृहस्पतिवार को अमर उजाला टीम ने पड़ताल की तो जिले के कई विद्यालयों में हैंडपंपों में ही सबमर्सिबल पंप पड़ी मिलीं।
प्राथमिक विद्यालय सहसपुर में हैंडपंप लगा हुआ है, इसी में सबमर्सिबल पंप लगा दिया गया है। बच्चे इसी हैंडपंप से पानी पीते हैं। इसमें कब करंट आ जाए, कुछ कहा नहीं जा सकता। बच्चों को खतरे का अंदाजा तक नहीं है और वह हैंडपंप पर सामान्य रूप से ही पानी भरते हैं और आसपास खेलते भी हैं।
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ब्लॉक शीतलपुर क्षेत्र के गांव कुनैठा स्थित प्राथमिक विद्यालय में पहले से हैंडपंप लगा हुआ था। यहां पर भी कायाकल्प के पैरामीटर पूरे करने के लिए हैंडपंप में ही सबमर्सिबल पंप लगा दी गई है। इससे ही बच्चे पानी पीते हैं। अगर किसी तरह से करंट दौड़ जाए तो बच्चों की जान खतरे में आ सकती है।
ऑपरेशन कायाकल्प में एक पैरामीटर में सबमर्सिबल पंप भी शामिल है। ग्राम पंचायतों के सहयोग से इसे पूरा किया गया है। हैंडपंपों में सबमर्सिबल डालना उचित नहीं है, लेकिन ग्राम पंचायतों की ओर से ऐसा किया गया है। इसकी वजह से परेशानियां सामने आ रही हैं। - संजय सिंह, बीएसए
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परिषदीय विद्यालयों में 19 पैरामीटर को पूरा करना है। इसमें शौचालय में पानी की व्यवस्था भी शामिल है। यह तभी संभव है जब सबमर्सिबल पंप लगा हो, लेकिन इसके लिए अलग बोरिंग नहीं कराई गई। शिक्षा विभाग और प्रधानों की सांठगांठ के चलते पहले से मौजूद हैंडपंपों में ही सबमर्सिबल पंपों को लगा दिया गया है। इन्हीं हैंडपंपों को चलाकर बच्चे पानी पीते हैं। इनमें करंट आने की आशंका बनी रहती है। बृहस्पतिवार को अमर उजाला टीम ने पड़ताल की तो जिले के कई विद्यालयों में हैंडपंपों में ही सबमर्सिबल पंप पड़ी मिलीं।
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प्राथमिक विद्यालय सहसपुर में हैंडपंप लगा हुआ है, इसी में सबमर्सिबल पंप लगा दिया गया है। बच्चे इसी हैंडपंप से पानी पीते हैं। इसमें कब करंट आ जाए, कुछ कहा नहीं जा सकता। बच्चों को खतरे का अंदाजा तक नहीं है और वह हैंडपंप पर सामान्य रूप से ही पानी भरते हैं और आसपास खेलते भी हैं।
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ब्लॉक शीतलपुर क्षेत्र के गांव कुनैठा स्थित प्राथमिक विद्यालय में पहले से हैंडपंप लगा हुआ था। यहां पर भी कायाकल्प के पैरामीटर पूरे करने के लिए हैंडपंप में ही सबमर्सिबल पंप लगा दी गई है। इससे ही बच्चे पानी पीते हैं। अगर किसी तरह से करंट दौड़ जाए तो बच्चों की जान खतरे में आ सकती है।
ऑपरेशन कायाकल्प में एक पैरामीटर में सबमर्सिबल पंप भी शामिल है। ग्राम पंचायतों के सहयोग से इसे पूरा किया गया है। हैंडपंपों में सबमर्सिबल डालना उचित नहीं है, लेकिन ग्राम पंचायतों की ओर से ऐसा किया गया है। इसकी वजह से परेशानियां सामने आ रही हैं। - संजय सिंह, बीएसए