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नक्सली हमले में शहीद हुआ जैथरा का लाल
अमर उजाला ब्यूरो, जैथरा (एटा)
Updated Tue, 25 Apr 2017 09:45 PM IST
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किशनपाल सिंह
- फोटो : अमर उजाला
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छत्तीसगढ़ के सुकमा में हुए नक्सली हमले में शहीद हुए सीआरपीएफ जवानों में जैथरा निवासी किशनपाल (45) भी शामिल हैं। उनका पार्थिव शरीर बुधवार तड़के उनके पैतृक गांव नगला डांढी पहुंचेगा। प्रदेश के कैबिनेट मंत्री प्रोफेसर एसपी सिंह बघेल और राज्य मंत्री अतुल गर्ग भी उनके अंतिम संस्कार में शामिल होंगे और प्रदेश सरकार की ओर से राहत राशि का चेक सौंपेंगे।
शहीद सीआरपीएफ जवान किशनपाल के भाई चंद्रपाल ने बताया कि शहीद किशनपाल ने फोन पर 18 अप्रैल को छुट्टी पर आने की सूचना दी थी, लेकिन इलाके में नक्सली गतिविधयां बढ़ने के कारण छुट्टी रद्द हो गई थी। सोमवार को किशनपाल के नक्सली हमले में शहीद होने की सूचना सीआरपीएफ मुख्यालय से मिली तो पत्नी, पिता, भाइयों में कोहराम मच गया। गांव में मातम पसर गया है और आसपास के ग्रामीणों का शहीद के परिवार को सांत्वना देने के लिए तांता लगा है।
परिवार में पांच भाइयों चंद्रपाल, रामपाल, देवेंद्र, राजाराम और दो बहनों सताना देवी ओर रामलली में किशनलाल दूसरे नंबर पर थे। वे बीते नवंबर में गांव आए थे। वर्ष 1992 में रामपुर जिले से भर्ती होने के बाद किशनपाल पिछले चार साल से छत्तीसगढ़ प्रांत कुसमा में सीआरपीएफ की 74 बटालियन में मुख्य आरक्षी के पद पर तैनात रहे। सीआरपीएफ ज्वाइन करने से पहले उनका विवाह नयागांव थाना क्षेत्र के नगला गंजी निवासी सरोज से हुआ था लेकिन कोई औलाद नहीं हुई। उनकी पत्नी सरोज गांव में उनके पिता रनवीर सिंह (85) और परिवार में रहती है।
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शहीद सीआरपीएफ जवान किशनपाल के भाई चंद्रपाल ने बताया कि शहीद किशनपाल ने फोन पर 18 अप्रैल को छुट्टी पर आने की सूचना दी थी, लेकिन इलाके में नक्सली गतिविधयां बढ़ने के कारण छुट्टी रद्द हो गई थी। सोमवार को किशनपाल के नक्सली हमले में शहीद होने की सूचना सीआरपीएफ मुख्यालय से मिली तो पत्नी, पिता, भाइयों में कोहराम मच गया। गांव में मातम पसर गया है और आसपास के ग्रामीणों का शहीद के परिवार को सांत्वना देने के लिए तांता लगा है।
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परिवार में पांच भाइयों चंद्रपाल, रामपाल, देवेंद्र, राजाराम और दो बहनों सताना देवी ओर रामलली में किशनलाल दूसरे नंबर पर थे। वे बीते नवंबर में गांव आए थे। वर्ष 1992 में रामपुर जिले से भर्ती होने के बाद किशनपाल पिछले चार साल से छत्तीसगढ़ प्रांत कुसमा में सीआरपीएफ की 74 बटालियन में मुख्य आरक्षी के पद पर तैनात रहे। सीआरपीएफ ज्वाइन करने से पहले उनका विवाह नयागांव थाना क्षेत्र के नगला गंजी निवासी सरोज से हुआ था लेकिन कोई औलाद नहीं हुई। उनकी पत्नी सरोज गांव में उनके पिता रनवीर सिंह (85) और परिवार में रहती है।
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