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Etah News: पुत्र ने मुढ़वाए बाल, रविवार को प्रार्थना सभा
Tue, 08 Oct 2024 11:04 PM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
Updated Tue, 08 Oct 2024 11:04 PM IST
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एटा। जैथरा कस्बा के समीप गांव तिगरा भमोरा में एक वृद्ध की मौत के बाद पत्नी ने सोमवार को ईसाई धर्म के अनुसार अंतिम संस्कार कराया। जबकि पुत्र ने मंगलवार को हिंदू धर्म के अनुसार बाल मुढ़वाए। अब रविवार को फिर ईसाई धर्म के अनुरूप प्रार्थना सभा कराई जाएगी।
रामप्रकाश की मौत के बाद उनकी पत्नी रेखा देवी का कहना है कि हम लोगों ने ईसाई धर्म स्वीकार कर लिया है। इसके अनुसार ही सारे कार्य करेंगे। रेखा की जिद पर ही सोमवर को रामप्रकाश के शव को दफन किया गया। मंगलवार को उनके पुत्र जितेंद्र शाक्य ने सिर का मुंडन कराया। जितेंद्र का कहना है कि ईसाई धर्म स्वीकार नहीं किया है, लेकिन अपनी मां की भावना को देखते हुए परंपरा निभा रहे हैं। हम लोग रविवार को ईसाई धर्म के अनुपालन में पिता के लिए केवल प्रार्थना सभा का आयोजन करेंगे।
जितेंद्र ने कहा कि माता-पिता को बहकाकर किसी ने ईसाई धर्म स्वीकार तो करा दिया, लेकिन कोई प्रमाणपत्र नहीं दिया। यही कारण है कि हम लोग दुविधा से जूझ रहे हैं। लोगों ने बताया कि राम प्रकाश की मौत होने के बाद रेखा ने सुहाग के प्रतीक बिछिया भी नहीं उतारे। रामप्रकाश के धर्म परिवर्तन से गांव के शाक्य समाज के चार खानदानों में लोग भी असमंजस की स्थिति में हैं। बेहद कम लोग ही सांत्वना देने जितेंद्र के घर पहुंचे।
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रामप्रकाश की मौत के बाद उनकी पत्नी रेखा देवी का कहना है कि हम लोगों ने ईसाई धर्म स्वीकार कर लिया है। इसके अनुसार ही सारे कार्य करेंगे। रेखा की जिद पर ही सोमवर को रामप्रकाश के शव को दफन किया गया। मंगलवार को उनके पुत्र जितेंद्र शाक्य ने सिर का मुंडन कराया। जितेंद्र का कहना है कि ईसाई धर्म स्वीकार नहीं किया है, लेकिन अपनी मां की भावना को देखते हुए परंपरा निभा रहे हैं। हम लोग रविवार को ईसाई धर्म के अनुपालन में पिता के लिए केवल प्रार्थना सभा का आयोजन करेंगे।
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जितेंद्र ने कहा कि माता-पिता को बहकाकर किसी ने ईसाई धर्म स्वीकार तो करा दिया, लेकिन कोई प्रमाणपत्र नहीं दिया। यही कारण है कि हम लोग दुविधा से जूझ रहे हैं। लोगों ने बताया कि राम प्रकाश की मौत होने के बाद रेखा ने सुहाग के प्रतीक बिछिया भी नहीं उतारे। रामप्रकाश के धर्म परिवर्तन से गांव के शाक्य समाज के चार खानदानों में लोग भी असमंजस की स्थिति में हैं। बेहद कम लोग ही सांत्वना देने जितेंद्र के घर पहुंचे।
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