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Etah News: प्लांट दिखावा...हर रोज ऑक्सीजन सिलिंडर पर 10 हजार का खर्चा
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मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी के पीछे लगा ऑक्सीजन प्लांट। संवाद
एटा। मेडिकल कॉलेज में तीन ऑक्सीजन प्लांट करोड़ों रुपये की लागत से कोरोना काल में स्थापित किए गए। इसके बावजूद नए अस्पताल भवन में मरीजों को जरूरत पड़ने पर सिलिंडर से ऑक्सीजन दी जा रही है। यह ऑक्सीजन अलीगढ़ से खरीदी जा रही है। इसे खरीदने के लिए मेडिकल कॉलेज को रोजाना 10 हजार रुपये से अधिक खर्च करने पड़ रहे हैं।
कोरोना काल के दौरान मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन की किल्लत हुई थी। बाद में यहां दो ऑक्सीजन प्लांट की स्थापना साल 2021 में हुई। दोनों प्लांट करोड़ों रुपये की लागत से बनकर तैयार हुए। एक प्लांट 833 एलपीएम (लीटर प्रति मिनट) क्षमता का है तो दूसरा 1000 एलपीएम का है। इनके अलावा तीसरा प्लांट तरल ऑक्सीजन का लगाया गया है। वर्तमान में तीन प्लांट होते हुए भी लोगों को इनसे ऑक्सीजन नहीं मिल पा रही है।
केवल इमरजेंसी और सिक न्यू बोर्न केयर यूनिट (एसएनसीयू) में ही इसकी आपूर्ति मिल पा रही है। अन्य सभी वार्डों में सिलिंडर का इस्तेमाल किया जा रहा है। ये सिलिंडर अलीगढ़ से मंगाए जा रहे हैं।
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छोटा सिलिंडर 105 एवं बड़ा 315 रुपये में खरीदा जा रहा
अलीगढ़ से बी टाइप यानी छोटा सिलिंडर 105 रुपये और बड़ा सिलिंडर 315 रुपये में भरकर आ रहा है। एक दिन में औसतन बड़े 15 और छोटे 10 सिलिंडर खर्च हो रहे हैं। जिनकी लागत करीब 10500 रुपये है।
4 दिन का रहता है सिलिंडर का स्टॉक
मेडिकल कॉलेज में वर्तमान में 4 दिनों के लिए सिलिंडर का स्टॉक रहता है। मेडिकल कॉलेज में करीब 50 ऑक्सीजन सिलिंडर स्टॉक में रखे हुए हैं जिन्हें जरूरत पड़ने पर इस्तेमाल किया जाता है।
5 मंजिल तक मरीज हो रहे भर्ती
नए भवन में 5वीं मंजिल तक मरीजों को भर्ती किया जाता है। यहां प्रथम व द्वितीय तल पर मरीजों को देखने की व्यवस्था है। तृतीय तल पर स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग है। चतुर्थ पर बर्न वार्ड सहित ओटी है। पांचवें तल पर मेडिसिन सहित बच्चा वार्ड संचालित है। जहां पर ऑक्सीजन की आवश्यकता पड़ती है।
वर्जन
एमसीएच विंग में लगे ऑक्सीजन प्लांट से नए भवन तक पाइप लाइन डाली जा रही है। इससे नए भवन के सभी वार्डों में ऑक्सीजन की सप्लाई हो सकेगी। करीब एक सप्ताह के अंदर ऑक्सीजन की आपूर्ति होने लगेगी। वहीं इमरजेंसी के पास लगे ऑक्सीजन प्लांट को भी स्थानांतरित किया जाएगा। -डॉ. सुरेश चंद्रा, सीएमएस
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कोरोना काल के दौरान मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन की किल्लत हुई थी। बाद में यहां दो ऑक्सीजन प्लांट की स्थापना साल 2021 में हुई। दोनों प्लांट करोड़ों रुपये की लागत से बनकर तैयार हुए। एक प्लांट 833 एलपीएम (लीटर प्रति मिनट) क्षमता का है तो दूसरा 1000 एलपीएम का है। इनके अलावा तीसरा प्लांट तरल ऑक्सीजन का लगाया गया है। वर्तमान में तीन प्लांट होते हुए भी लोगों को इनसे ऑक्सीजन नहीं मिल पा रही है।
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केवल इमरजेंसी और सिक न्यू बोर्न केयर यूनिट (एसएनसीयू) में ही इसकी आपूर्ति मिल पा रही है। अन्य सभी वार्डों में सिलिंडर का इस्तेमाल किया जा रहा है। ये सिलिंडर अलीगढ़ से मंगाए जा रहे हैं।
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छोटा सिलिंडर 105 एवं बड़ा 315 रुपये में खरीदा जा रहा
अलीगढ़ से बी टाइप यानी छोटा सिलिंडर 105 रुपये और बड़ा सिलिंडर 315 रुपये में भरकर आ रहा है। एक दिन में औसतन बड़े 15 और छोटे 10 सिलिंडर खर्च हो रहे हैं। जिनकी लागत करीब 10500 रुपये है।
4 दिन का रहता है सिलिंडर का स्टॉक
मेडिकल कॉलेज में वर्तमान में 4 दिनों के लिए सिलिंडर का स्टॉक रहता है। मेडिकल कॉलेज में करीब 50 ऑक्सीजन सिलिंडर स्टॉक में रखे हुए हैं जिन्हें जरूरत पड़ने पर इस्तेमाल किया जाता है।
5 मंजिल तक मरीज हो रहे भर्ती
नए भवन में 5वीं मंजिल तक मरीजों को भर्ती किया जाता है। यहां प्रथम व द्वितीय तल पर मरीजों को देखने की व्यवस्था है। तृतीय तल पर स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग है। चतुर्थ पर बर्न वार्ड सहित ओटी है। पांचवें तल पर मेडिसिन सहित बच्चा वार्ड संचालित है। जहां पर ऑक्सीजन की आवश्यकता पड़ती है।
वर्जन
एमसीएच विंग में लगे ऑक्सीजन प्लांट से नए भवन तक पाइप लाइन डाली जा रही है। इससे नए भवन के सभी वार्डों में ऑक्सीजन की सप्लाई हो सकेगी। करीब एक सप्ताह के अंदर ऑक्सीजन की आपूर्ति होने लगेगी। वहीं इमरजेंसी के पास लगे ऑक्सीजन प्लांट को भी स्थानांतरित किया जाएगा। -डॉ. सुरेश चंद्रा, सीएमएस