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शहीद सर्वेश के परिवार को इमदाद का इंतजार

Sun, 14 Aug 2016 10:33 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, एटा
अमर उजाला ब्यूरो, एटा Updated Sun, 14 Aug 2016 10:33 PM IST
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shaheed sarvesh ke parivaar ko imadaad ka intajaar
शहीद सर्वेश का परिवार - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
बदायूं में बदमाशों की गोली की लगने से शहीद हुए अहार मई गांव के दरोगा सर्वेश यादव का परिवार शासन से मिलने वाली आर्थिक मदद के इंतजार में है। मुख्यमंत्री की ओर से 50 लाख रुपये मदद की घोषणा हुई थी। पर, अब तक सिर्फ बीमा का ही भुगतान मिला है। जबकि शहीद का भाई कई बार डीएम और सपा विधायक से मिलकर आर्थिक सहायता की मांग कर चुका है। 
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निधोली कलां ब्लॉक क्षेत्र के अहार मई निवासी शहीद एसआई सर्वेश कुमार यादव के भाई अवधेश यादव ने बताया कि डीएम अजय कुमार यादव, एसएसपी अजय शंकर राय और सपा विधायक अमित गौरव यादव उर्फ टीटू ने सीएम अखिलेश यादव से फोन पर बात करके 50 लाख रुपये आर्थिक सहायता देने की घोषणा की थी। कहा कि डीएम और विधायक से मिलकर कई बार गुहार लगाई, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है। इसके कारण शहीद की पत्नी सुनीता, दो बेटे और बेटी परेशान हैं। अवधेश खुद पुलिस विभाग के ड्राइवर पद पर मथुरा में तैनात है। उसने कई बार शहीद की पत्नी सुनीता और तीन बच्चाेें की देखभाल के लिए विधायक अमित गौरव यादव से मिल कर गाजियाबाद तबादला कराने की गुहार लगाई, लेकिन उसका स्थानांतरण भी नहीं किया जा रहा है। शहीद परिवार के लोगों में गुस्सा है कि मथुरा के जवाहर कांड में शहीद परिवारों को नौकरी और अर्थिक सहायता देने खुद सीएम अखिलेश यादव उनके पास पहुंचे थे, लेकिन सर्वेश के परिवार को आथिक सहायता समय से दिलाना भी जरूरी नहीं समझा जा रहा है। 
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देश पर मर मिटे ‘लाल’ को भी भुलाया
एटा। गांव घिलौआ निवासी शहीद पुष्पेंद्र यादव मात्र 22 साल की उम्र में ही फौज में भर्ती होकर देश की सेवा में लग गया था। कारगिल युद्ध के दौरान 30 अगस्त,1999 को  पुष्पेंद्र पाक सैनिकों को मुंहतोड़ जवाब देते हुए शहीद हो गए थे। देश के इस लाल को भी शासन-प्रशासन भुला बैठा है। 17 साल बीतने के बाद भी शहीद पुष्पेंद्र की गांव में प्रतिमा तक नहीं लगाई जा सकी है। उसके घर पहुंचने के लिए रास्ते का भी निर्माण नहीं हो सका। पिता शोभाराम यादव शहीद बेटे की प्रतिमा लगवाने और रास्ता बनवाने के लिए कई बार प्रार्थनापत्र दे चुके हैं। बताया कि शहीद होने के बाद न तो आर्मी के जवानों ने कभी सुध ली और न ही प्रशासन के लोग ही हाल पूछने आए।
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