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Etah News: नींद की कमी से हो रही सिजोफ्रेनिया और उन्माद की बीमारी
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एटा। मेडिकल कॉलेज के मनोरोग विभाग में कई तरह के मरीज उपचार लेने के लिए आ रहे हैं। सिजोफ्रेनिया और उन्माद जैसी दिक्कतें हो रही हैं। मनोरोग विभाग में रोजाना 50 से अधिक मरीज उपचार लेने के लिए पहुंच रहे हैं, इनमें 10 प्रतिशत मरीज सिजोफ्रेनिया से पीड़ित हैं।
सिजोफ्रेनिया एक गंभीर और दीर्घकालिक मानसिक बीमारी है। यह सोचने, महसूस करने और व्यवहार करने की क्षमता को गंभीर रूप से प्रभावित करती है इससे व्यक्ति वास्तविकता से संपर्क खो देता है। यह आमतौर पर 16-45 वर्ष की आयु में, विशेषकर युवाओं में शुरू होती है।
मेडिकल कॉलेज के मनोरोग विभाग में मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. सेशन और डॉ. वसुंधरा ने संयुक्त रूप से बताया कि गर्मी के मौसम में लोग रात को ठीक से नहीं सो पाते हैं। उन्हें रात को नींद नहीं आती है इसकी वजह से उन्हें सिजोफ्रेनिया और उन्माद जैसी बीमारी घेर रही है। सिजोफ्रेनिया और उन्माद की बीमारी से पीड़ित करीब 5 से 6 मरीज रोजाना उपचार लेने के लिए आ रहे हैं।
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उन्होंने बताया कि सिजोफ्रेनिया बीमारी में व्यक्ति को शक करना, कानों में तरह-तरह की आवाजों का आना, बहम, अजीब-अजीब बातें करना, बिना कारण मारपीट करना और अकेले में बात करने जैसी हरकतें करता है। वहीं उन्माद की समस्या में लोगों को गुस्सा ज्यादा आता है। इसके साथ ही ज्यादा ज्यादा बोलना, बड़ी बड़ी बातं करना आदि इस बीमारी के लक्षण होते हैं। ऐसे लोगों को उपचार के साथ ही काउंसलिंग दी जा रही है। उन्होंने बताया कि इसके साथ ही इसके साथ ही यादाश्त कमजोर होना, नशे की लत आदि मरीज भी उपचार लेने के लिए आ रहे हैं।
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सिजोफ्रेनिया एक गंभीर और दीर्घकालिक मानसिक बीमारी है। यह सोचने, महसूस करने और व्यवहार करने की क्षमता को गंभीर रूप से प्रभावित करती है इससे व्यक्ति वास्तविकता से संपर्क खो देता है। यह आमतौर पर 16-45 वर्ष की आयु में, विशेषकर युवाओं में शुरू होती है।
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मेडिकल कॉलेज के मनोरोग विभाग में मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. सेशन और डॉ. वसुंधरा ने संयुक्त रूप से बताया कि गर्मी के मौसम में लोग रात को ठीक से नहीं सो पाते हैं। उन्हें रात को नींद नहीं आती है इसकी वजह से उन्हें सिजोफ्रेनिया और उन्माद जैसी बीमारी घेर रही है। सिजोफ्रेनिया और उन्माद की बीमारी से पीड़ित करीब 5 से 6 मरीज रोजाना उपचार लेने के लिए आ रहे हैं।
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उन्होंने बताया कि सिजोफ्रेनिया बीमारी में व्यक्ति को शक करना, कानों में तरह-तरह की आवाजों का आना, बहम, अजीब-अजीब बातें करना, बिना कारण मारपीट करना और अकेले में बात करने जैसी हरकतें करता है। वहीं उन्माद की समस्या में लोगों को गुस्सा ज्यादा आता है। इसके साथ ही ज्यादा ज्यादा बोलना, बड़ी बड़ी बातं करना आदि इस बीमारी के लक्षण होते हैं। ऐसे लोगों को उपचार के साथ ही काउंसलिंग दी जा रही है। उन्होंने बताया कि इसके साथ ही इसके साथ ही यादाश्त कमजोर होना, नशे की लत आदि मरीज भी उपचार लेने के लिए आ रहे हैं।