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Etah News: सत्या बहन ने मनमोहन सिंह को दिया था एनएच-91 के चौड़ीकरण का पत्र
Fri, 27 Dec 2024 10:42 PM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
Updated Fri, 27 Dec 2024 10:42 PM IST
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दिल्ली स्थित प्रधानमंत्री आवाास में पूर्व पीएम डॉ. मनमोहन सिंह से मुलाकात करतीं पूर्व सांसद स
- फोटो : दिल्ली स्थित प्रधानमंत्री आवाास में पूर्व पीएम डॉ. मनमोहन सिंह से मुलाकात करतीं पूर्व सांसद सत्या बहन।
एटा। शहर के गांधी मार्केट की रहने वाली राज्यसभा की पूर्व सांसद सत्या बहन के राजनीतिक के साथ ही पारिवारिक संबंध भी पूर्व पीएम डॉ. मनमोहन सिंह से हो गए थे। उन्होंने पूर्व पीएम को एनएच-91 (वर्तमान में एनएच-34) के चौड़ीकरण के लिए पत्र भी दिया था।
पूर्व सांसद ने बताया कि वह 1988 से 1994 के बीच सांसद रहीं थीं। उस समय प्रधानमंत्री राजीव गांधी और वित्त मंत्री मनमोहन सिंह थे। इन लोगों से सदन में अक्सर विभिन्न मुद्दों पर वार्ता होती थी। मनमोहन सिंह बहुत ही आत्मयी संबंध मानने लगे थे और परिवार के साथ उनसे मिलने के लिए आना-जाना होने लगा। प्रधानमंत्री बनने पर भी कई बार उनसे प्रधानमंत्री आवास में मुलाकात हुई। उनके प्रधानमंत्री कार्यकाल के अंतिम दौर में एनएच-91 जीटी रोड के संबंध में पत्र दिया था। उस समय इस हाईवे की चौड़ाई काफी कम थी और लोगों को समस्याओं का सामना करना पड़ता था। इस पर पूर्व पीएम ने कार्य कराने का आश्वासन दिया, लेकिन इसके बाद चुनाव हो गए और कांग्रेस की सरकार नहीं लौटी।
उन्होंने बताया कि डेढ़-दो साल से पूर्व पीएम की तबीयत खराब रहने लगी थी। उनसे मिलने दिल्ली भी गई थी। वहीं आखिरी बार लगभग छह महीने पहले भी अपने परिवार के साथ वहां गईं थी, काफी आत्मीयता के साथ पूर्व पीएम हम लोगों से मिले और विभिन्न मुद्दों पर वार्ता हुई। जब वहां से आने लगी तो वह बाहर तक छोड़ने आए और जब तक गाड़ी नहीं चली गई, वह खड़े रहे। उनके जैसा जिंदादिल व्यक्ति, साहसिक निर्णय लेने वाला प्रशासक और विद्वान अर्थशास्त्री होना मुश्किल है।
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पूर्व सांसद ने बताया कि वह 1988 से 1994 के बीच सांसद रहीं थीं। उस समय प्रधानमंत्री राजीव गांधी और वित्त मंत्री मनमोहन सिंह थे। इन लोगों से सदन में अक्सर विभिन्न मुद्दों पर वार्ता होती थी। मनमोहन सिंह बहुत ही आत्मयी संबंध मानने लगे थे और परिवार के साथ उनसे मिलने के लिए आना-जाना होने लगा। प्रधानमंत्री बनने पर भी कई बार उनसे प्रधानमंत्री आवास में मुलाकात हुई। उनके प्रधानमंत्री कार्यकाल के अंतिम दौर में एनएच-91 जीटी रोड के संबंध में पत्र दिया था। उस समय इस हाईवे की चौड़ाई काफी कम थी और लोगों को समस्याओं का सामना करना पड़ता था। इस पर पूर्व पीएम ने कार्य कराने का आश्वासन दिया, लेकिन इसके बाद चुनाव हो गए और कांग्रेस की सरकार नहीं लौटी।
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उन्होंने बताया कि डेढ़-दो साल से पूर्व पीएम की तबीयत खराब रहने लगी थी। उनसे मिलने दिल्ली भी गई थी। वहीं आखिरी बार लगभग छह महीने पहले भी अपने परिवार के साथ वहां गईं थी, काफी आत्मीयता के साथ पूर्व पीएम हम लोगों से मिले और विभिन्न मुद्दों पर वार्ता हुई। जब वहां से आने लगी तो वह बाहर तक छोड़ने आए और जब तक गाड़ी नहीं चली गई, वह खड़े रहे। उनके जैसा जिंदादिल व्यक्ति, साहसिक निर्णय लेने वाला प्रशासक और विद्वान अर्थशास्त्री होना मुश्किल है।
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