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सड़कों की गुणवत्ता जांचेगी न्यूक्लियर गेज टेस्टिंग मशीन
amar ujala
Updated Fri, 14 Apr 2017 11:54 PM IST
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लोक निर्माण विभाग से बनने वाली सड़कों में अब ठेकेदार और पीडब्लूडी इंजीनियर मिलकर गुणवत्ता में नहीं कर पाएंगे। कारण विभाग सड़काें की गुणवत्ता जांचने के लिए रेडियम किरणों से संचालित न्यूक्लियर गेज टेस्टिंग मशीन खरीदने जा रहा है। उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने पहले चरण में मंडल स्तर और दूसरे चरण में डिवीजन स्तर पर एनजीटी मशीन खरीदने के आदेश दिए हैं। पीडब्लूडी के प्रमुख सचिव सदाकांत मशीन खरीद की गाइड लाइन जारी कर दी है।
लोक निर्माण विभाग जिले में हर साल विभिन्न योजनाओं से करीब 80 करोड़ रुपये की लागत की सड़कों का निर्माण करता है। पर, गुणवत्ता जांच का सटीक पैमाना नहीं होने के कारण सड़कों के निर्माण में माननीय, ठेकेदार और अभियंता मिलकर गुणवत्ता में बड़ा खेल करते हैं। इसी गोलमाल को रोकने के लिए न्यूक्लियर गेज टेस्टिंग मशीन खरीदने का फैसला किया है। एनजीटी मशीन का इस्तेमाल देश के कई प्रदेशों में बड़े प्रोजेक्ट की सड़कों की गुणवत्ता जांच में हो रहा है, लेकिन यूपी इससे अछूता था। पीडब्लूडी एक्सईएन वहीद बख्श ने बताया कि रेडियम किरणों से संचालित न्यूक्लियर गेज टेस्टिंग मशीन सड़क पर रखते ही पत्थर, गिट्टी, सीमेंट, बालू, तारकोल का परिणाम गुणवत्ता के साथ सामने आ जाएगा। इसकी कीमत आठ से दस लाख रुपये होगी। मशीन का चलाने के लिए विभाग के कर्मचारी को दिल्ली के टाटा सेंटर में ट्रेनिंग भी दिलाई जाएगी।
मियाद खत्म होने पर आती है गुणवत्ता की जांच रिपोर्ट
लोक निर्माण विभाग से बनने वाली सड़कों की गुणवत्ता की जांच का कोई सटीक पैमाना नहीं है। शिकायत आने पर सड़क को तीन से चार स्थानों पर खोद कर औसत निर्माण की लंबाई, चौड़ाई और ऊंचाई का पता लगा कर मैटेरियल प्रयोगशालाआें में जांच के लिए भेजा जाता है। जहां से रिपोर्ट आने में ही लंबा वक्त लग जाता है। तब तक सड़क की मियाद खत्म हो जाती है। इसी लंबी प्रक्रिया का फायदा उठा कर सड़क गुणवत्ता में गोलमाल करने ठेकेदार और इंजीनियर बच निकलते हैं।
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एनजीटी मशीन खरीदने के लिए शासन ने पहले चरण मे मंडल स्तरीय डिवीजन और दूसरे चरण में जिला डिजीवन को आदेश दिए हैं। आगरा और अलीगढ़ में मशीन खरीदने की तैयारी हो गई है। इसके बाद एटा जिले में मशीन खरीदी जाएगी।
वहीद बख्श
एक्सईएन पीडब्लूडी एटा
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लोक निर्माण विभाग जिले में हर साल विभिन्न योजनाओं से करीब 80 करोड़ रुपये की लागत की सड़कों का निर्माण करता है। पर, गुणवत्ता जांच का सटीक पैमाना नहीं होने के कारण सड़कों के निर्माण में माननीय, ठेकेदार और अभियंता मिलकर गुणवत्ता में बड़ा खेल करते हैं। इसी गोलमाल को रोकने के लिए न्यूक्लियर गेज टेस्टिंग मशीन खरीदने का फैसला किया है। एनजीटी मशीन का इस्तेमाल देश के कई प्रदेशों में बड़े प्रोजेक्ट की सड़कों की गुणवत्ता जांच में हो रहा है, लेकिन यूपी इससे अछूता था। पीडब्लूडी एक्सईएन वहीद बख्श ने बताया कि रेडियम किरणों से संचालित न्यूक्लियर गेज टेस्टिंग मशीन सड़क पर रखते ही पत्थर, गिट्टी, सीमेंट, बालू, तारकोल का परिणाम गुणवत्ता के साथ सामने आ जाएगा। इसकी कीमत आठ से दस लाख रुपये होगी। मशीन का चलाने के लिए विभाग के कर्मचारी को दिल्ली के टाटा सेंटर में ट्रेनिंग भी दिलाई जाएगी।
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मियाद खत्म होने पर आती है गुणवत्ता की जांच रिपोर्ट
लोक निर्माण विभाग से बनने वाली सड़कों की गुणवत्ता की जांच का कोई सटीक पैमाना नहीं है। शिकायत आने पर सड़क को तीन से चार स्थानों पर खोद कर औसत निर्माण की लंबाई, चौड़ाई और ऊंचाई का पता लगा कर मैटेरियल प्रयोगशालाआें में जांच के लिए भेजा जाता है। जहां से रिपोर्ट आने में ही लंबा वक्त लग जाता है। तब तक सड़क की मियाद खत्म हो जाती है। इसी लंबी प्रक्रिया का फायदा उठा कर सड़क गुणवत्ता में गोलमाल करने ठेकेदार और इंजीनियर बच निकलते हैं।
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एनजीटी मशीन खरीदने के लिए शासन ने पहले चरण मे मंडल स्तरीय डिवीजन और दूसरे चरण में जिला डिजीवन को आदेश दिए हैं। आगरा और अलीगढ़ में मशीन खरीदने की तैयारी हो गई है। इसके बाद एटा जिले में मशीन खरीदी जाएगी।
वहीद बख्श
एक्सईएन पीडब्लूडी एटा