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सीएम तक इलाज की गुहार लगाने के बाद भी नहीं बची जान
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एटा। तहसील अलीगंज क्षेत्र के एक अधेड़ की सीएम तक इलाज की गुहार लगाने के बाद भी जान नहीं बचाई जा सकी। परिजनों की ओर से श्वान के काटने के बाद स्वास्थ्य विभाग पर नकली एंटी रैबीज इंजेक्शन लगाने और लापरवाही बरतने का आरोप लगाया गया है। मुख्यमंत्री कार्यालय में कॉल करने के बाद भी स्वास्थ्य विभाग का कोई कर्मी घर पर नहीं गया। अधेड़ की मौत के बाद रविवार को सीएमओ सीएचसी अलीगंज पहुंचे और परिजनों से वार्ता की।
गांव खैरपुरा निवासी राजवीर सिंह (55) की श्वान के काटने से रविवार तड़के करीब चार बजे घर पर ही मौत हो गई। मृतक के भतीजे अमित ने बताया कि 20 अक्तूबर को श्वान ने घर के सामने सुबह काट लिया था। इसी दिन पहला इंजेक्शन सीएचसी अलीगंज पहुंचकर लगाया, इसके बाद 23 और 27 अक्तूबर को इंजेक्शन लगवाए गए। इसके बाद भी संक्रमण फैल गया। आरोप है कि स्वास्थ्य कर्मियों की ओर से नकली एंटी रैबीज लगा दी गई। संक्रमण फैलने पर सीएचसी लेकर पहुंचे तो वहां से एसएन मेडिकल कॉलेज आगरा रेफर कर दिया गया। वहीं भी भर्ती नहीं किया तो अलीगंज स्थित निजी चिकित्सक को दिखाया गया। हालत गंभीर होने पर शनिवार को मुख्यमंत्री कार्यालय कॉल करके इलाज की गुहार लगाई गई। इसके बाद भी स्थानीय स्तर से स्वास्थ्य कर्मियों ने कोई पहल नहीं की। खुद ही एंबुलेंस से शनिवार की सुबह करीब साढ़े दस बजे सीएचसी पहुंचे, यहां पर दो ड्रिप लगाकर शाम करीब साढ़े तीन बजे घर भेज दिया गया।
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चिकित्सकों को भी लगाए गए एंटी रैबीज
सीएमओ ने बताया कि रैबीज का उपचार करने वाले चिकित्सकों और उनके परिजनों के करीब 42 सदस्यों को एंटी रैबीज इंजेक्शन लगाए गए हैं। रैबीज फैलने के बाद संपर्क में आने वालों के भी चपेट में आने की संभावनाएं रहती हैं।
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रैबीज से मौत का दिया प्रमाण पत्र
रैबीज से मौत होने के बाद परिजनों ने शव का अंतिम संस्कार नहीं किया। घर पर ही रविवार को शाम तक शव को रखे रहे। परिजनों की मांग थी कि शव का पोस्टमार्टम कराया जाए अथवा रैबीज से मौत होने का प्रमाण पत्र दिया जाए। इसके बाद सीएमओ गांव पहुंचे और रैबीज से मौत होने का प्रमाण पत्र दिया गया तब शव का अंतिम संस्कार देरशाम किया गया।
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गांव खैरपुरा में राजवीर सिंह के शरीर में रैबीज फैलने के बाद स्वास्थ्य कर्मियों को उपचार के लिए लगाया गया था। शरीर में रैबीज फैलने के बाद कम ही चांस रह जाते हैं। इसके बाद भी पूरा इलाज कराया गया। परिजन उपचार से संतुष्ट भी हैं।
डा. उमेश त्रिपाठी, सीएमओ
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गांव खैरपुरा निवासी राजवीर सिंह (55) की श्वान के काटने से रविवार तड़के करीब चार बजे घर पर ही मौत हो गई। मृतक के भतीजे अमित ने बताया कि 20 अक्तूबर को श्वान ने घर के सामने सुबह काट लिया था। इसी दिन पहला इंजेक्शन सीएचसी अलीगंज पहुंचकर लगाया, इसके बाद 23 और 27 अक्तूबर को इंजेक्शन लगवाए गए। इसके बाद भी संक्रमण फैल गया। आरोप है कि स्वास्थ्य कर्मियों की ओर से नकली एंटी रैबीज लगा दी गई। संक्रमण फैलने पर सीएचसी लेकर पहुंचे तो वहां से एसएन मेडिकल कॉलेज आगरा रेफर कर दिया गया। वहीं भी भर्ती नहीं किया तो अलीगंज स्थित निजी चिकित्सक को दिखाया गया। हालत गंभीर होने पर शनिवार को मुख्यमंत्री कार्यालय कॉल करके इलाज की गुहार लगाई गई। इसके बाद भी स्थानीय स्तर से स्वास्थ्य कर्मियों ने कोई पहल नहीं की। खुद ही एंबुलेंस से शनिवार की सुबह करीब साढ़े दस बजे सीएचसी पहुंचे, यहां पर दो ड्रिप लगाकर शाम करीब साढ़े तीन बजे घर भेज दिया गया।
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चिकित्सकों को भी लगाए गए एंटी रैबीज
सीएमओ ने बताया कि रैबीज का उपचार करने वाले चिकित्सकों और उनके परिजनों के करीब 42 सदस्यों को एंटी रैबीज इंजेक्शन लगाए गए हैं। रैबीज फैलने के बाद संपर्क में आने वालों के भी चपेट में आने की संभावनाएं रहती हैं।
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रैबीज से मौत का दिया प्रमाण पत्र
रैबीज से मौत होने के बाद परिजनों ने शव का अंतिम संस्कार नहीं किया। घर पर ही रविवार को शाम तक शव को रखे रहे। परिजनों की मांग थी कि शव का पोस्टमार्टम कराया जाए अथवा रैबीज से मौत होने का प्रमाण पत्र दिया जाए। इसके बाद सीएमओ गांव पहुंचे और रैबीज से मौत होने का प्रमाण पत्र दिया गया तब शव का अंतिम संस्कार देरशाम किया गया।
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गांव खैरपुरा में राजवीर सिंह के शरीर में रैबीज फैलने के बाद स्वास्थ्य कर्मियों को उपचार के लिए लगाया गया था। शरीर में रैबीज फैलने के बाद कम ही चांस रह जाते हैं। इसके बाद भी पूरा इलाज कराया गया। परिजन उपचार से संतुष्ट भी हैं।
डा. उमेश त्रिपाठी, सीएमओ