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तालाबों पर कब्जा मिला तो नपेंगे अफसर

Thu, 29 Dec 2016 12:30 AM IST
Amar Ujala
Amar Ujala Updated Thu, 29 Dec 2016 12:30 AM IST
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Ponds occupy officer then got punished
तालाब पर कब्जा कर बनाई झोपड़ी - फोटो : Amar Ujala
अब तालाब, पोखरों, कब्रिस्तान और चारागाहों पर कब्जा मिला तो अफसरों पर कार्रवाई होगी। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के इस आदेश से अधिकारियों की परेशानी बढ़ गई है।
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प्रदेश में तालाबों, पोखरों, कब्रिस्तान और चारागाहों पर अवैध कब्जों की सबसे ज्यादा शिकायतें सामने आती हैं। जिले की बात करें तो यहां के एक हजार से ज्यादा तालाब और पोखर में से 70 फीसद पर स्थानीय लोगों का कब्जा है। अधिकांश तालाबों और पोखरों पर सत्तापक्ष के समर्थक और अधिकारियों की मिलीभगत से भूमाफिया कब्जा कर लेते हैं।
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ग्रामीण फरियाद लेकर अधिकारियों के चक्कर काटते रहते हैं, लेकिन पुलिस और प्रशासन कोई कार्रवाई नहीं करता। तालाब, पोखरों पर हुए कब्जे को लेकर एनजीटी ने सख्त रूख अख्तियार किया है। एनजीटी के आदेश में साफ कहा गया है कि कब्जे के लिए नगर पालिका व पंचायत के अधिशासी अधिकारी, पुलिस अधिकारी और राजस्व विभाग के अधिकारी व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार होंगे। जिस भी अफसर के कार्यकाल में कब्जा हुआ मिलेगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। एडीएम सतीश कुमार ने बताया  कब्जा हटाने के लिए अभियान चलाया जाता है। शिकायतों पर भी जांच कराकर कार्रवाई की जाती है। एनजीटी के आदेश के बाद सार्वजनिक भूमि को कब्जा मुक्त कराने के लिए भी अभियान चलाया जाएगा।
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शहर से गायब हुए तालाब
कब्जों के चलते शहर से तालाब गायब हो गए हैं। शहर में वर्षों पहले तक पांच तालाब थे, लेकिन अब एक ही तालाब बचा है। यह तालाब भी दिन-ब-दिन सिकुड़ता जा रहा है। इसके अधिकांश हिस्से पर लोगों ने कब्जा कर रखा है। वहीं जिले की अलीगंज तहसील में 422, जलेसर में 303 और सदर तहसील में 278 तालाब और पोखर भू-अभिलेखों में दर्ज हैं। एनजीटी के आदेश के बाद राजस्व विभाग कब्रिस्तान और चारागाह की हकीकत खंगालने में जुट गया है।
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