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Etah News: बारिश से मंडी में मूंगलफली और मक्का भीगी

Sat, 22 Jun 2024 11:59 PM IST
आगरा ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा Updated Sat, 22 Jun 2024 11:59 PM IST
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Peanuts and maize got wet in the market due to rain
एटा। जिले में शनिवार को हुई बारिश ने भले ही लोगों को गर्मी से राहत दिलाई, लेकिन अलीगंज रोड स्थित मंडी समिति में किसानों के लिए यह मुसीबत बन गई। अचानक हुई बारिश से खुले में पड़ी मक्का और मूंगफली भीग गई। इससे किसानों को नुकसान हुआ है। अब उन्हें कम कीमत पर अपनी उपज बेचनी पड़ेगी।मंडी समिति में शनिवार को जिले भर से तमाम किसान अपनी मक्का और मूंगफली को बेचने के लिए आए थे। दोपहर में अचानक बारिश शुरू हो गई। ऐसे में जिन किसानों की उपज चबूतरों पर या सड़क किनारे पड़ी थी, वह भीग गई। मक्का और मूूंगफली भीगने से किसानों को झटका लगा है। अब भीगी हुई उपज को सामान्य तौर पर व्यापारी नहीं खरीदेंगे। किसानों को मंडी में या अपने घर ले जाकर इसे सुखाना होगा।
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किसानों का कहना है कि अगर कोई व्यापारी भीगी हुई उपज खरीदेगा भी तो किसानों को 70 प्रतिशत तक ही दाम मिलेगा। इससे उन्हें बड़ा नुकसान होगा। इतना ही नहीं, दोनों ही उपज भीगने के बाद काली भी पड़ सकती हैं। ऐसे में किसानों को समझ नहीं आ रहा है वह क्या करें। शनिवार की दोपहर को बारिश बंद होने के बाद किसान अपना पानी में बहता अनाज बोरियों से उठाते नज़र आए। अगर दोबारा बारिश होती है तो उनकी मुश्किलें और बढ़ जाएंगी।
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वही मंडी के आढ़ती व व्यापारियों ने आक्रोश जताते हुए कहां की कई बार मंडी सचिव से शिकायत भी की गई कि कि मंडी में सडक ऊंची होने की वजह से दुकान और सड़क के बीच गहराई में पानी भर जाता है। जिसकी मंडी प्रशासन द्वारा कोई सुनवाई नहीं की जाती है। थोड़ी बरसात होते ही दुकानों के बाहर रखा अनाज पानी में बहना शुरू हो जाता है।
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कोई भी आपदा आए नुकसान तो किसानों का ही होता है। बारिश में फसल भीगने से उसकी कीमत गिरना तय है। इसमें आढ़ती या व्यापारी का कोई नुकसान नहीं है।सतीश सिंह, रामनगर

अब या तो किसान उपज को तीन दिन तक मंडी में ही सुखाए या अपने घर ले जाए। दोनों ही सूरतों में किसानों को नुकसान उठाना पड़ेगा। वहीं मौसम का भी कुछ पता नहीं है।

ज्ञानेंद्र प्रताप, कुठिला
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नाली खुदवाकर गड्ढों में भरे बारिश के पानी की निकासी की जाएगी। वैकल्पिक व्यवस्था कर पाइप डलवाकर नाली बनवा दी जाएगी। जिससे गड्ढों में पानी न भरे। अरुण यादव, मंडी सचिव
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