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गैलरी में मरीजों का उपचार
ब्यूरो अमर उजाला एटा
Updated Wed, 15 Apr 2015 11:35 PM IST
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नगर के संयुक्त चिकित्सालय में लापरवाही हावी है। संयुक्त चिकित्सालय में
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मरीजों को भर्ती करने के लिए बनाया गया वार्ड खाली रहता है। लोगों का कहना
है कि संयुक्त चिकित्सालय में गंभीर मरीज को अमूमन रेफर कर दिया जाता है।
अगर भर्ती करना हो तो चिकित्सालय की गैलरी में ही उपचार शुरू कर देते हैं।
संयुक्त चिकित्सालय में प्रतिदिन सैकड़ाें की संख्या में विभिन्न रोगों से पीड़ित आते हैं। गंभीर अवस्था में मरीजों को चिकित्सालय में इलाज के लिए भर्ती किया जाता है, लेकिन इन मरीजों को वार्ड में भर्ती करने के बजाए गैलरी में ही उपचार देना शुरू कर देते हैं। मरीज के साथ आने वाले तीमरदार भी इस संबंध में अपनी आपत्ति जता चुके हैं, लेकिन चिकित्सक उन्हें देखरेख की दुहाई देकर नीचे ही भर्ती रहने का दबाव बनाते हैं। ऐसा एक बार नहीं कई बार हो चुका है। बुधवार को ही संयुक्त चिकित्सालय में यह लापरवाही देखने को मिली।
जहरखुरानी का शिकार एक युवक को चिकित्सकों ने नीचे गैलरी में ही भर्ती कर लिया। उसके आसपास भारी गंदगी थी। ऐसी स्थिति किसी एक मरीज के साथ नहीं प्रतिदिन ही चिकित्सीय लापरवाही मरीजों के उपचार के दौरान देखने को मिल जाती है।
चिकित्सकों एवं कर्मियों की कमी की वजह से मरीजों को गैलरी में भर्ती किया जाता है, जिससे उनकी देखभाल कर सकें। - चिकित्साधीक्षक डा. कृष्णअवतार
संयुक्त चिकित्सालय में प्रतिदिन सैकड़ाें की संख्या में विभिन्न रोगों से पीड़ित आते हैं। गंभीर अवस्था में मरीजों को चिकित्सालय में इलाज के लिए भर्ती किया जाता है, लेकिन इन मरीजों को वार्ड में भर्ती करने के बजाए गैलरी में ही उपचार देना शुरू कर देते हैं। मरीज के साथ आने वाले तीमरदार भी इस संबंध में अपनी आपत्ति जता चुके हैं, लेकिन चिकित्सक उन्हें देखरेख की दुहाई देकर नीचे ही भर्ती रहने का दबाव बनाते हैं। ऐसा एक बार नहीं कई बार हो चुका है। बुधवार को ही संयुक्त चिकित्सालय में यह लापरवाही देखने को मिली।
जहरखुरानी का शिकार एक युवक को चिकित्सकों ने नीचे गैलरी में ही भर्ती कर लिया। उसके आसपास भारी गंदगी थी। ऐसी स्थिति किसी एक मरीज के साथ नहीं प्रतिदिन ही चिकित्सीय लापरवाही मरीजों के उपचार के दौरान देखने को मिल जाती है।
चिकित्सकों एवं कर्मियों की कमी की वजह से मरीजों को गैलरी में भर्ती किया जाता है, जिससे उनकी देखभाल कर सकें। - चिकित्साधीक्षक डा. कृष्णअवतार