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नोटबंदी की भेंट चढ़ा शिवराज पशु मेला
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 05 Dec 2016 10:24 PM IST
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शिवराज पशु मेला
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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तीर्थनगरी में लगने वाले प्रसिद्ध शिवराज पशु मेला पर नोटबंदी की मार है। मेले मेें ने तो पर्याप्त कारोबारी ही आए हैं और न हीं खरीदार ही दिखाई दे रहे हैं। कई राज्यों के पशु कारोबारी मेले से पहले ही किनारा कर चुके है। जो कारोबारी मेले में आए हैं वे कारोबार न होने से मायूस हैं।
तीर्थ नगरी में 1925 से यह मेला लगातार लग रहा है। इस मेले में प्रदेश के अलावा राजस्थान, मध्यप्रदेश, हरियाणा, पंजाब आदि दूरदराज के प्रांतों के व्यापारी अपने घोड़ा घोड़ियों को लेकर आते हैं। इस बार नोटबंदी ने मेले पर असर डाल दिया। मात्र प्रदेश के पशु व्यापारी ही अपने घोड़ा घोड़ी लेकर पहुंचे हैं। अब जबकि मेला समाप्त होने में चार दिन ही शेष बचे हैं। ऐसे में ना उम्मीदी पाले पशु व्यापारी अपना सामान समेटने में लगे हैं। रात भर गुलजार रहने वाला मेला शाम ढलते ही खामोशी में तब्दील हो जाता है। फर्रुखाबाद से आए एजाज हुसैन का कहना है कि उनकी घोडी रानी की कीमत 11 लाख रुपये है, लेकिन अभी तक कोई खरीदार नहीं मिला है। संभल के कारोबारी यूनिस का कहना है कि वे मेले में अपनी घोड़ी बेचने आए हैं। जलालपुर के व्यापारी जीतू अपनी घोड़ी को बेचने के लिए ग्राहक न मिलने से मायूस नजर आए। चौहरी मथुरा से अपना घोड़ा शेरा लेकर आए कारोबारी आमिर का कहना है कि उनके साढे़ तीन साल के घोडे़ के मुकाबले का घोड़ा पूरे मेले में नहीं है। साफ रंग, अच्छी ऊंचाई, बिजली सी फुर्ती इसकी विशेषता है।
घोड़ों की नाल पोशाक का कारोबार भी है प्रभावित
सोरों। नोटबंदी का असर मेले में होने वाले घोड़े की नाल, पोशाक, मोरा के कारोबार पर भी पड़ा है। इनके कारोबारी भी बिक्री न होने से मायूस हैं। व्यापारी सुरेश कुमार का कहना है कि वे हर वर्ष शिवराज पशु मेले में अपनी दुकान लेकर आते हैं लेकिन इस बार अब तक मुश्किल से 20 हजार रुपये की बिक्री हुई है।
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तीर्थ नगरी में 1925 से यह मेला लगातार लग रहा है। इस मेले में प्रदेश के अलावा राजस्थान, मध्यप्रदेश, हरियाणा, पंजाब आदि दूरदराज के प्रांतों के व्यापारी अपने घोड़ा घोड़ियों को लेकर आते हैं। इस बार नोटबंदी ने मेले पर असर डाल दिया। मात्र प्रदेश के पशु व्यापारी ही अपने घोड़ा घोड़ी लेकर पहुंचे हैं। अब जबकि मेला समाप्त होने में चार दिन ही शेष बचे हैं। ऐसे में ना उम्मीदी पाले पशु व्यापारी अपना सामान समेटने में लगे हैं। रात भर गुलजार रहने वाला मेला शाम ढलते ही खामोशी में तब्दील हो जाता है। फर्रुखाबाद से आए एजाज हुसैन का कहना है कि उनकी घोडी रानी की कीमत 11 लाख रुपये है, लेकिन अभी तक कोई खरीदार नहीं मिला है। संभल के कारोबारी यूनिस का कहना है कि वे मेले में अपनी घोड़ी बेचने आए हैं। जलालपुर के व्यापारी जीतू अपनी घोड़ी को बेचने के लिए ग्राहक न मिलने से मायूस नजर आए। चौहरी मथुरा से अपना घोड़ा शेरा लेकर आए कारोबारी आमिर का कहना है कि उनके साढे़ तीन साल के घोडे़ के मुकाबले का घोड़ा पूरे मेले में नहीं है। साफ रंग, अच्छी ऊंचाई, बिजली सी फुर्ती इसकी विशेषता है।
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घोड़ों की नाल पोशाक का कारोबार भी है प्रभावित
सोरों। नोटबंदी का असर मेले में होने वाले घोड़े की नाल, पोशाक, मोरा के कारोबार पर भी पड़ा है। इनके कारोबारी भी बिक्री न होने से मायूस हैं। व्यापारी सुरेश कुमार का कहना है कि वे हर वर्ष शिवराज पशु मेले में अपनी दुकान लेकर आते हैं लेकिन इस बार अब तक मुश्किल से 20 हजार रुपये की बिक्री हुई है।
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