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राशन न रहने की व्यवस्था, ड्यूटी 12 घंटे की
Amar Ujala
Updated Sat, 14 Jan 2017 11:56 PM IST
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पीएसी कैंप की रसोई
- फोटो : Amar Ujala
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12 घंटे की ड्यूटी के बाद भी पीएसी कर्मियों के लिए सुविधाओं का अभाव है। कर्मियों की कैंप में तैनाती के दौरान न तो कमरे की व्यवस्था है और न ही विभाग की ओर से राशन का इंतजाम। कैंप में भी खाना उन्हें 45 से 50 रुपये जेब से खर्च करने के बाद ही मिल पाता है। अभी हाल ही में बीएसएफ के एक जवान का सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल हुआ था। जवान ने ड्यूटी के हालातों को बयां किया था।
इधर, पीएसी की बात करें तो कर्मियों के लिए सुविधाओं की कमी है।
पीएसी के एक जवान ने ड्यूटी का हाल बयां करते हुए बताया कि विभाग की ओर से धोबी, नाई, फलोवर मिलता है, लेकिन वे सब मुख्य कैंप तक सीमित हैं, गांवों के कैंप में काम खुद करने पड़ते हैं। गांवों में कैंप करने पर लू के थपेड़ों के बीच ड्यूटी और सर्दियों में घर से गर्म कपड़े लाकर सर्दी से बचना पड़ता है। विभाग की ओर से सिर्फ गर्म कपड़े पहनने की व्यवस्था है ओढ़ने के विभाग कुछ नहंीं देता।
पीएसी कर्मी ने बताया कि खेलकूद का सामान, टीवी, डिश शहरों के कैंप तक सीमित हैं, गांवों के कैंप में मनोरंजन के लिए टीवी और खेलकूद का सामान उपलब्ध नहीं है। विभाग में 2006 से भर्तियां नहीं हुई, 2016 में 400 कर्मी भर्ती हुए, लेकिन 400 से अधिक कर्मी डायल-100 सेवा में चले गए।
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सब्जी, राशन लाने को नहीं वाहन
पीएसी कर्मी ने बताया गांव में कैंप के दौरान सब्जी और राशन लाने के लिए वाहन उपलब्ध नहीं होते। ऐसे में ग्रामीणों से बाइक, तांगा या जुगाड़ मांग कर का चलाना पड़ता है। कई बार रसोई गैस के लिए एसओ पर्ची बनाने से इनकार कर देते हैं। उच्च अधिकारियों से कहने पर गैस से भरा सिलेंडर मिलता है। गांव में कैंप के लिए ट्रक या बस बड़े वाहन मिलते हैं।
गंदे शौचालयों के कारण खुले में शौच
पीएसी कर्मी बताते हैं कि सर्दी, गर्मी और बारिश के मौसम में गांवों में परेशानी का सामना करना पड़ता है। शौचालय नहीं होने पर खुले में शौच जाते हैं। जबकि भारत सरकार करोड़ों रुपये स्वच्छ भारत मिशन पर खर्च कर रही है।
जिले में इन स्थानों पर हैं पीएसी के शिविर
वर्तमान में जिले में पांच स्थानों पर पीएसी के कर्मचारी शिविर कर रहे हैं। अलीगंज नई तहसील परिसर, अवागढ़ थाना, जैथरा थाना क्षेत्र का अहमदपुर गांव, जिला मुख्यालय पर पुलिस लाइन परिवार और कचहरी परिवार शामिल है। पुलिस लाइन से खाना बनने के बाद कचहरी परिसर जाता है या फिर कर्मी वहां से पैदल चल कर एक किमी दूर भोजन करने पुलिस लाइन जाते हैं।
सरकार की ओर से मिलतीं हैं सुविधाएं
पीएसी बटालियन 38 के प्लाटून कमांडर कहते हैं धोबी, नाई, फलोअर सब विभाग देता है। 2500 रुपये सभी कर्मियों के एडवांस जमा होते हैं। खाने के करीब 40 से 45 रुपये सैलरी से रोज कटते हैं। अब तंबू में रहकर ड्यूटी नहीं करनी पड़ती है। गांवों में कैंप के लिए पंचायत घर या स्कूल उपलब्ध हैं। विभाग बर्तन और रसोई गैस सिलेंडर हर कंपनी को उपलब्ध कराता है।
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इधर, पीएसी की बात करें तो कर्मियों के लिए सुविधाओं की कमी है।
पीएसी के एक जवान ने ड्यूटी का हाल बयां करते हुए बताया कि विभाग की ओर से धोबी, नाई, फलोवर मिलता है, लेकिन वे सब मुख्य कैंप तक सीमित हैं, गांवों के कैंप में काम खुद करने पड़ते हैं। गांवों में कैंप करने पर लू के थपेड़ों के बीच ड्यूटी और सर्दियों में घर से गर्म कपड़े लाकर सर्दी से बचना पड़ता है। विभाग की ओर से सिर्फ गर्म कपड़े पहनने की व्यवस्था है ओढ़ने के विभाग कुछ नहंीं देता।
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पीएसी कर्मी ने बताया कि खेलकूद का सामान, टीवी, डिश शहरों के कैंप तक सीमित हैं, गांवों के कैंप में मनोरंजन के लिए टीवी और खेलकूद का सामान उपलब्ध नहीं है। विभाग में 2006 से भर्तियां नहीं हुई, 2016 में 400 कर्मी भर्ती हुए, लेकिन 400 से अधिक कर्मी डायल-100 सेवा में चले गए।
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सब्जी, राशन लाने को नहीं वाहन
पीएसी कर्मी ने बताया गांव में कैंप के दौरान सब्जी और राशन लाने के लिए वाहन उपलब्ध नहीं होते। ऐसे में ग्रामीणों से बाइक, तांगा या जुगाड़ मांग कर का चलाना पड़ता है। कई बार रसोई गैस के लिए एसओ पर्ची बनाने से इनकार कर देते हैं। उच्च अधिकारियों से कहने पर गैस से भरा सिलेंडर मिलता है। गांव में कैंप के लिए ट्रक या बस बड़े वाहन मिलते हैं।
गंदे शौचालयों के कारण खुले में शौच
पीएसी कर्मी बताते हैं कि सर्दी, गर्मी और बारिश के मौसम में गांवों में परेशानी का सामना करना पड़ता है। शौचालय नहीं होने पर खुले में शौच जाते हैं। जबकि भारत सरकार करोड़ों रुपये स्वच्छ भारत मिशन पर खर्च कर रही है।
जिले में इन स्थानों पर हैं पीएसी के शिविर
वर्तमान में जिले में पांच स्थानों पर पीएसी के कर्मचारी शिविर कर रहे हैं। अलीगंज नई तहसील परिसर, अवागढ़ थाना, जैथरा थाना क्षेत्र का अहमदपुर गांव, जिला मुख्यालय पर पुलिस लाइन परिवार और कचहरी परिवार शामिल है। पुलिस लाइन से खाना बनने के बाद कचहरी परिसर जाता है या फिर कर्मी वहां से पैदल चल कर एक किमी दूर भोजन करने पुलिस लाइन जाते हैं।
सरकार की ओर से मिलतीं हैं सुविधाएं
पीएसी बटालियन 38 के प्लाटून कमांडर कहते हैं धोबी, नाई, फलोअर सब विभाग देता है। 2500 रुपये सभी कर्मियों के एडवांस जमा होते हैं। खाने के करीब 40 से 45 रुपये सैलरी से रोज कटते हैं। अब तंबू में रहकर ड्यूटी नहीं करनी पड़ती है। गांवों में कैंप के लिए पंचायत घर या स्कूल उपलब्ध हैं। विभाग बर्तन और रसोई गैस सिलेंडर हर कंपनी को उपलब्ध कराता है।