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नोट बंदी की मार: लघु उद्योग बंदी के कगार पर
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 12 Nov 2016 10:32 PM IST
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सूनी पड़ी गल्ला मंडी
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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कालेधन के लिए भले ही सरकार की यह बड़ी सर्जिकल स्ट्राइक है लेकिन नोटबंदी के इस निर्णय ने लघु उद्योगों पर इस निर्णय की जबरदस्त मार पड़ी है। लघु उद्योग बंदी के कगार पर पहुंच रहे हैं। इन उद्योगों में एक तिहाई ही उत्पादन रह गया है क्योंकि न ही कामगार काम पर आ रहे हैं और न कच्चा माल आ पा रहा है और न ही तैयार माल की बिक्री हो पा रही है।
औद्योगिक अस्थान में स्थापित कई लघु उद्योगों की हालत बेहद खराब होती जा रही है। उद्यमी परेशान है। गंजडुंडवारा कस्बे में पॉवर लूम की कई औद्योगिक इकाइयां हैं। यह इकाइयां भी भुगतान संकट की मार झेेल रही हैं। सर्वाधिक परेशानी कामगारों को दिहाड़ी देने की है। दिहाड़ी देने के लिए प्रचलित नोट लोगों के पास नहीं है और बंद किए गए नोट मजदूर लेने को तैयार नहीं है। तमाम श्रमिकों के बैंक खाते नहीं हैं। ऐसी स्थिति में श्रमिक काम पर भी नहीं आ रहे। इस समस्या के कारण लघु उद्योगों पर जबरदस्त मार हैं। इस समस्या के चलते लघु उद्योगों की कमर टूट गई है। उद्यमियों को आगामी समय में भी भुगतान का संकट दिखाई दे रहा है क्यों कि बैंक से एक बार में 2000 रुपये की निकासी की जा सकती है वहीं सप्ताह में 20,000 रुपये तक निकाले जा सकते हैं। ऐसी स्थिति में लघु उद्योगों के भला होने के हालात नहीं है क्योंकि कई उद्योगों में प्रतिदिन 20,000 से 50,000 रुपये तक का मजदूरों का भुगतान किया जाता है। कई लघु उद्योगों के सामने कच्चे माल का संकट है वही उत्पाद की बिक्री भी ठप हो गई है। चैरी कारोबारी शशिकांत गर्ग ने बताया कि ऐसी स्थिति में अपना उत्पादन रोकने का निर्णय लिया है क्योंकि भुगतान संकट का निवारण दिखाई नहीं दे रहा है। वहीं डिटर्जेंट कारोबारी दीपक गोयल ने कहा कि कामगारों की समस्या को देखते हुए इकाई का उत्पादन एक तिहाई रह गया है। वहीं ट्रांसपोर्ट कारोबारी राजेंद्र सिंह ने बताया कि शुक्रवार को आगरा, अलीगढ़, दिल्ली की गाड़ियों में काफी कम लोड आया।
टैक्स जमा करने को संचालित हों अलग काउंटर
कासगंज। बैंकों में सेल टैक्स को जमा करने के लिए स्टेट बैंक की शाखाओं में काउंटर संचालित नहीं किए गए हैं। अक्तूबर माह का टैक्स 20 नवंबर तक जमा होना है। इस निर्धारित अवधि में टैक्स जमा नहीं हो पाता तो विभाग को पेनल्टी बसूलने का प्रावधान है। बैंकों में लंबी लाइनें लगी हुई हैं ऐसे में टैक्स जमा नहीं हो पर रहा। ऐसे में दीपक गोयल ने जिलाधिकारी एवं वाणिज्य कर के अधिकारियों को टैक्स जमा करने के लिए अलग काउंटर संचालित करने की मांग की है।
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औद्योगिक अस्थान में स्थापित कई लघु उद्योगों की हालत बेहद खराब होती जा रही है। उद्यमी परेशान है। गंजडुंडवारा कस्बे में पॉवर लूम की कई औद्योगिक इकाइयां हैं। यह इकाइयां भी भुगतान संकट की मार झेेल रही हैं। सर्वाधिक परेशानी कामगारों को दिहाड़ी देने की है। दिहाड़ी देने के लिए प्रचलित नोट लोगों के पास नहीं है और बंद किए गए नोट मजदूर लेने को तैयार नहीं है। तमाम श्रमिकों के बैंक खाते नहीं हैं। ऐसी स्थिति में श्रमिक काम पर भी नहीं आ रहे। इस समस्या के कारण लघु उद्योगों पर जबरदस्त मार हैं। इस समस्या के चलते लघु उद्योगों की कमर टूट गई है। उद्यमियों को आगामी समय में भी भुगतान का संकट दिखाई दे रहा है क्यों कि बैंक से एक बार में 2000 रुपये की निकासी की जा सकती है वहीं सप्ताह में 20,000 रुपये तक निकाले जा सकते हैं। ऐसी स्थिति में लघु उद्योगों के भला होने के हालात नहीं है क्योंकि कई उद्योगों में प्रतिदिन 20,000 से 50,000 रुपये तक का मजदूरों का भुगतान किया जाता है। कई लघु उद्योगों के सामने कच्चे माल का संकट है वही उत्पाद की बिक्री भी ठप हो गई है। चैरी कारोबारी शशिकांत गर्ग ने बताया कि ऐसी स्थिति में अपना उत्पादन रोकने का निर्णय लिया है क्योंकि भुगतान संकट का निवारण दिखाई नहीं दे रहा है। वहीं डिटर्जेंट कारोबारी दीपक गोयल ने कहा कि कामगारों की समस्या को देखते हुए इकाई का उत्पादन एक तिहाई रह गया है। वहीं ट्रांसपोर्ट कारोबारी राजेंद्र सिंह ने बताया कि शुक्रवार को आगरा, अलीगढ़, दिल्ली की गाड़ियों में काफी कम लोड आया।
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टैक्स जमा करने को संचालित हों अलग काउंटर
कासगंज। बैंकों में सेल टैक्स को जमा करने के लिए स्टेट बैंक की शाखाओं में काउंटर संचालित नहीं किए गए हैं। अक्तूबर माह का टैक्स 20 नवंबर तक जमा होना है। इस निर्धारित अवधि में टैक्स जमा नहीं हो पाता तो विभाग को पेनल्टी बसूलने का प्रावधान है। बैंकों में लंबी लाइनें लगी हुई हैं ऐसे में टैक्स जमा नहीं हो पर रहा। ऐसे में दीपक गोयल ने जिलाधिकारी एवं वाणिज्य कर के अधिकारियों को टैक्स जमा करने के लिए अलग काउंटर संचालित करने की मांग की है।
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