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मार्गशीर्ष मेले की तैयारियां शुरू
अमर उजाला ब्यूरो एटा
Updated Thu, 10 Nov 2016 11:24 PM IST
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मार्गशीर्ष मेले की तैयारियां शुरू
- फोटो : अमर उजाला
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शूकरक्षेत्र के वार्षिक मार्गशीर्ष अमृत कुंभ की तैयारियां शुरू हो गई हैं। इस वर्ष यह अमृत कुंभ 8 से 22 दिसंबर तक आयोजित होगा। पालिका ने गुरूवार को मेला ग्राउंड के गेटों की रंगाई-पुताई का काम शुरू करा दिया गया।
पालिका अध्यक्ष प्रतिनिधि पप्पू यादव ने बताया कि हरिपदी परिक्रमा मार्ग, प्रमुख मंदिरों, महापुरूषों के पार्कों आदि पर रंग रोगन कराया जाएगा। 15 दिन तक चलने वाले इस अमृत कुंभ के दौरान भगवान वराह के शूकरक्षेत्र की धरा पर अवतरित होने के दिवस मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष एकादशी 10 दिसंबर को प्रथम स्नान पर्व, भगवान वराह के मोक्ष दिवस मार्गशीर्ष द्वादशी 11 दिसंबर को द्वितीय स्नान, त्रयोदशी 12 दिसंबर को नागा साधुओं का शाही स्नान, व 13 दिसंबर पूर्णिमा को अंतिम स्नान पर्व आयोजित होगा। संत आश्रमों में भारत वर्ष के प्रमुख अखाडों के नागा साधु व संतों का पहुंचना शुरू हो गया है। ये संत एक माह तक सूकरक्षेत्र में प्रवास कर तप करेंगे। यह मेला धार्मिक आयोजन के साथ साथ गृहोपयोगी वस्तुओं, हथकरघा व कुटीर उघोगों के कामगारों द्वारा निर्मित वस्तुओं व स्वस्थ मनोरंजन के साधनों के लिए भी जाना जाता है। कंबल, शानदार नक्काशी के गलीचे कालीन, पत्थर निर्मित वस्तुएं सिल बटना, लकड़ी के ढोलक, टिन के बॉक्स आदि सामान प्रमुख रूप से इस मेले में बिकते हैं। वहीं सर्कस, मिनी चिड़ियाघर, काला जादू, सांस्कृतिक नृत्य घर, ऊंचे झूले, अप्पू घर आदि मनोरंजन के शो भी आयोजित होते हैं।
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पालिका अध्यक्ष प्रतिनिधि पप्पू यादव ने बताया कि हरिपदी परिक्रमा मार्ग, प्रमुख मंदिरों, महापुरूषों के पार्कों आदि पर रंग रोगन कराया जाएगा। 15 दिन तक चलने वाले इस अमृत कुंभ के दौरान भगवान वराह के शूकरक्षेत्र की धरा पर अवतरित होने के दिवस मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष एकादशी 10 दिसंबर को प्रथम स्नान पर्व, भगवान वराह के मोक्ष दिवस मार्गशीर्ष द्वादशी 11 दिसंबर को द्वितीय स्नान, त्रयोदशी 12 दिसंबर को नागा साधुओं का शाही स्नान, व 13 दिसंबर पूर्णिमा को अंतिम स्नान पर्व आयोजित होगा। संत आश्रमों में भारत वर्ष के प्रमुख अखाडों के नागा साधु व संतों का पहुंचना शुरू हो गया है। ये संत एक माह तक सूकरक्षेत्र में प्रवास कर तप करेंगे। यह मेला धार्मिक आयोजन के साथ साथ गृहोपयोगी वस्तुओं, हथकरघा व कुटीर उघोगों के कामगारों द्वारा निर्मित वस्तुओं व स्वस्थ मनोरंजन के साधनों के लिए भी जाना जाता है। कंबल, शानदार नक्काशी के गलीचे कालीन, पत्थर निर्मित वस्तुएं सिल बटना, लकड़ी के ढोलक, टिन के बॉक्स आदि सामान प्रमुख रूप से इस मेले में बिकते हैं। वहीं सर्कस, मिनी चिड़ियाघर, काला जादू, सांस्कृतिक नृत्य घर, ऊंचे झूले, अप्पू घर आदि मनोरंजन के शो भी आयोजित होते हैं।
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