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मंडी, बाजार में सन्नाटा, कैसे मिले राशन, कपड़ा और आटा
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 14 Nov 2016 10:11 PM IST
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नकदी संकट
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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नकदी संकट से उद्योगपति, व्यापारी, ट्रांसपोर्टर, किसान, सर्राफ, दवा विक्रेता मंडी कारोबार जूझ रहे हैं। रविवार तक बैंक खुलने पर लोग लाइन में लगकर खर्च चला रहे थे, लेकिन सोमवार को एटीएम और बैंक दोनों बंद होने से कारोबार और उद्योग जगत का पहिया पूरा तरह थम गया। सोमवार को मंडी में सन्नाटा पसरने के साथ बाजारों में व्यापारी हाथ पर हाथ धरे बैठे दिखे। यही नहीं मंडी शुल्क के रूप में प्रदेश सरकार को रोजाना लाखों रुपये का चूना लग रहा है।
आढ़तियों से नई करेंसी का भुगतान नहीं मिलने से किसान बाजार से कीटनाशक, खाद, बीज नहीं खरीद रहे। मंडी खाद्यान्न समिति अध्यक्ष सतीश चंद्र गुप्ता ने कहा कि किसान पुराने नोट लेने को तैयार नहीं है। मंडी आने से पहले किसान नई करेंसी आने की बात पूछ कर आ रहे हैं। समितियों में खाद, बीज और कीटनाशक की बिक्री बंद पड़ी है। रोजाना दस लाख रुपये शुल्क कमाने वाली मंडी एक लाख भी नहीं कमा पा रही है। किसानों का कहना है कि सूदखोर पुराने नोट लेने को मजबूर कर रहे हैं और सराफा कारोबारी नकदी संकट से जेवर गिरवी रखने को तैयार नहीं है। मंडी कोषाध्यक्ष ने कहा हम चेक से भुगतान को तैयार है, लेकिन किसान चेक से भुगतान नहीं ले रहे। मंडी में कारोबार दस प्रतिशत सिमट चुका है। कमोवेश यही हाल ट्रांसपोर्ट, सराफा बाजार, दवा विक्रेता, किराना, देशी, शराब, होटल और ढाबाें का है। ठेकेदार सतीश चंद्र की मानें तो डिपो में पुराने 500 और 1000 रुपये के नोट नहीं ले रहे। खाते में कैश जमा करा कर आरटीजीएस कराने का विकल्प मात्र है। वहीं जिन ठेकों में शराब है वहां ग्राहकों के पास छोटे नोट नहीं है। इसके चलते शराब ठेकों का कारोबार 80 प्रतिशत गिर चुका है।
जिले में इस बार धान की बंपर पैदावार होने का अनुमान है। डिप्टी आरएमओ प्रज्ञा शर्मा का कहना है कि किसान भुगतान को लेकर परेशान न हों। इस बार एक नवंबर से खरीद शुरू हुई है। धान बिकने के बाद 48 घंटे में खाते में भुगतान पहुंचेगा। इसके बाद भी किसान आनलाइन पेमेंट में रुचि नहंी दिखा रहे हैं। इसके चलते सरकारी क्रय केंद्रों पर सन्नाटा है और किसान किस्मत खराब होने का रोना रो रहे हैं। उधर, जिले की मंडियाें में करीब 2500 पल्लेदार काम करते हैं। अनाज की आवक नहीं होने के कारण पल्लदारों के सामने रोजी रोटी का संकट खड़ा हो गया है। पल्लेदार रामअवतार ने बताया कि वो पिछले दस नवंबर से उधार राशन खरीद कर परिवार का पेट पाल रहा है।
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एटा गोल्डन ट्रांसपोर्ट के पास 25 ट्रक हैं। रविवार को 8 ट्रक लौटे और आकर खड़े हो गए। ट्रांसपोर्ट मालिक बलजीत सिंह ने कहा स्टाफ को बैंक लाइन में लगा कर रोज के खर्चे चलाने मुश्किल हो रहे हैं। जो ट्रक बाहर हैं उन्हें नकदी संकट के कारण माल की बुकिंग नहंी मिल रही। और एटा से बाहर ट्रक भेजने पर चालक और क्लीनर के खर्च के लिए रुपये नहीं है। इसके चलते कारोबार चौपट हो चुका है। वहीं, सराफा कारोबारी अमित चौहान ने कहा कि ग्राहकों को लौटना पड़ रहा है। किसान जेवर गहने रख खाद, बीज के लिए रुपये लेने पहुंच रहे हैं, लेकिन नकदी नहीं होने से लौट रहे हैं।
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आढ़तियों से नई करेंसी का भुगतान नहीं मिलने से किसान बाजार से कीटनाशक, खाद, बीज नहीं खरीद रहे। मंडी खाद्यान्न समिति अध्यक्ष सतीश चंद्र गुप्ता ने कहा कि किसान पुराने नोट लेने को तैयार नहीं है। मंडी आने से पहले किसान नई करेंसी आने की बात पूछ कर आ रहे हैं। समितियों में खाद, बीज और कीटनाशक की बिक्री बंद पड़ी है। रोजाना दस लाख रुपये शुल्क कमाने वाली मंडी एक लाख भी नहीं कमा पा रही है। किसानों का कहना है कि सूदखोर पुराने नोट लेने को मजबूर कर रहे हैं और सराफा कारोबारी नकदी संकट से जेवर गिरवी रखने को तैयार नहीं है। मंडी कोषाध्यक्ष ने कहा हम चेक से भुगतान को तैयार है, लेकिन किसान चेक से भुगतान नहीं ले रहे। मंडी में कारोबार दस प्रतिशत सिमट चुका है। कमोवेश यही हाल ट्रांसपोर्ट, सराफा बाजार, दवा विक्रेता, किराना, देशी, शराब, होटल और ढाबाें का है। ठेकेदार सतीश चंद्र की मानें तो डिपो में पुराने 500 और 1000 रुपये के नोट नहीं ले रहे। खाते में कैश जमा करा कर आरटीजीएस कराने का विकल्प मात्र है। वहीं जिन ठेकों में शराब है वहां ग्राहकों के पास छोटे नोट नहीं है। इसके चलते शराब ठेकों का कारोबार 80 प्रतिशत गिर चुका है।
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जिले में इस बार धान की बंपर पैदावार होने का अनुमान है। डिप्टी आरएमओ प्रज्ञा शर्मा का कहना है कि किसान भुगतान को लेकर परेशान न हों। इस बार एक नवंबर से खरीद शुरू हुई है। धान बिकने के बाद 48 घंटे में खाते में भुगतान पहुंचेगा। इसके बाद भी किसान आनलाइन पेमेंट में रुचि नहंी दिखा रहे हैं। इसके चलते सरकारी क्रय केंद्रों पर सन्नाटा है और किसान किस्मत खराब होने का रोना रो रहे हैं। उधर, जिले की मंडियाें में करीब 2500 पल्लेदार काम करते हैं। अनाज की आवक नहीं होने के कारण पल्लदारों के सामने रोजी रोटी का संकट खड़ा हो गया है। पल्लेदार रामअवतार ने बताया कि वो पिछले दस नवंबर से उधार राशन खरीद कर परिवार का पेट पाल रहा है।
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एटा गोल्डन ट्रांसपोर्ट के पास 25 ट्रक हैं। रविवार को 8 ट्रक लौटे और आकर खड़े हो गए। ट्रांसपोर्ट मालिक बलजीत सिंह ने कहा स्टाफ को बैंक लाइन में लगा कर रोज के खर्चे चलाने मुश्किल हो रहे हैं। जो ट्रक बाहर हैं उन्हें नकदी संकट के कारण माल की बुकिंग नहंी मिल रही। और एटा से बाहर ट्रक भेजने पर चालक और क्लीनर के खर्च के लिए रुपये नहीं है। इसके चलते कारोबार चौपट हो चुका है। वहीं, सराफा कारोबारी अमित चौहान ने कहा कि ग्राहकों को लौटना पड़ रहा है। किसान जेवर गहने रख खाद, बीज के लिए रुपये लेने पहुंच रहे हैं, लेकिन नकदी नहीं होने से लौट रहे हैं।